सार्वजनिक नीति - कानून और न्यायपालिका - लेख

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दशकों तक भारत में अर्थशास्त्र का तात्पर्य गरीबी का अध्ययन रहा है। कुछ समय पहले तक कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने की शुरुआत 'गरीबी के दोषपू्र्ण चक्र' नामक सिद्धांत (Theory of vicious circle of poverty) से की जाती थी। इस सिद्धांत के अनुसार गरीबी को दूर नहीं किया जा सकता। गरीब लोग तथा गरीब राष्ट्र के लिए गरीब रहना नियति है। वास्तव में यह कोरी बकवास है। यदि यह सत्य होता तो संसार आज भी पाषाण युग में होता। जीवनियों (biography) का इतिहास 'गरीबी से अमीरी का सफर' करने वाली कथाओं से भरा पड़ा है। हांगकांग और अमेरिका गरीब अप्रवासियों (

- वन कानून में बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका

- याचिका में ट्रांजिट पास परमिट व्यवस्था खत्म करने की भी लगाई गई है गुहार

विज्ञान मानता है कि बांस भी एक घास है जबकि भारतीय कानून (1927) के मुताबिक वह एक पेड़ या लकड़ी है। इस कानून के हिसाब से किसी भी सरकारी जमीन या जंगल से बांस काटना गैर-कानूनी है। यहां तक कि अपनी निजी जमीन पर भी बांस उगाकर काटने के लिए भी ट्रांजिट

विश्‍व में भारत ऐसा देश है, जहां पर बांस सबसे ज्‍यादा पाया जाता है। मगर वन विभाग कानून के तहत इसे पेड़ की कैटेगरी में दर्ज किया गया है, यही कारण है कि इसकी गैरकानूनी ढंग से कटाई पर भारत में रोक है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि बांस कोई पेड़ नहीं है, बल्‍कि यह घास की ही एक प्रजाति का वंशज है।

भारत को छोड़कर बहुत से देशों में इसे घास का दर्जा प्राप्‍त है। बांस को पेड़ की कैटेगरी से हटाकर घास की कैटेगरी में शामिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्‍द ही

सलमान खान अगर सलमान खान न होते, तो सड़क दुर्घटना के उनके मामले में इतना हंगामा होता क्या? तब निचली अदालत भी शायद इतनी सख्ती से उन्हें पांच साल की सजा न देती; यह अलग बात है कि हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है। निजी तौर पर मैं यह सवाल इसलिए भी पूछना चाहूंगी, क्योंकि मैं खुद भी कोई पंद्रह वर्षों से न्याय हासिल करने की कोशिश कर रही हूं एक सड़क दुर्घटना वाले मुकदमे में, जो अभी तक अदालत में पहुंचा ही नहीं, और अब शायद उस केस की फाइल ही गायब हो गई होगी।
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित बाल मजदूरी पर प्रस्तावित अधिनियम को मीडिया बाल मजदूरी को बदावा देने वाला एक पिछडा कदम बता रही है। वास्तव में, यह अधिनियम बाल मजदूरी को लगभग पूरी तरह से प्रतिबंधित  करता है। 
 
वर्तमान कानून सीमित तौर पर ही बाल मजदूरी को निषेध करता है – अनुसूची में वर्णित 16 निर्दिष्ट व्यवसायों और 65 निर्दिष्ट प्रक्रमों जिसमे फैक्ट्री अधिनियम में निर्दिष्ट प्रक्रमों के अलावा और भी
जब काले धन को वापस लाने की बातें राजनेता करते हैं, तब मु‌झे समझ में नहीं आता कि मैं हंसूं या रोऊं। ऐसा इसलिए, क्योंकि सबसे ज्यादा काला धन किसी के पास है, तो वे राजनेता ही हैं। लेकिन प्रायः राजनेताओं के घरों में आयकर विभाग के छापे नहीं पड़ते। इन पर शिकंजा तब कसता है, जब ये लोग कोई ऐसी हरकत करते हैं, जिससे प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री को गुस्सा आ जाए। तब जाकर मिलता है इनके घरों में, काले धन का भंडार।
 
कुछ वर्ष पहले लंदन में मैं तब थी
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समूह ने जेनेटीकली मॉडीफाइड (जीएम) फसलों के फील्ड ट्रायल पर 10 साल की पाबंदी लगाने का सुझाव दिया है। इससे निकट भविष्य में उनकी फसल उगाए जाने की संभावना पर रोक लग जाएगी। कांसार्टियम इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन्स के महासचिव चेंगल रेड्डी ने इसका यह कहकर विरोध किया है कि यह किसानों के हितों के खिलाफ है जिन्हें ज्यादा पैदावार देनेवाली और कम कीटनाशकों का उपयोग करनेवाली जीएम फसलों की जरूरत है। भारतीय उपभोक्ताओं को भी ज्यादा उत्पादन और कीटनाशकों के कम इस्तेमाल से
सेक्शन 66ए को रद्द करने के बाबत सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा श्रेया सिंघल काफी चर्चा में हैं। यूथ और नेटीजन्स के बीच श्रेया इतनी पॉपुलर हो गई हैं कि दो दिनों से ट्वीटर पर लगातार ट्रेंड कर रही हैं। हालांकि श्रेया खुद ट्वीटर पर नहीं हैं। फेसबुक पर भी श्रेया के कई फैंस क्लब और ग्रूप बन गए हैं। आजादी.मी ने श्रेया सिंघल की इस कामयाबी पर मुबारकबाद दिए और औपचारिक बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश 
 
 

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