सार्वजनिक नीति - गवर्नेंस लेख

सरकारी शासन में अपशिष्ट, कपट और दुरूपयोग को कम करना

भारत में बहुत से समुदायों की आधारभूत सेवाओं जैसे पानी, बिजली और परिवहन तक पहुंच नहीं होती है। सरकार नागरिकों के प्रति अपने कार्य निष्पादन के लिए न तो पारदर्शी होती है और न ही जवाबदेह।

नागरिक समाज केन्द्र सरकारी कार्यक्रमों की कुशलता और प्रभावोत्पादकता में सुधार ला रहा है और सुविज्ञ नागरिक वर्ग का निर्माण कर रहा है। सार्वजनिक नीति बैठकों, विचार विमर्शों और प्रकाशनों के माधयम से केन्द्र नई सार्वजनिक प्रबन्धान पध्दतियों और विकेन्द्रीकृत शासन ढांचों को अपनाने के लिए बढ़ावा दे रहा है। पहले से उपलब्ध कराई गई इसकी नागरिक पुस्तिका में सरकारी बजटों, विभिन्न राज्यों में प्रबन्ध व्यवस्था और कार्यक्रमों को अमली रूप देने के बारे में गैर-दस्तावेजी सूचना दी गई है।

केन्द्र का ''प्रकाशित करने का कर्तव्य'' अभियान यह मांग करता है कि सरकार अग्रलक्षी रूप से नागरिकों के साथ सूचना का आदान-प्रदान करे। महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा हुआ है कि कर-दाता के धन का उपयोग कैसे किया जाये।

इस पेज पर विभिन्न लेखकों के गवर्नेंस पर लिखे गये लेख दिये गये हैं। पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें। आप लेख पर अपनी टिप्पणीयां भी भेज सकते हैं।

,

अंतत: आठ साल चली लंबी लड़ाई के बाद महाराष्ट्र में डांस बार पर पाबंदी खत्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार पर प्रतिबंध खत्म करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को कायम रख सही फैसला दिया है। इसके पहले भी राज्यपाल ने प्रतिबंध संबंधी आदेश पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। लेकिन राज्य सरकार पाबंदी लागू करने पर अड़ी रही और मध्यवर्ग की 75 हजार से ज्यादा युवतियां बेरोजगार हो गईं। इससे खराब बात तो यह हुई कि सरकार ने कोर्ट और मीडिया में उन पर जो अश्लील आरोप लगाए उनकी वजह से वे कोई दूसरा काम करने लायक नहीं रहीं। सरकार ने डांस बार को ऐसी जगह बताया जहां लोग लड़कियों से

,

 

आप चीन को कितना जानते हैं? उस तजुर्बेकार निवेशक का जवाब था कि जितना चीन बताता है, बस उतना ही क्योंकि चीन के रहस्यों को खुद चीन की मदद के बिना कोई नहीं जान सकता। चीन में सिर्फ चीनी लोगों के अलावा कुछ भी छोटा नहीं है। इसलिए ड्रैगन की जमीन से निकलने वाली तरक्की, निर्माण, आयोजन, संकट तक सभी कुछ विशाल ही होते हैं। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अब अपनी भीमकाय मुसीबत साझा कर रही है तो ग्लोबल निवेशकों के पैरों तले जमीन खिसकने लगी है। चीन दरअसल अमेरिका व यूरोप से बड़े कर्ज संकट पर बैठा है, जिसे गली-गली में फैले महाजनों, ट्रस्ट कंपनियों,

 

गरीबी बड़ी भयानक चीज है। कुछ ही चीजें हैं जो मानवता को इतना नीचा देखने पर मजबूर करें और जीवन की बुनियादी जरूरतें भी पूरी न कर पाना उनमें से एक है।

भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें गरीबी का स्वर्ग कहा जा सकता है। हम चाहे तो 1947 के पहले की हमारी सारी गलतियों के लिए अंग्रेजों को दोष दे सकते हैं, लेकिन उन्हें गए भी 67 साल गुजर चुके हैं। हम अब भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में से हैं। एशिया में चालीस के दशक में हमारे बराबर गरीबी के साथ शुरुआत करने वाले देशों ने कितनी तरक्की कर ली है।

