मैं बाहर जा रहीं हूं, प्रिंसिपल पूछे तो कहना किताब लेने गई हैं...

सर, हमारी मदद कीजिए। हम पढ़ना चाहते हैं लेकिन हमारी टीचर हमसे सर मालिश कराती हैं। हाथ-पांव दबवाती हैं। क्लास छोड़कर घूमने चली जाती हैं और कहती हैं कि प्रिंसिपल पूछे तो कह देना कि स्टेशनरी (किताब आदि) लेने गई हैं। और तो और क्लास को शांत रखने और उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी मॉनिटर पर थोप जाती हैं।

सर, हमारे स्कूल में टीचर सोती रहती हैं और कुछ पूछने जाने पर झिड़क कर भगा देती हैं। सर, स्कूल में पढ़ाई की बजाए हम छात्र-छात्राओं से साफ सफाई कराई जाती है। हमें रोल नंबर के अनुसार प्रतिदिन बारी बारी कक्षा में झाड़ू व साफ सफाई करनी पड़ती है।

ये कुछ करूण शिकायतें राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूमों की हैं जिन्होंने अपनी समस्याओं का समाधान न होता देख पोस्टकार्ड लिख सरकार, मीडिया और अधिवक्ताओं से सहायता मांगी है। शिकायतकर्ता छात्रों की उम्मीद है कि उनकी शिकायतें शायद अब संबंधित अधिकारियों तक पहुंच जाए और इसका समाधान हो सके।

सर्वोदय कन्या विद्यालय, पटपड़गंज की 11वीं कक्षा की छात्रा रचना (परिवर्तित) ने सोशल ज्यूरिस्ट नामक एक संस्था को लिखे पोस्टकार्ड में कहा है कि उनकी अंग्रेजी की अध्यापिका छात्रों से अच्छा बर्ताव नहीं करती हैं और अपशब्दों का प्रयोग करती है। उससे सर की मालिश कराती है और हाथ-पैर दबवाती है। रचना का कहना है कि कक्षा की मॉनीटर होने के बावजूद सबके सामने उसे यह सब करना अच्छा नहीं लगता। छात्रा का कहना है कि कक्षा के समय टीचर दूसरों से बात करती रहती हैं और मुझसे क्लास को शांत रखने और पढ़ाने को कहती है। शिकायतकर्ता छात्रा यह भी कहती है कि टीचर क्लास के समय कहीं चली जाती है और प्रिंसिपल अथवा किसी अन्य द्वारा पूछे जाने की स्थिति में प्रोजेक्ट वर्क के लिए किताब व अन्य पाठ्य सामग्री लेने जाने की बात कहने को कहती है।

ऐसे ही एक पोस्टकार्ड में समयपुर बादली झुग्गी कालोनी व जहांगीरपुरी पुनर्वास कालोनी के स्कूलों में छात्र-छात्राओं से कक्षा की साफ सफाई कराए जाने के बात का खुलासा किया गया है। सर्वोदय कन्या विद्यालय, बादली की कक्षा 11वीं की छात्रा दीपिका (परिवर्तित) का कहना है कि कक्षा में सभी को एक-एक दिन रोल नंबर के अनुसार साफ सफाई करनी पड़ती है। सफाई न करने पर उन्हें अध्यापिकाओं के कोप का शिकार होना पड़ता है। गवर्मेंट ब्वायज सीनियर सेंकेंडरी स्कूल के 12वीं कक्षा के छात्र राजू का कहना है कि सर क्लास में सोते रहते हैं और यदि कुछ पूछने के लिए उन्हें जगाया जाए तो डांट सुननी पड़ती है। कुछ अन्य छात्रों ने पोस्टकार्ड के माध्यम से अपने स्कूल की अन्य खामियों को जाहिर किया है ताकि उन्हें पढ़ने लिखने में परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस बाबत सोशल ज्यूरिस्ट के एडवोकेट अशोक अग्रवाल का कहना है कि छात्र-छात्राओं द्वारा लिखे गए पोस्टकार्डों को संबंधित अधिकारियों व कोर्ट के समक्ष रख समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि देश की राजधानी में शिक्षा व्यवस्था की यह हालत है तो सुदूर इलाकों में स्थिति की भयावहता का केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

- अविनाश चंद्र

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