आजीविका पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल का समापन

- 'चार' और 'पद्मिनी माय लव' को सर्वश्रेष्ठ डॉक्युमेंट्री अवार्ड, तिची गोश्ता व सिल्वर गांधी को भी मिली सराहना
- विजेता डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं का काठमांडू में होगा सम्मान
 
नई दिल्ली। आजीविका के लिए आम आदमी की 'खास' जद्दोजहद को दुनिया के समक्ष उजागर करने के उद्देश्य से सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित किए जाने वाले 'जीविका एशिया लाइवलीहुड डॉक्युमेंट्री फिल्म फेस्टिवल' का रविवार की देर शाम समापन हो गया। इस वार्षिक आयोजन का यह 11वां वर्ष है। कनॉट प्लेस स्थित यूशिकागो सेंटर ऑडिटोरियम में दो दिनों तक चले फिल्म फेस्टिवल में कुल 16 डॉक्युमेंट्री फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। भारत और बांगलादेश के निवासियों के विषय पर आधारित 'नो मैन्स लैंड' व मुबंई की सड़कों पर दौड़ने वाली काली पीली टैक्सी पद्मिनी पर बैन लगाने के मुद्दे पर आधारित 'पद्मिनी माय लव' फिल्म को क्रमशः प्रोफेशनल व स्टूडेंट वर्ग में सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया। 'तिची गोश्ता' व 'सिल्वर गांधी' को स्पेशल मेंशन वर्ग के लिए चयनित किया गया। विजेताओं को क्रमशः 50 हजार व 20 हजार की धनराशि बतौर पुरस्कार प्रदान की जाएगी। विजेताओं को नेपाल की राजधानी काठमांडू में 'एशिया लिबर्टी फोरम' के दौरान पुरस्कृत किया जाएगा। फिल्म फेस्टिवल दौरान फिल्म के निर्माण से जुड़ी टीम के साथ परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। 
 
फेस्टिवल के दौरान प्रदर्शित डॉक्युमेंट्री फिल्में
1- कैंडल्स इन द विंड
2- घुमंतू
3- पद्मिनी माय लव
4- द गोल्ड प्रॉस्पेक्टर
5- बबाई
6- ब्रेड, बटर एंड गारबेज
7- हर स्टोरीज 
8- चारः द नो-मैन्स लैंड
9- सिल्वर गांधी
10- द फेरीमैन
11- इफ्स एंड बट्स
12- घर की मुर्गी सोने बराबर
13- वुम्ब ऑन रेंट
14- पूप ऑन पावर्टी
15- डैम्मड
16- कानसुत्रा