कितना भारी है स्कूली बस्तों के भार का मुद्दा

मैं एक अभिभावक हूं और अपने बच्चे की शिक्षा और व्यापक शिक्षा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण हितधारक हूं। मेरी आवाज नहीं सुनी गई।

हाल ही में, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में एक कथित सर्क्युलर की बाढ़ सी आ गई थी, जिसमें समस्त राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां पढ़ाए जाने वाले विषयों और स्कूली बस्तों के वजन को भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार नियमित करने को कहा गया था। हालांकि मुझे मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट या दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर कहीं भी यह सर्क्युलर नहीं मिला।

उक्त सर्क्युलर के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को एक नोटिस जारी किया है जिसमें पीआईएल पाठ्यपुस्तकों को संदर्भित करता है न कि स्कूल बैग के वजन को।

डॉ स्वाति गुप्ता ने स्कूली बैग के भारी वजन वाले मुद्दे को निम्नलिखित पंक्तियों में खूबसूरती से वर्णित किया हैः

“बस्ते के बोझ”

"माँ मेरे बस्ते के बोझ में मेरा बचपन दब रहा है।
सुबह सबेरे जल्दी उठकर मैं स्कूल जाता हूँ।
देर शाम को थका हुआ स्कूल से वापस आता हूँ।
होमवर्क है इतना सारा मुश्किल से पूरा कर पाता हूँ।
माँ मेरे बस्ते के बोझ में मेरा बचपन दब रहा है।
विज्ञान गणित के प्रश्न हैं ऐसे चैन न पाने देते हैं।
इतिहास भूगोल में उलझा ऐसा नींद न आने देते हैं।
सामान्य ज्ञान के चक्कर में दिमाग का दही बन रहा है।
माँ मेरे बस्ते के बोझ में मेरा बचपन दब रहा है।
कॉम्पटीशन की होड़ लगी है मै पीछे न रह जाऊँ।
अपनी इस व्यथा को मै किसी और को कैसे समझाऊँ।
यही सोच सोच कर मन ही मन घबराता हूँ।
माँ मेरे बस्ते के बोझ में मेरा बचपन दब रहा है।
क्या भूलूँ क्या याद करुँ कुछ समझ न आता है।
खेलकूद के लिए भी मुझे समय नहीं मिल पाता है।
मेरी पीड़ा माँ सिर्फ तू ही समझे इसलिए तुझे बताता हूँ।
माँ मेरे बस्ते के बोझ में मेरा बचपन दब रहा है।"

विभिन्न कक्षाओं के लिए स्कूल बैग के लिए वजन सीमा निम्नानुसार है:

कक्षा I और II: - 1.5 किग्रा

कक्षा III से V: - 2-3 कि.ग्रा

कक्षा 6-7: - 4 किग्रा

कक्षा 8-9: - 4.5 किग्रा

कक्षा 10: - 5 किग्रा

पहली बार में, यह अत्यंत दिलचस्प प्रतीत होता है कि किस प्रकार दशमलव में समाधान किया गया है! कक्षा 1 में पढ़ने वाले मेरे बच्चे पर 1.6 किलोग्राम वजन के बैग का क्या प्रभाव पड़ेगा और कक्षा 9 में 4.8 किलोग्राम वजन वाले बैग के साथ क्या होगा!

उपरोक्त सर्क्युलर के अनुसार, - कक्षा 1 और 2 के छात्रों के लिए कोई होमवर्क नहीं दिया जाएगा। स्कूल में केवल भाषा और गणित पढ़ाया जाना चाहिए। लेकिन पढ़ाई जाने वाली भाषा क्या क्षेत्रिय भाषा होगी या हिंदी या अंग्रेजी? कक्षा 3-5 के छात्र NCERT द्वारा निर्धारित केवल भाषा, गणित और पर्यावरण विज्ञान सीखेंगे। यह फिर से एक विसंगति है क्योंकि भारत  वन नेशन, वन बोर्ड की नीति का पालन नहीं करता है।

1993 में, प्रो यशपाल समिति ने "बोझ के बिना सीखने" संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत किया था। उसके बावजूद, बैग भारी हो रहे हैं। एक अभिभावक के रूप में, मुझे इस तथ्य की जानकारी है कि भारी बैग से मेरे बच्चे की रीढ़, हाथ, कलाई और उसकी संपूर्ण मांसपेशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। हमें इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रौद्योगिकी की सहायता की आवश्यकता है..

इसे दूर करने के लिए, यहाँ मेरे कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं:

● छात्रों को भारी भरकम बस्ते से छुटकारा दिलाने के लिए डिजिटल प्रारूप में पुस्तकों को प्रदर्शित करने के लिए स्मार्टबोर्ड का उपयोग किया जाना चाहिए
● कारपूल की तरह, शिक्षक बुक पूल बना सकते हैं, जिसमें दो छात्र एक किताब साझा कर सकते हैं। एक बच्चा, क्लास में पढ़ाई जाने वाले विषयों में से आधे विषयों की पुस्तकें ला सकता है और दूसरा बच्चा दूसरा सेट ला सकता है और वे इसे साझा कर सकते हैं।
● स्कूल छात्रों को लॉकर प्रदान कर सकते हैं। इससे छात्र स्कूलों में ही किताबें / नोटबुक रख सकेंगे।
● अभ्यास और होमवर्क के लिए वर्कशीट और लाइट फोल्डर के साथ नोटबुक को बदलने से बच्चों पर दबाव कम हो सकता है।
● बैग को एर्गोनॉमिक तरीके से डिजाइन किया जाना चाहिए। स्कूलों को शोल्डरबैग के स्थान पर बैकपैक की व्यवस्था करनी चाहिए। यह पर्याप्त रूप से गद्देदार होना चाहिए और बेहतर मुद्रा के लिए कमर की बेल्ट होनी चाहिए।
● दिन के विषय के अनुसार कक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, सोमवार को अन्य गतिविधियों के साथ गणित पर केंद्रित होना चाहिए। पुस्तकों को अलग अलग खंडों में विभाजित किया जा सकता है। इस प्रकार, बच्चा केवल उन पुस्तकों को ही स्कूल लेकर जाएगा जिन्हें उस दिन पढ़ाया जाना है।
● एक अभिभावक के रूप में, आपको अपने बच्चे को अपना स्कूल बैग पैक करने का तरीका सिखाना चाहिए। उसे बैग में सबसे भारी किताबें सबसे पीछे रखने के लिए कहा जाना चाहिए, ताकि बच्चे की रीढ़ पर कम बोझ पड़े।

बतौर माता-पिता, शिक्षक, स्कूल और समाज, हमें  भारी बैग की इस समस्या का मुकाबला करना होगा। हम बच्चों को कुबड़े और कमजोर मांसपेशियों के साथ नहीं देखना चाहते। आईए, हम अपने बच्चों की पीठ से भारी बैग की इस समस्या को उतार फेंके!

 

- चारू माथुर (मेंबर, पैरेंट फोरम फॉर स्कूल एजुकेशन)

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