स्विस बैंकों में फसा बहुमूल्य धन

विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे ने हाल में खुलासा किया है कि स्विस बैंक में सबसे ज्यादा खाते भारतीयों के हैं। उन्होंने इस बात का भी संकेत दिया कि सूची में शामिल भारतीयों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने  कहा कि इन निजी स्विस बैंकिंग संस्थानों में आपको खाता खोलने के लिए कम से कम 10 लाख डॉलर की जरूरत होती है, जो काफी ज्यादा राशि है और यह किसी आम भारतीय के पास नहीं होती। उन्होंने कहा कि विदेशी बैंकों में काला धन छिपाकर रखने का मुद्दा स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार से भी बदतर है, क्योंकि इसमें धन को देश से बाहर भेज दिया जाता है। असांजे ने कहा कि हर बार वे रुपए को बेचते हैं, जिसके नतीजतन देश की मुद्रा का मूल्य कम होता है।

अगर ब्लैक मनी अपने देश में रहती है, तो वह अपने देश में ही खर्च होती है और इससे किसी ना किसी रूप में फायदा पहुंचता है। लेकिन ब्लैक मनी जब विदेशों में जमा कर दी जाती है, तो इससे उस देश को फायदा मिलता है, जहां पर वह जमा होती है, इसलिए भारत सरकार को इस मामले में और चिंतित होने की जरूरत है। असांजे ने कहा कि भारत सरकार इस मामले में जर्मनी जैसी गंभीर नहीं है जबकि इन बैकों में सबसे ज्यादा पैसा भारतीयों का है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को इस मामले में और गंभीर प्रयास करने होंगे क्योंकि इस वजह से भारत को टैक्स का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक स्विस बैंक में भारतीयों के कुल 65,223 अरब रुपये जमा है. यानी जितना धन हमारा स्विस बैंक में जमा है, वह हमारे जीडीपी का 6 गुना है. जिस तरह से हमारे देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है उसे देखते हुए विदेशो में इतनी मात्रा में काला धन होना कोई आश्चर्य नहीं है. फिर भी एक सामान्य नागरिक के लिए ये क्षोभ का विषय है कि पूरे विश्व में भारत शायद सब से अधिक भ्रष्ट राष्ट्रों में से एक है. निश्चित रूप से इस पूरे काले धन पर भारत के हर आम आदमी का अधिकार है और देखा जाए तो इस पैसे से हमारी कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में हम इस पैसे का प्रयोग कर अपना बहुत फायदा कर सकते हैं।  देश में आज भी करीब 45 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं। जितना धन स्विस बैंक में भारतीयों का जमा है, उसका आधा भी मिल जाए तो करीब 30 करोड़ नई नौकरियां पैदा की जा सकती है. काले धन के लौटने होने से न केवल गरीबी का सामना किया जा सकता है बल्कि विदेशी कर्ज भी सर से उतारा जा सकता है.

अन्ना हजारे द्वारा चलाया जा रहा आन्दोलन एक अच्छा तरीका है भ्रष्टाचारियों के सर पर वार करने का. विदेशों में काला धन रखने वालों के नाम उजागर करने पर सुप्रीम कोर्ट में भी तनातनी जारी है, लेकिन वित्त मंत्रालय का कहना है कि उसके पास इस बात के प्रामाणिक आंकड़े मौजूद नहीं है कि स्विस बैंक में देश का कितना पैसा जमा है. सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को फटकार भी लगाई है कि वह काले धन के मामले में सिर्फ पुणे के व्यापारी हसन अली खान पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है. हमारी सरकार को चाहिए कि वो कुछ कड़े कानून बना कर इस तरह बहुमूल्य धन का देश से पलायन रोके और इतने बड़े वित्तीय नुकसान पर अंकुश लगाए. एक अच्छा उपाय ये भी है कि जिन लोगों का पैसा स्विस खतों में जमा है उन्हें ये धन वापस लाने पर टैक्स माफी दे दी जाए और उन पर कोई आपराधिक मुकदमा भी नहीं चलाया जाए.

- स्निग्धा द्विवेदी