सार्वजनिक नीति - आजीविका लेख

आजीविका के लिए अवरोध दूर करना

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी ऐसे नियामक अवरोधों को दूर करने के लिए काम करता है जिनसे अनौपचारिक क्षेत्र में विकास और उद्यमी अवसर सीमित हो जाते हैं। अपने पुरस्कार प्राप्त ''कानून, स्वतन्त्रता और आजीविका'' अभियान के माधयम से यह केन्द्र अपना ध्यान इस बात पर केन्द्रित करता है ताकि परमिट प्रक्रियाओं को घटाया और सरल बनाया जाए जिनसे छोटे उद्यमियों, दुकानदारों, फेरी वालों और रिक्शा चलाने वालों को अपने व्यवसाय को स्थापित करने और आगे बढ़ाने से रोका जाता है। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी अपने प्रवर्तक और स्थापक कार्यक्रम जैसे जीविका, ऐशिया आजीविका प्रलेखी वार्षिक त्यौहार के माधयम से छोटे उद्यमियों को पेश आने वाली बाधाओं के प्रति जागरूकता का निर्माण कर रहा है|

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    देश आज जिन चुनौतियों से जूझ रहा है, बेरोजगारी उनमें से एक है, इसलिए रोजगार योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इस वर्ष का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य विभिन्न योजनाओं के तहत गरीबी खत्म करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। लेकिन यदि हम सरकार के काम-काज के तरीकों पर गौर करें तो पाएंगे कि स्वयं सरकार बेरोजगारी की समस्या के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है। इस सच्चाई को जानने-समझने के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। रोजगार के लिए पहला कदम बढ़ाने के साथ ही हमें इसका आभास हो जाता है। यदि कोई गरीब और

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