सुधार करो और विश्वास बढ़ाओ तो निवेश बढ़ेगा और विकास दर भी - गुरूचरण दास

गुरूचरण दास देश के सुप्रसिद्ध लेखक और चिंतक है जो जिन्हें उनके बेबाक विचारों के लिए जाना जाता है। देश विदेश के अखबारों में छपनेवाली उनकी आर्थिक और अन्य विषयों पर टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से पढ़ा जाता है। उनकी मुक्त भारत (इंडिया अनबाउंड)आजाद भारत में आ रहे आर्थिक परिवर्तनों का गहन विश्लेषण है जो उनकी दिशा को भी बहुत अचूक तरीके से इंगित करती है। उनकी एक और महत्वपूर्ण पुस्तक है - अच्छाई की कठिनाई (द डिफीकल्टी आफ बिइंग गुड)। इसके अलावा उन्होंने कई नाटक भी लिखे हैं ।हाल ही में सतीश पेड़णेकर ने उनसे केंद्रीय बजट के बारे में बातचीत की। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश –

इस बजट के बारे में कहा जा रहा है कि राजकोषीय घाटा बहुत ज्यादा होने के कारण इस बार वित्तमंत्री के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। इसे घटाना ही उनकी सबसे बड़ी चिंता है। आपकी नजर में घाटे को कम करने के लिए कौन से कदम उठाए जाने चाहिए?

पिछले साल हम आठ प्रतिशत की विकास दर हासिल कर चुके थे और नौ प्रतिशत की तरफ बढ़ रहे थे। अब एकसाल बाद हम विकास दर सात प्रतिशत से भी कम रह  हैं।सात और नौ प्रतिशत में अंतर तो दो ही प्रतिशत का लगता है लेकिन एक प्रतिशत का मतलब होता है एक करोड़ नौकरियां सहीं नौकरियां।नरेगा के जैसी बोगस नौकरियां नहीं ।सही सेल्फ जनरेटेड नौकरियां । इस तरह  बहुत फर्क पड़ गया है। इसके लिए कुछ तो ऐसे कारण हैं जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं हैं जैसे पैट्रोल उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी । इसके अलावा बहुत कुछ हमारी अपनी गलतियों की वजह से हुआ है। इसमें से आपका सवाल यह है कि राजस्व घाटे की देश की समस्या कैसे हल हो सकती है।

इसके वही तरीके हैं जो हम घर में भी अपनाते हैं जैसे खर्च कम करो या पैसे ज्यादा कमाओ।खर्च कम करने का तरीका यह है कि सब्सिड़ी को कम करना पड़ेगा। यह बहुत मुश्किल काम है। एक बार आप सब्सिड़ी शुरू करें तो उसमें कटौती करना बहुत मुश्किल होता हैं। वैसे कुछ कदम हैं  जिस पर बात हो चुकी है। जैसे डीजल गाडियां हैं। अब अमीर लोग डीजल गाडियां खरीद रहे हैं तो डीजल की सब्सिडी का लाभ अमीर लोगों को मिल रहा है। उच्च मध्य वर्ग  को मिल रहा है। यह अजीब बात है न। एलपीजी की सब्सिडी  के बारे मे कहा जा सकता है कि वह गरीब का हक है। लेकिन उसके लिए भी एक तरीका है। पिछले बजट में वित्तमंत्री ने कहा था कि वे एलपीजी का दाम नहीं बदलेंगे। लेकिन कैश ट्रांसफर करेंगे। यूडीआई आधार के जरिये। यूडीआईआधार योजनाओं से जिन लोगों को लाभ मिलना जाहिए उनकी शिनाख्त करने में मदद कर सकती है। इसका बहुत फर्क पड़ेगा क्योंकि वह सही लोगों को जाएगी। उसमें अमीर और गरीब का कुछ फर्क किया जाएगा। और भी योजनाओं के लिए आधार स्कीम मदद कर सकती है। सबसे ज्यादा खर्चा होता है फर्टीलाइजर सब्सिडी में। मगर वह किसानों को नहीं जाती कंपनियों को जाती हैं। ऐसी चीजे हमें बंद करनी चाहिए। पैट्रोल के दाम भी नार्मलाइज करने पड़ेगे। इसमें हमारा ही फायदा है। जब पैट्रोल पर सब्सिडी देते हैं तो हम अपने आप प्रदूषण बढ़ाते हैं। गाडियां खरीदने को प्रोत्साहित करके। दूसरी तरफ राजस्व कैसे बढ़ा सकते हैं एक तरीका है टैक्स बढ़ाओं दूसरा तरीका है कि बहुत सारी सरकारी कंपनियां जो घाटे में चल रही हैं उनका केवल विनिवेश ही नहीं करना चाहिए वरन बेच देना चाहिए। हाल ही में ओएनजीसी में जो नाकामयाबी मिली है वह इस बात का प्रतीक है कि लोगों को विश्वास नहीं है सरकारी कंपनियों पर। लेकिन अगर आप स्ट्रेटेजिक सेल करेंगे तो लोग आगे आएंगे। लोगों का मानना है कि राजनीतिज्ञ इसमें हस्तक्षेप करते हैं। सरकार इसमें हस्तक्षेप करती है इसलिए कंपनी नीचे जाती है तो कौन शेयर खरीदेगा। इसलिए मैं सोचता हूं कि जो रणनीति राजग ने अरुण शौरी के समय शुरू की थी वह सबसे अच्छी है। इससे बहुत सारे पैसे आ सकते हैं। हमारे 80-90प्रतिशत ऐसेटस पब्लिक सैक्टर बैंकस् के पास हैं। पहले जो कहते थे कि 33प्रतिशत तक ले जाएंगे तो स्ट्रैटेजिक हो जाएगा।यानी इन्हें सरकार नहीं चलाएगी। इससे बहुत फर्क पड़ता है।

