बैंकों का राष्ट्रीयकरण और गरीबों-किसानों का हित

भारत सरकार ने लघु उद्यमियों, किसानों आदि के हितों के नाम पर देश के निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था। बैंकिंग कम्पनीज़ (एक्वीज़ीशन एंड ट्रांसफर ऑफ अंडरटेकिंग्स) 1969 नामक आर्डिनेंस लाकर 14 बड़े कमर्शियल बैंकों के समस्त अधिकारों को सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। लेकिन बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 49 वर्ष बीतने के बाद क्या स्थितियां सुधरी हैं? क्या राष्ट्रीयकरण के उद्देश्यों की पूर्ति करने में सरकार सफल रही है? क्या अब भी बड़े पूंजीपति और सरकार के करीबी व्यापारी बैंकों में जमा जनता के पैसे का दुरुपयोग नहीं कर रहें हैं? हमारे कार्टूनिस्ट की निगाहों से देखें इस मुद्दे को.. 

- आज़ादी.मी