डॉक्युमेंटरी फिल्में अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यमः सुभाष घई

बॉलीवुड में ‘शो मैन’ के नाम से मशहूर निर्माता-निर्देशक सुभाष घई का मानना है कि डॉक्युमेंटरी फिल्में अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं। जो मुद्दे मीडिया तक नहीं पहुंच पाते डॉक्युमेंटरी फिल्में उन्हें लोगों तक पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि डॉक्युमेंटरी फिल्मों को यदि ठीक ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो यह कमर्शियल फिल्मों से ज्यादा पसंद की जाएंगी। शिक्षा के बाबत बोलते हुए सुभाष घई ने कहा कि आज देश को राइट टू एजुकेशन से ज्यादा राइट एजुकेशन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था ऐसी है कि विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी होने के बावजूद लोग बेरोजगार है। उन्होंने बेरोजगार एमबीए छात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में दो लाख बेरोजगार एमबीए डिग्रीधारक हैं जबकि कॉरपोरेट सेक्टर को ऐसे तीन लाख लोगों की सख्त जरूरत है। फिर भी हाथों को काम और नियोक्ताओं को लोग नहीं मिल रहे हैं। वह रविवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘नौवें वार्षिक जीविका एशिया लाईवलीहुड डाक्युमेंटरी फिल्म फेस्टिवल 2012’ के दौरान उभरते फिल्मकारों व दर्शकों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न वर्गों के तहत चुनी गई सर्वश्रेष्ठ डाक्युमेंटरी फिल्मों को पुरस्कृत भी किया।

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्वारा ‘आजीविका के संघर्ष’ विषय पर तीन दिवसीय डाक्यूमेंटरी फिल्म फेस्टिवल के पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान मुख्य अतिथि सुभाष घई ने शिक्षा में रिफार्म की वकालत की। उन्होंने कहा कि दुनियां भर में स्किल बेस्ड शिक्षा प्रदान की जा रही है जबकि देश में अब भी रट्टा मारने वाली शिक्षा का प्रचलन है। विदित हो कि रविवार को इस फेस्टिवल का अंतिम दिन था। इस दिन चयनकर्ता मंडल द्वारा चुनी गई चार डाक्युमेंटरी को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शन के बाद ‘आई वाज बोर्न इन डेल्ही’, ‘शिफ्टिंग अंडरकरंट’ व ‘वी आर फुट सोल्जर्स’ को क्रमशः प्रथम, द्वितिय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बेस्ट स्टूडेंट डाक्युमेंटरी वर्ग के तहत ‘डायमंड बैंड’ फिल्म को पुरस्कृत किया गया। ‘रैट रेस’, ‘सायकिल ऑफ लाइफ’ व ‘हाइड अंडर माय सोल’ नामक फिल्मों को ‘स्पेशल मेंशन’ के तहत पुरस्कृत किया गया। खचाखच भरे सभागार में चुने गए फिल्मों की टीम को निर्माता-निर्देशक सुभाष घई के हाथों पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद विजेता फिल्मों के प्रतिनिधियों ने सीसीएस को धन्यवाद देते हुए इसे भविष्य के लिए प्रोत्साहित करने वाला कदम बताया। पुरस्कार वितरण के दौरान सीसीएस के प्रेसिडेंट डा. पार्थ जे शाह, जीविका के राष्ट्रीय संयोजक अमित चंद्र, जीविका फिल्म फेस्टिवल के निदेशक मनोज मैथ्यू, बैशाली बोमजन, सृजन बंदोपाध्याय, नम्रता नारायण, सदफ हुसैन, डैफनी वलाडो, भुवना आनंद, आकंक्षा बापना, शांतनु गुप्ता सहित सीसीएस बोर्ड ऑफ एडवाजरी, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी व बोर्ड ऑफ स्कॉलर्स के सदस्य मौजूद थे।

- अविनाश चंद्र