सरकार की मंशा निजी स्कूलों पर नियंत्रण रखने की होती हैः जिश्नू दास

वर्ल्ड बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री व हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्कॉलर जिश्नू दास ने कहा है कि सरकार व सरकारी एजेंसियों की मंशा प्राइवेट स्कूलों पर रोक लगाने और उनपर नियंत्रण रखने की होती है। उन्होंने कहा है कि सरकार व इसके प्रतिनिधियों द्वारा स्कूलों पर तमाम प्रकार के आरोप लगाए जाते हैं जिनमें प्राइवेट स्कूल समाज में असमानता पैदा करते हैं, अभिभावक अपने बच्चों के लिए अच्छे स्कूल का चयन नहीं कर सकते, प्राइवेट स्कूल एलीट ग्रूप के लिए होते हैं और गरीब उनकी शिक्षा को अफोर्ड नहीं कर सकते आदि सबसे अधिक सामान्य आरोप होते हैं। जिश्नू दास के मुताबिक दुनिया भर में निजी स्कूलों के प्रदर्शन, कार्यप्रणाली और उनके प्रदर्शनों ने उपरोक्त आरोप को सदैव झुठलाया है। उन्होंने कहा है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान का ही उदाहरण लें तो हमें पता चलता है प्रतिस्पर्धा की स्थिति में निजी स्कूल कम शुल्क में अधिक गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करते हैं। वह बुधवार को कांस्ट्यूशन कल्ब में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान अपने विचार प्रकट कर रहे थें।

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा आयोजित, “डिलीवरिंग एजुकेशनः हाऊ द राइज ऑफ प्राइवेट स्कूल चेंजेस एवरीथिंग” विषयक व्याख्यान के दौरान जिश्नू दास ने अपने शोधों के माध्यम से सरकारी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विगत 10 वर्षों के दौरान निजी स्कूलों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है और इन स्कूलों ने अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों के प्रदर्शन के माध्यम से अपनी उपयोगिता को साबित भी किया है। इस मौके पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च फेलो व वर्तमान में लंदन यूनिवर्सिटी डा. गीता गांधी किंगडन ने कहा कि सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा उपलब्ध होने के बावजूद लोग अपने बच्चों को नीजि स्कूलों में भेजना चाहते हैं क्योंकि वे अपने बच्चों का भविष्य खराब नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि देश में होने वाले तमाम सरकारी व गैरसरकारी सर्वे इसका प्रमाण हैं। इस मौके पर सीसीएस के प्रेजिडेंट पार्थ जे शाह ने कहा कि अभिभावकों के समक्ष चुनने का विकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विकल्प को मूर्त रूप देने के लिए सरकार को स्कूलों की बजाए छात्रों को वाऊचर के माध्यम से फंड उपलब्ध कराना चाहिए।

 

- अविनाश चंद्र

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