महंगाई से त्रस्त जीवन

तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में बृहस्पतिवार को एक बार फिर 3.14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी कर दी. बढ़ी हुई दरें आधी रात से लागू हो गईं। इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से दाम बढ़ाने  के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. जनवरी से अब तक पेट्रोल 8.47 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है. अब दिल्ली में पेट्रोल 66 रुपए 70 पैसे प्रति लीटर मिल रहा है। सरकार रसोई गैस यानी एलपीजी सिलिंडर के दाम भी बढ़ाने पर विचार कर रही है. तेल कंपनियों को डीजल, एलपीजी और केरोसिन पर प्रतिदिन 263 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. अभी प्रति सिलिंडर 267 रूपए की सब्सिडी मिलती है और एक सिलिंडर 395 रूपए में मिलता है. सरकार एलीपीजी पर सब्सिडी ख़त्म करना चाहती है.

महंगाई की इस  मार से आम आदमी बेहाल है. लोगों में रोष और गुस्सा है. अगस्त में महंगाई दर बढ़कर 9.78 फीसदी हो गई है। इसके पिछले महीने यानी जुलाई में महंगाई दर 9.22 फीसदी रही थी। इस दौरान रोजमर्रा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों के दाम में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है. सरकार ने पिछले साल जून में पेट्रोल के दामों को अपने नियंत्रण से मुक्त कर दिया था. इसके बावजूद तेल कंपनियों का कहना है कि वो घाटे में इसको बेच रहे थे. अभी तक तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 2,500 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है. अगर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो यह घाटा साल के अंत में दोगुना हो जायेगा.

खाद्य पर्दार्थों के दामों में बढ़ोतरी की कहानी विडंबनाओं से भरी हुई है. बढ़ती महंगाई के लिए तरह तरह की धारणाएं सुनने में आती हैं.  वैश्विक वित्तीय मंदी के असर से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में वृद्धि की चर्चा की जाती है. कीमतें इसलिए भी बढ़ती हैं क्योंकि मांग और आपूर्ति पर तालमेल नहीं होता है, कहीं जमाखोरी तो कहीं कालाबाजारी की जाती है. सरकार के लाख दावों के बावजूद सरकार घूसखोरी और मुनाफखोरी के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा पायी है. अनाज भण्डारण और किसानों को उचित मूल्यों की व्यवस्था सम्बन्धी विषयों पर भी अभी तक कोई उचित कार्यवाही नहीं हो पायी है. कमरतोड़ महंगाई से निजात पाना कब संभव होगा यह दिखाई नहीं देता. सबसे अधिक सहानुभूति तो उन से होती है जिन्हें दो वक़्त की रोटी मिल पाना वैसे ही मुश्किल था. उनके जीवन की डगर अब थोड़ी और कठिन हो गयी.

-- स्निग्धा द्विवेदी