स्वतंत्र और निष्पक्ष भूमि बाजार ही है समस्या का समाधान

- जिस विषय पर संसद में बहस होनी चाहिए उस विषय पर सड़क पर हो रहा संघर्षः गुरचरन दास
 
- सरकार ऐसी व्यवस्था सुनिश्चत करे जहां भू स्वामी और खरीददार आपस में सौदा कर सकें: पार्थ जे शाह
 
 
नई दिल्ली स्थित कांस्टिट्यूशन क्लब में गुरूवार को 'लैंड एक्वीजिशन बिल एंड कांस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया' विषयक परिचर्चा ओयोजित की गई। वर्तमान भूमि अधिग्रहण बिल मुद्दे के परिपेक्ष्य में की गई इस परिचर्चा का आयोजन थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) व गुड गवर्नेंस इंडिया फाऊंडेशन द्वारा किया गया था। इस मौके पर गुड गवर्नेंस इंडिया फाऊंडेशन के संजीव अग्रवाल द्वारा लिखित पुस्तक 'द इंडियन फेडेरलिस्ट, द ओरिजनल विल ऑफ इंडियाज फाऊंडिंग फादर' का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर लेखक संजीव अग्रवाल व सीसीएस के डॉ. पार्थ जे. शाह बतौर वक्ता उपस्थित थे। प्रॉक्टर ऐंड गैम्बल इंडिया के पूर्व सीईओ और जाने माने लेखक व स्तंभकार गुरचरन दास ने विषय प्रवर्तन किया। 
 
परिचर्चा की शुरुआत करते हुए लेखक संजीव गुप्ता ने कहा कि यदि भारत बाजार आधारित अर्थव्यवस्था के फायदों को हासिल करना चाहता है तो भूमि आधारित सवालों के समाधान 'सोशलिस्ट' तरीके से नहीं किया जा सकता। भारत को भूमि से संबंधित स्वतंत्र और निष्पक्ष बाजार की स्थापना करनी होगी। इसके लिए अन्य विकसित देशों की तरह आधुनिक तकनीक की सहायता ली जा सकती है। सरकार द्वारा शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के लिए अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण के स्वतंत्र और निष्पक्ष बाजार का विकल्प नहीं बन सकती। संविधान की मूल भावना का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि निजी संपत्ति के अधिकार की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।  
 
गुरचरन दास ने कहा कि सरकारी नीति निर्धारकों को भारतीय धर्मशास्त्रों से सीख लेनी चाहिए जहां वर्णित है कि राजा देश की भूमि और संपत्ति का मालिक नहीं होता बल्कि वह उसका पालक और रक्षक होता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सर्किल रेट के नाम पर जमीन की कीमतें नियंत्रित कर रखी हैं और भू स्वामी से उम्मीद की जाती है कि वह अपनी संपत्ति को तय कीमत पर ही बेचे। गुरचरन दास के मुताबिक भूमि अधिग्रहण जैसे अति महत्वपूर्ण विषय पर संसद की बजाए सड़क पर बहस हो रही है, जो कि किसी के हित में नहीं है।
 
डॉ. पार्थ जे शाह ने कहा कि दुनिया में तमाम वस्तुओं की खरीद फरोख्त होती है किंतु अन्य किसी चीज की खरीद फरोख्त के लिए अलग से कानून नहीं है, जबकि भूमि की खरीद बिक्री के लिए अलग से कानून की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि दरअसल, सारी समस्याओं की जड़ यही है। पार्थ ने भी सरकार को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से दूर रहने की सलाह दी और कहा कि क्रेता और भू स्वामी को आपस में क्रय विक्रय करने की अनुमति प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने महिंद्रा कंपनी के द्वारा चेन्नई में बिना विवाद विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के लिए स्वयं जमीन खरीदने के मामले का उदाहरण दिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार मौजूद थे। 
 
- आजादी.मी