टैक्स के बारे में यह कहूंगा कि हम तीन चार साल से जीएसटी (गुड़स एंड सर्विस टैक्स) लाने की कोशिश कर रहे हैं उसे लाना चाहिए इससे सरकार का राजस्व बढ़ेगा। हमें जीएसटी वाला सुधार करना चाहिए।

निवेश को बढ़ावा देने के लिए क्या किया जाना चाहिए।

विकास दर तब बढ़ती है जब निवेश बढ़ता है। एक साल  पहले हमारी  निवेश दर 38 प्रतिशत थी जो अब 30 प्रतिशत पर आ गई है। इसका मतलब है कि निवेशकों का विश्वास कम हो गया है। अब सरकार निवेश नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास पैसा नहीं है इसलिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए उनका विश्वास हासिल करना होगा। विश्वास तब आएगा जब हम सुधार करेंगे। जो सुधार करने हैं उनके बारे में हम जानते ही हैं उनके बारे में कितनी बार बात हो चुकी है। सीधा तरीका है –सुधार करो, विश्वास बढ़ाओं तो निवेश बढ़ेगा। विकास दर बढ़ेगी, नौकरियां बढ़ेगी।

कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए कौन से कदम उठाए जाने चाहिए?

कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए तुरंत उठाने लायक और  आसान तरीका  का है मल्टी ब्रांड खुदरा व्यापार को विदेशी निवेश के लिए खुला करना। दरअसल इसके लिए तो संसद में भी जाने की जरूरत नहीं है। नवंबर के महीने में हमने किया था लेकिन ममता बनर्जी ने विरोध कर दिया। वैसे अब हमें उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे बंगाल की मुख्यमंत्री हैं वे चाहे तो इसे बंगाल में लागू न करे। इस सुधार की खासियत है कि राज्य को यह आजादी है कि वे जो करना चाहें वह करें। लेकिन हमें खुदरा क्षेत्र मेंमल्टी  ब्रांडविदेशी निवेश के लिए खोलने के कदम को  सबसे पहले उठाना चाहिए।  उसका बहुत जबरदस्त असर पड़ेगा।क्योंकि अभी हमारा 40 प्रतिशत कृषि उत्पादन खराब हो जाता है। विदेशी रिटेलवाले भी कृषि के विशेषज्ञ है  वे कोल्ड स्टोरेज बनाएंगे,कोल्ड चैन बनाएंगे उससे देश का सब्जी फल जाएगा उससे देश को बहुत फायादा मिलेगा।वैसे तो बहुत से और भी उपाय कर सकते है लेकिन मल्टी ब्रांड रिटेल किसान के लिए है।इसलिए मैं कहता हूं यह रिटेल सेक्टर नहीं है कृषि क्षेत्र है।

आपको बजट से क्या अपेक्षाएं हैं?

सरकार से क्या अपेक्षा करें इस सरकार ने  सब बर्बाद कर दिया।