इनाम की मानसिकता से हटना होगा परे

भारत ने 28 साल बाद विश्व कप क्रिकेट पर कब्जा कर चारो तरफ जश्न का माहौल बना दिया। इससे पहले 1983 में लार्ड्स के मैदान पर कपिलदेव के नेतृत्व में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को पराजित कर क्रिकेट विश्वकप जीता था. 2011 के फाइनल मैच के रोमांचक  मुकाबले में भारतीय टीम ने श्रीलंका की टीम को छह विकेट से हरा दिया और सालों से बंधी लोगों की उम्मीदों को पूरा किया। इसी के साथ धोनी के धुरंधरों पर देश के लगभग हर हिस्से से तोहफों की बौछार होने लगी। खिलाड़ियों को सम्मानित करने की होड़ में मानो कोई पीछे नहीं रहना चाहता.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को 2 करोड़ रुपये और टीम इंडिया में दिल्ली के चारों खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, विराट कोहली और आशीष नेहरा को एक-एक करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण राज्य सरकार की ओर से सचिन तेंदुलकर और जहीर खान को एक-एक करोड़ रुपये प्रदान करेंगे तो पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने युवराज और हरभजन के लिए एक-एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने टीम इंडिया के हर खिलाड़ी को राज्य में आवासीय भूखंड देने की घोषणा की है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सचिन और धोनी को मसूरी हिल स्टेशन पर घर अथवा भूखंड देने का वादा किया है। उन्होंने राज्य में धोनी के नाम से एक स्टेडियम बनाने का भी ऐलान किया है। गुजरात सरकार यूसुफ पठान और मुनफ पटेल को राज्य का सर्वोच्च सम्मान ‘एकलव्य अवार्ड’ देगी। अवार्ड के तहत एक लाख रुपये और स्मृति चिह्न प्रदान किया जाता है। झारखंड सरकार राज्य में क्रिकेट अकादमी के लिए धोनी को जमीन उपलब्ध कराएगी। जीत की खुशी में शरीक होते हुए रेलवे ने भी टीम इंडिया के सदस्यों और उसके एक सहयोगी को प्रथम श्रेणी का एसी आजीवन पास देने की घोषणा की है। ऐसे ही और भी कई इनामों की घोषणा इन खिलाडियों के लिए करी गयी है. यहाँ ये भी याद रखना होगा की मैच जीतने के बाद विजेता भारत को 30 लाख डॉलर (14 करोड़ रुपए) दिए गए और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भारतीय टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को 1-1 करोड़ रुपए देने का भी निर्णय लिया.

पुराने ज़माने में जिस तरह राजा महाराजा अपने दरबार में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कलाकार या खिलाड़ी को सौगात या इनाम देते थे उसी तरह आज कल मंत्री और मुख्य मंत्री सरकारी खजाने को अपनी ही रियासत का हिस्सा समझते हुए इनामो की घोषणा करते हैं. पर भारत अब एक लोकतंत्र है और राजाओ व बादशाहों की तरह वो हम पर शासन नहीं करते हैं. वो ऐसे प्रतिनिधि हैं जिन्हें हम ही सरकार व देश चलने के लिए चुनते हैं. देश का खज़ाना उनका व्यक्तिगत पर्स नहीं है कि वो जो जिस तरह चाहें उसका उपयोग करें. उन्हें कुछ निश्चित सार्वजनिक उपयोगों के लिए हमारे द्वारा टैक्स दिया जाता है. एक तरह से वो हमारे टैक्स धन के रखवाले हैं. दुर्भाग्यवश लोकतान्त्रिक व्यवस्था होने के बावजूद सरकार और नागरिक के बीच में राजा और प्रजा जैसा ही सम्बन्ध है ना कि एक गणतंत्र में रहने वाले स्वतंत्र नागरिक और उसके सरकारी प्रतिनिधि जैसा.

ये इनाम देने की ही मानसिकता है जिस के चलते हमारी राज्य सरकारों ने क्रिकेटरों पर नकद इनाम और ज़मीन आवंटन की बौछार करी. उपलब्धियों को सराहना और हमारे क्रिकेट सितारों की प्रतिभा को पहचानना ठीक है पर ऐसा करने का एक सही तरीका होना चाहिए. एक सामान्य करदाता क्यूँ क्रिकेट टीम के वर्ल्ड कप जीतने पर धन खर्च करे? और वैसे भी टैक्स द्वारा लिए गए रुपयों के दूसरे और कई ज़रूरी उपयोग हैं.

ये भी कहा जा सकता है कि हजारों करोड़ के बजट में अगर कुछ करोड़ दे दिए गए तो क्या हुआ और कुछ मामलों में तो मुख्यमंत्री ने अपने विवेकाधीन कोष में से ये इनाम दिए. पर फिर भी ये बात अपनी जगह ठोस है की सरकारी धन, चाहे कम हो या विवेकाधीन हो, का उपयोग जनता के भले के लिए ही होना चाहिए. खिलाडियों को सम्मानित करने के लिए हमारे देश में पहले से अर्जुन पुरुस्कार है और फिर वो विज्ञापन कर के और मैच से कमाई गयी फीस से वैसे भी अच्छा ख़ासा वेतन कमा लेते हैं.

हाँ खिलाडियों के नाम स्टेडियम करना एक अच्छा कदम है. देश भर में नेहरु-गाँधी परिवार के नाम पर जो स्टेडियम हैं उनको वर्तमान के सितारों के नाम कर देना चाहिए. और भी कई शहरी इमारतों और प्रतिष्ठानों को उनके स्थानीय खिलाडी के नाम किया जा सकता है. इस में अधिक खर्च भी नहीं आएगा और खिलाडी को उचित सम्मान भी मिलेगा. इनाम देने की मानसिकता ही दोषपूर्ण है. ये उस मध्यकालीन मानसिकता का परिचायक है जहां राजा प्रजा पर कृपा करता था. इस के विपरीत हमें एक ऐसी सरकार चाहिए जो मुफ्त चीज़ें ना देकर अपने नागरिको को उचित सम्मान और शासन दे.

- स्निग्धा द्विवेदी