संगीतमय प्रस्तुति के साथ 10वें जीविका फिल्म फेस्टिवल का समापन

- शेफर्ड ऑफ पैराडाइज, बोटल मसाला इन मोइली, द डंकी फेयर, इन सिटी लाइट्स, हैव यू सीन द अराना को विभिन्न वर्गों की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का खिताब

- डॉक्यूमेंट्री देखने पहुंचे केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोयली, टेस्ट क्रिकेटर मुरली कार्तिक, पत्रकार कुलदीप नैय्यर व समाज सेविका अरूंधति रॉय

- चार दिनों तक चले फिल्म फेस्टिवल के दौरान दस देशों की 38 डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का हुआ प्रदर्शन, फोटो प्रदर्शनी ने भी किया आकर्षित

इंडिया हैबिटेट सेंटर में विगत चार दिनों से जारी प्रतिष्ठित ‘जीविका एशिया लाइवलीहूड डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल’ के दसवें संस्करण का रविवार को समापन हो गया। इस दौरान ‘शेफर्ड ऑफ पैराडाइज’, ‘बॉटल मसाला इन मोइली’, ‘द डंकी फेयर’, ‘इन सिटी लाइट्स’, ‘हैव यू सीन द अराना’ व ‘कैन वी सी द बेबी बम्प प्लीज’ को विभिन्न वर्गों की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के सम्मान से नवाजा गया। विजेता फिल्मों को पुरस्कार स्वरूप क्रमशः 60 हजार, 40 हजार, 30 हजार व दस-दस हजार रूपए व प्रशस्ती पत्र प्रदान किया गया। इस दौरान आजीविका, सरकारी नीतियों, सामाजिक समस्याओं आदि विषयों पर परिचर्चाओं का भी आयोजन किया गया व फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी लगाई गई।

जानी मानी शास्त्रीय संगीत गायिका विजया शाह की संगीतमय प्रस्तुति के साथ समाप्त हुए जीविका फिल्म फेस्टिवल के दौरान राजनीति, खेल, समाज सेवा व पत्रकारिता के अलावा अन्य क्षेत्रों की जानी मानी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। फेस्टिवल के आखिरी दिन जहां टेस्ट क्रिकेटर मुरली कार्तिक, समाज सेवी अरूंधति रॉय व वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने उपस्थिति दर्ज करायी वहीं एक दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली भी जीविका टीम के उत्साह वर्द्धन के लिए पंहुचे। विदित हो कि 29 जुलाई से शुरू होकर 1 सितंबर तक चले इस फिल्म फेस्टिवल के दौरान दस देशों की कुल 38 फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। प्रत्येक फिल्म के प्रदर्शन के बाद उसके निर्माता निर्देशकों व टीम के साथ परिचर्चा सत्र का भी आयोजन किया गया और प्रस्तुत समस्या का समाधान ढूंढने की कोशिश की गई।

इस दौरान ‘वे ऑफ लाइफ एंड लाइवलीहूड’ नामक फोटो प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। जीविका फिल्म फेस्टिवल के डायरेक्टर मनोज मैथ्यू ने बताया कि फिल्म फेस्टिवल के लिए इस वर्ष एक दर्जन से अधिक देशों से सौ से अधिक प्रविष्ठियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से ज्यूरी ने 38 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चुना था। जिसमें से ‘शेफर्ड ऑफ पैराडाइज’ को बेस्ट लॉंग डॉक्यूमेंट्री, ‘बॉटल मसाला इन मोइली’ को बेस्ट शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री, ‘द डंकी फेयर’ व ‘इन सिटी लाइट्स’ को संयुक्त रूप से बेस्ट स्टूडेंट कैटेगरी, ‘हैव यू सीन द अराना’ को बेस्ट सिनेमेटोग्राफी व बेस्ट एडीटिंग तथा ‘कैन वी सी द बेबी बम्प प्लीज’ को स्पेशल मेंशन डॉक्यूमेंट्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके पूर्व कैटापूल्ट द्वारा क्राउड फंडिंग विषय पर परिचर्चा भी आयोजित की गई जिसमें योगेश कारिकर्वे द्वारा डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माताओं को ‘फंड’ प्राप्त करने के तौर तरीकों के बाबत प्रशिक्षित किया गया।

 

- अविनाश चंद्र

 

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