सार्वजनिक नीति - आजीविका लेख

आजीविका के लिए अवरोध दूर करना

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी ऐसे नियामक अवरोधों को दूर करने के लिए काम करता है जिनसे अनौपचारिक क्षेत्र में विकास और उद्यमी अवसर सीमित हो जाते हैं। अपने पुरस्कार प्राप्त ''कानून, स्वतन्त्रता और आजीविका'' अभियान के माधयम से यह केन्द्र अपना ध्यान इस बात पर केन्द्रित करता है ताकि परमिट प्रक्रियाओं को घटाया और सरल बनाया जाए जिनसे छोटे उद्यमियों, दुकानदारों, फेरी वालों और रिक्शा चलाने वालों को अपने व्यवसाय को स्थापित करने और आगे बढ़ाने से रोका जाता है। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी अपने प्रवर्तक और स्थापक कार्यक्रम जैसे जीविका, ऐशिया आजीविका प्रलेखी वार्षिक त्यौहार के माधयम से छोटे उद्यमियों को पेश आने वाली बाधाओं के प्रति जागरूकता का निर्माण कर रहा है|

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तो हमने उबर पर प्रतिबंध लगा दिया और इसके साथ एप आधारित सारी टैक्स कंपनियों पर भी पाबंदी लगा दी, क्योंकि मोबाइल एप कंपनी में रजिस्टर्ड ड्राइवर ने टैक्सी में सवार दिल्ली की युवती से दुराचार किया था। कारण बताया गया कि उबर ने पंजीयन नहीं कराया और उस प्रक्रिया का पालन नहीं कराया, जो एक रेडियो कंपनी को करना चाहिए और स्वतंत्र रूप से अपने ड्राइवरों की पृष्ठभूमि की पर्याप्त जांच नहीं की। उनका सत्यापन नहीं कराया। बेशक, सरकार ने नहीं बताया कि कंपनी को दुराचार की घटना होने के पहले महीनों तक क्यों काम करने दिया गया।
अर्थव्यवस्था में लेनदेन मुख्य रूप से उत्पादक और उपभोक्ता के बीच होता है। जैसे किसान सब्जी उगाता है और एक परिवार उसकी खपत करता है। यदि परिवार का कोई सदस्य गांव जाकर लौकी खरीदे तो कठिनाई होती है, इसलिए समाज ने मंडी और दुकानदार बनाए। अब यह काम इंटरनेट के जरिए होने लगा है। कई शहरों में लोगों ने सब्जी पहुंचाने की वेबसाइट बनाई है। आप सुबह अपना ऑर्डर बुक करा सकते हैं। साइट का मालिक मंडी से सब्जी लाकर सीधे आपके घर पहुंचा देगा। सब्जी पसंद न आए तो आप लौटा सकते हैं। दुकानदार और ठेले वालों की जरूरत नहीं रह गई है। इससे छोटे ही नहीं, बड़े विक्रेता भी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार अब छह माह से अधिक पुरानी हो चुकी है, लेकिन सवाल यही है कि हम इसकी शुरुआती प्रगति का आकलन किस रूप में किया जाए? इसमें दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर भारत की उम्मीदों को कहीं अधिक बढ़ा दिया है और लोगों को उन पर पूरा विश्वास भी है। आम चुनावों के दौरान उन्होंने जिस गतिशीलता और ऊर्जा-उत्साह के साथ कार्य किया था वह दुनिया के तमाम देशों की यात्रएं करने के बावजूद अभी भी बरकरार है। उनकी विदेश यात्रओं के क्रम में जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार और फिजी ही नहीं,
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा द्वारा वेश्यावृति को कानूनी मान्यता दिलाने संबंधी बयान भले ही देश में बहस का मुद्दा बन गया हो लेकिन देश में वेश्यावृति के माध्यम से जीवन यापन करने वाली लाखों सेक्स वर्कर्स को सुरक्षा, गरिमा और स्वास्थ प्रदान करने का एक मात्र यही तरीका है। 
 
दुनिया के कई देशों नें वेश्यावृति कानून में बदलाव कर और इसे कानूनी वैधता प्रदान कर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हैं। उदाहरण के लिए नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड,
मोदी सरकार के कार्यकाल के पहले बजट को प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 100 स्मार्ट सिटी बसाने की योजना की घोषणा की है। स्मार्ट सिटी के लिए 7000 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है और इसमें एफडीआई अर्थात प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की शर्तों में ढील दी गई है। योजना के तहत स्मार्ट सिटी का विकास महानगरों और बड़े शहरों के उपनगर के तौर पर किया जाना है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को शहरों की विश्वस्तरीय सुविधा, रोजगार आदि उपलब्ध कराना और दिल्ली जैसे शहरों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना है।
संयुक्त राष्ट्र ने तेजी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के बाबत नई रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली आबादी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर बन गई है। दुनिया भर में शहरीकरण की संभावनाओं से जुड़ी 2014 की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 3.8 करोड़ की आबादी वाला टोक्यो इकलौता ऐसा शहर है जो दिल्ली (2.5 करोड़) से आगे है। देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर मुंबई इस सूची में छठे स्थान पर है 2.1 करोड़ आबादी के साथ।
 
संयुक्त राष्ट्र
सी. रंगराजन कमेटी द्वारा गरीबी रेखा के संबंध में प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर विवाद मचना तय था। 30 रुपए, 32 रुपए, 35 रुपए और 47 रुपए को गरीबी का पैमाना मानना कहीं से भी तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है लेकिन गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को मिलने वाली सरकारी सहायता और सब्सिडी का बाजार मूल्य निकालें तो अवश्य ही आंकड़ा 47 रुपए से कई गुना अधिक बढ़ जाएगा। यह भी सोचने वाली बात है कि आखिर "वेलफेयर" (भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, रोजगार का अधिकार, मुफ्त चिकित्सा सुविधा) के नाम पर इतना खर्च होने के बाद भी गरीबों के हाथ कुछ नहीं लगता
नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत में कारोबारी माहौल बनाने की होगी 
 
देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले छोटे-बड़े कारोबारियों की अपेक्षा है कि नई सरकार अंग्रेजी राज के समय से चले आ रहे अप्रासंगिक और बेतुके कानूनों से उन्हें मुक्ति दिलाए। इन दिनों दुनिया के आर्थिक संगठन और अर्थ विशेषज्ञ एक स्वर में कह रहे हैं कि आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए नई भारत सरकार को सबसे पहले कारोबारी

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