मिल्टन फ्रीडमैन उवाच ---(2)

नोबल पुरस्कार विजेता मिल्टन फ्रीडमैन (1912-2006)पिछली सदी के उन कुछ अर्थशास्त्रियों में से थे जिन्होंने सारी दुनिया की आर्थिक सोच और नजरिये को बहुत गहरे तक प्रभावित किया और उसे नए आयाम दिए।इस वर्ष इस महान उदारवादी अर्थशास्त्री की जन्म शताब्दी मनाई जा रही है। यहां प्रस्तुत है उनके लेखों  और पुस्तकों से लिए गए कुछ उद्धरण जो उनकी अनूठी आर्थिक दृष्टि को उजागर करते हैं।

  • इतिहास बताता है कि राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए पूंजीवाद आवश्यक शर्त्त है लेकिन यह स्पष्ट है कि यह शर्त पर्याप्त  नहीं है।
  • कौनसा समाज लालच पर आधारित नहीं होता ?सामाजिक संगठन की समस्या यह है कि कैसे एक ऐसी संरचना बनाई जाए जिसमें लालच सबसे कम नुक्सान करे। पूंजीवाद इस तरह की व्यवस्था है।
  • मुक्त बाजार -अबतक खोजा गया एकमात्र रास्ता  है जिसमें बहुत सारे लोग स्वयंमेंव सहयोग करते हैं। इसलिए  वह व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इतना जरूरी है।
  • कोई भी दूसरे के पैसे को उतनी सावधानी से खर्च  नहीं करता जितनी सावधानी से वह स्वंयम का पैसा खर्च करता है। कोई भी दूसरे के संसाधनों को उतनी सावधानी से उपयोग नहीं करता जितनी सावधानी से वह वह अपने संसाधनों का उपयोग करता है। इसलिए अगर आप कार्यकुशलता और  प्रभावशीलता चाहते हैं ,यदि आप चाहते हैं कि ज्ञान का सही अपयोग हो तो ऐसा आपको केवल प्राइवेट प्रापर्टी के जरिये ही करना होगा।
  • बुनियादी तौर पर लाखों लोगों की आर्थिक गतिविधियों को संयोजित करने के दो ही तरीके हैं । एक है केंद्र द्वारा निर्देशित जिसमें बल प्रयोग या जबरदस्ती की जाती है। यह सेना, आधुनिक सर्वसत्तावादी राज्य की तकनीक है। और दूसरा तरीका है लोगों का स्वयमेव सहयोग।यह बाजार की तकनीक है।
  • सभ्यता की महान उपलब्धियां चाहे स्थापत्य की हों या चित्रकला की,विज्ञान के क्षेत्र में हो या साहित्य के क्षेत्र में,उद्योग में हों या कृषि में, वह कभी केंद्रीकृत सरकार से नहीं आईं।कोलंबस संसद के बहुमत के निर्देश के कारण चीन के लिए नया रास्ता खोजने के लिए नहीं निकला था।हालांकि सम्राट ने उसकी आंशिक मदद की थी। न्यूटन, लिएबनिज, आइंस्टीन, बोहर, शेकसपियर, मिल्टन, पास्तरनाक, व्हिटने, मेकारमिक, एडिसन, या फोर्ड, जान एडम्स, फ्लोरेंस नाइटेंगल और अलबर्ट श्वाइत्जर–इनमें से किसी ने भी सरकार के निर्देश के कारण, साहित्य, या तकनीकी संभावनाओं या मानवीय दुर्भाग्य से राहत दिलाने के मामले में मानवीय ज्ञान और समझ के नए क्षितिजों को पाने की कोशिश नहीं की थी। ये उपलब्धियां व्यक्तिगत प्रतिभा, अल्पसंख्यक सोच पर मजबूती से डटे रहना और विविधता के लिए पोषक सामाजिक परिवेश का नतीजा हैं।
  • स्वतंत्रता एक बिरला और कोमल पौधा है ।  हमारे दिमाग हमें बताते हैं और इतिहास उसकी पुष्टी करता है कि कि सत्ता का केंद्रीकरण स्वतंत्रता के लिए खतरा है। हमारी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सरकार जरूरी है। यह एक साधन है जिसके जरिये हम अपनी स्वतंत्रता का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन राजनीतिक हाथों में सत्ता का केंद्रीकरण होना स्वतंत्रता के लिए खतरा हो सकता है।
  • मुक्त बाजार का होना सरकार की आवश्यकता को खत्म नहीं करता। इसके विपरित सरकार खेल के नियम तय करने और तय नियमों की व्याख्या करने और उन्हें लागू करनेवाले एम्पायर के मंच के रूप में जरूरी है।
  • स्वतंत्र मनुष्य के लिए देश उन व्यक्तियों का समूह है जिनसे वह बना है न कि कोई ऐसी चीज जो उनसे परे या उपर है। उसे सामूहीक विरासत पर गर्व होता है और वह सामूहिक परंपराओं के प्रति निष्ठावान रहता है।  लेकिन वह सरकार को साधन या उपकरण  मानता है न कि उपहार देनेवाला या फेवर करनेवाला न ही वह उसे मालिक या भगवान मानता है जिसकी अंधे होकर पूजा की जाए या सेवा की जाए।
  • राजनीतिक स्वतंत्रता का मतलब है कोई व्यक्ति अन्य लोगों पर जबरदस्ती न करे। बल प्रयोग की शक्ति स्वतंत्रता के लिए बुनियादी खतरा है। चाहे यह शक्ति किसी राजा के हाथों में हो या तानाशाह के, कुछ लोगों के हाथों में सिमटे शासन या अस्थायी बहुमत के। स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जरूरी है कि सत्ता के केंद्रीकरण को  अधिकतम संभव सीमा तक खत्म किया जाए और जिसे खत्म नहीं किया जा सकता उसका चैक्स एंड बैलेंस की व्यवस्था के द्वारा वितरण किया जाए।