महंगाई से जूझता नया साल

जनता की कमर तोड़ महंगाई के साथ कदम मिला चुके बीते वर्ष से शायद सबकी सिर्फ यही उम्मीद थी की महंगाई जैसी बीमारी से लोगों को कुछ राहत जरुर मिलेगी क्योंकि वर्ष 2009 ने जनता को महंगाई की आग में बहुत जलाया था लेकिन आग बुझने की आस लगाये बैठी जनता ने अपना एक और वर्ष 2010 के रूप में बिता डाला. गुज़रे साल मे एक तरफ अंत तक राहत के नाम पर सिर्फ महंगाई रूपी जहर को पीते-पीते दामो में बढ़ोत्तरी ही देखने को मिली वहीँ दूसरी तरफ पूरे साल ख़ुशी और देश के विकास में टकटकी लगायी आँखों को अंत में महा घोटालों का तोहफा मिला. अब ऐसे में जब अंत ऐसा तो शुरुआत कैसी होगी पता नहीं बस अंत के बाद शुरुआत से उम्मीद ही लगायी जा सकती है!

वर्ष 2010 पूरे साल देश को महंगाई के हिचकोले खिलाता रहा जिसमे एक तरफ पूरे साल जनता बढ़ते दामो से त्रस्त रही वही दूसरी तरफ राजनीतिक पार्टियां भी इस मुद्दे पर बेहद व्यस्त दिखी. ठीक इसी क्रम में जनता और देश को जोर का झटका जोर से देने वाले घोटालो के बीच वर्ष के अंत में प्याज ने काटने के बजाय खरीदते समय ही रोने पर मजबूर कर दिया.

बीते वर्ष 2010 ने देश व देश की जनता को कामयाबी के कुछ सुखद पल जरुर दिए जिसको हर हाल में नहीं भुलाया जा सकता क्योंकि वो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नो पर सुनहरे अक्षरों से लिखे जा चूके है जैसे जहाँ एक तरफ पिछड़े राज्य के नाम से चर्चित बिहार को माडल रूप देने वाली नितीश सरकार की दोबरा से जोरदार ताजपोशी जिसमे जनता ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए स्पष्ट रूप से सबसे कह दिया की उसे राजनीति करने वाले नहीं बल्कि विकास करने वाले मालिक चाहिए. वहीँ दूसरी तरफ एक दिवसीय क्रिकेट में दोहरा शतक बना इतिहास रचने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने इसी वर्ष टेस्ट क्रिकेट में जबरदस्त उपलब्धि हासिल करते हुए शतकों का अर्ध शतक बना देश का सम्मान बढाया. ठीक इसी प्रकार अनेकों उपलब्धियों के साथ साथ एक और उपलब्धि हासिल करते हुए भारत ने कामनवेल्थ खेलों को संपन्न करा पूरे विश्व में एक अलग पहचान अर्जित कर डाली!

अब तो जहाँ एक तरफ महंगाई और घोटालो से घिरे वर्ष 2010 ने सब को विदा कह दिया है, नए वर्ष के रूप में 2011 से इस देश में जीवन यापन करने वाली भोली भली जनता को अपने नए आगंतुक से यही उम्मीद है कि शायद ये वर्ष भ्रष्टाचार और महंगाई से कुछ राहत दिला पाए! कुछ वर्षों से तोहफों के रूप में चली आ रही महंगाई को यह नव आगन्तुक वर्ष कितना अपने बस में कर सकता है यह देखने योग्य होगा जिसका अंदाजा लगाना इतना आसान नहीं, हाँ एक नए वर्ष में कदम रख उम्मीद की किरण जरुर जगाई जा सकती है कि इस वर्ष जनता को कुछ राहत जरुर मिले!

- धर्मेश तिवारी