,

                                                    यूपीए को दम देगी गांवों की बढ़ती समृद्धि

अर्थव्यवस्था को लेकर फिलहाल छाई पस्ती को एक तरफ रख दें तो 2011-12 के रोजगार और उपभोग संबंधी आंकड़े कई उत्साहवर्धक संकेत देते हैं। इनसे पता चलता है कि पिछले दो सालों में औसत पारिवारिक उपभोग एक तिहाई बढ़ गया है, जो मुद्रास्फीति की दर से कहीं ज्यादा है। इससे

,

 

उत्तराखंड में मलबा हटने के साथ तबाही का जो मंजर सामने आ रहा है, उससे प्राकृतिक विपदाओं से निबटने की हमारी तैयारी की असलियत भी उजागर हो रही है। 2004 में दक्षिण भारत में आए सुनामी और इससे हुई भयानक तबाही के बाद अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदा से निबटने के लिए पूरे देश में एक मजबूत सिस्टम बनाने की जरूरत महसूस हुई। 2005 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया। इसकी अहम जिम्मेदारी थी- सभी राज्यों में मजबूत आपदा प्रबंधन केंद्र विकसित करना, आपदा संभावित क्षेत्रों की पहचान करके वहां एहतियाती कदम उठाना, और

 

क्रिकेट के इंडियन प्रीमियम लीग में फिक्सिंग घोटाला हमारे राष्ट्रीय जीवन के बीमार और कभी खत्म न होने वाले राष्ट्रीय पतन की एक और अपमानजनक कहानी है। हम प्रशासन और कानूनी संस्थाओं पर आरोप लगाने के इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कि हम भूल गए कि हमारी दयनीय शिक्षा प्रणाली भी इसके लिए जिम्मेदार है। और हां, माता-पिता भी दोषी हैं, क्योंकि घर हमारे नैतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिर भी एक प्रेरणादायक शिक्षक एक युवक के नैतिक मूल्यों में परिवर्तन ला सकता है। यह निष्कर्ष है 33 वर्षीय हार्वर्ड अर्थशास्त्री राज शेट्टी का, जिन्हें कुछ समय पहले ही दूसरा नोबेल

 

गांवों में मोबाइल गवर्नेंस की जरूरत

तेईस साल की राखी पालीवाल राजस्थान के राजसमंद जिले में उपली-ओदेन पंचायत की उप-प्रमुख हैं। वह एकमात्र निर्वाचित महिला सदस्य हैं, जो बाइक चलाती हैं। सुबह चार बजे उठकर खुले में शौच के खिलाफ महिलाओं को सलाह देती हैं। दिन में लॉ स्कूल जाती हैं और स्मार्ट फोन से फेसबुक अपडेट करती हैं।

बीते मार्च में हम एक रेड रिक्शा रिवॉल्यूशन नाम के एक सफर पर निकले थे, जिसका मकसद था उन साधारण महिलाओं को पहचानना, जो असाधारण काम कर

उत्तराखंड में जो भयानक नुकसान हमने पिछले सप्ताह देखा, उसके पीछे छिपे हैं कई सवाल, जिन्हें हम सिर्फ आपदा आने के समय ही पूछते हैं। बला टल जाती है, तो हम भी उन सवालों को पूछना बंद कर देते हैं। इसलिए हम आज तक समझ नहीं पाए हैं विकास और पर्यावरण का नाजुक रिश्ता और न ही हमारे शासकों ने समझने की कोशिश की है कि विकसित देशों में विकास के बावजूद पहाड़ क्यों सुरक्षित हैं, नदियां क्यों साफ हैं।

पहाड़ी इलाकों में न शहरीकरण को रोका जा सकता है, और न तीर्थयात्रियों-पर्यटकों को। अगर स्विट्जरलैंड में बन सकते हैं पहाड़ों में बड़े-बड़े

Pages