निजी प्रयासों ने बदली गुड़गांव की तस्वीर

जाने माने अर्थशास्त्री व स्तंभकार गुरचरन दास ने देश में शहरी विकास का पर्याय बन चुके गुड़गांव शहर की वर्तमान तस्वीर के लिए निजी प्रयासों को जिम्मेदार बताते हुए उद्यमियों और उद्योगपतियों के प्रयासों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने विकास के इस क्रम को अपनी नई किताब “इंडिया ग्रोज एट नाइट” में बतौर अध्याय शामिल करते हुए देश में निजी प्रयासों के तहत विकास की अवधारणा की जरूरत पर बल दिया है। किताब में फरीदाबाद व गुड़गांव के विकास की तुलनात्मक विवेचना करते हुए गुरचरण ने कहा है कि कुछ दशक पूर्व तक गुड़गांव उजाड़ और विकास से कोसो दूर छोटा सा शहर हुआ करता था जबकि फरीदाबाद का सरकार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जा रहा था।

हालांकि कम से कम सरकारी हस्तक्षेपों के कारण निजी उद्यमों के गुड़गांव पहुंचने और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए सरकार का मूंह देखने की बजाए स्वप्रयासों से इसे विकसित करने का काम शुरू किया गया। उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है। आज गुड़गांव का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शहरों में शुमार है जबकि फरीदाबाद विकास की दौड़ में तुलनात्मकर रूप से काफी पीछे छूट गया है। पेंगुइन प्रकाशन द्वारा अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित गुरचरन की इस पुस्तक का सोमवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन भी किया गया। इस दौरान पुस्तक के कुछ प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा परिचर्चा भी की गई। चर्चा के दौरान गुरचरन दास के अतिरिक्त “टीम अन्ना” के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल व बिजनेस स्टैंडर्ड के पूर्व संपादक टीएन निनान भी उपस्थित थे।

इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए गुरचरन दास ने कहा कि भारत तरक्की तो कर रहा है लेकिन दिन में नहीं रात के अंधियारे में। पुस्तक के शीर्षक “इंडिया ग्रोज एट नाइट” की व्याख्या करते हुए गुरचरन दास ने कहा कि रात के समय जब सरकार व सरकारी संस्थाएं अपना काम समाप्त कर सो रही होती हैं तब उद्योग जगत जाग रहा होता है और देश की आर्थिक प्रगति और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए प्रयासरत होता है। उन्होंने कहा कि देश दिन के उजाले में भी तरक्की कर सकता है लेकिन इसके लिए सरकारी एजेंसियों और निजी क्षेत्र को मिलजुल कर काम करना होगा। गुरचरन ने कहा कि ऐसा संभव हो सकता है लेकिन तब जब देश की लोकनीतियां निजी उद्यम को सहयोग करें।

इस मौके पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सूचना का अधिकार एक्ट के कारण बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों को भी किसी पेपर पर हस्ताक्षर करने से पहले दस बार सोचना पड़ता है। उन्होंने कहा सरकारें आयकर दाताओं के साथ अन्याय करती हैं और उनके पैसों का सही इस्तेमाल नहीं करतीं। केजरीवाल ने यह भी कहा कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अभियान के कारण कांग्रेस की हालत खराब है और इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि चूंकि भाजपा भी लोकपाल बिल लागू कराने के प्रति कटिबद्ध नहीं है इसलिए टीम अन्ना दो विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला नए राजनैतिक दल के गठन का व दूसरा, निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन देने का। कांग्रेसनीत संप्रग सरकार की आलोचना करते हुए केजरीवाल ने कहा कि जब हम लोकपाल के लिए प्रदर्शन कर रहे थे तो हमें चुनाव लड़कर आने की चुनौती दी जा रही थी। अब जब हम पार्टी के गठन पर विचार कर रहें हैं तो इसे हमारा छुपा एजेंडा बताया जा रहा है।

 

- अविनाश चंद्र