सोना को उत्पादक बनाने की जरूरत

कच्चे तेल के बाद देश में सबसे अधिक सोने का आयात होता है, इसे लेकर रणनीति बननी चाहिए

वर्तमान वित्त वर्ष यानी साल 2012-13 की पहली छमाही में चालू खाता (करेंट अकाउंट) घाटा जीडीपी के 5.4 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, यह देश के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चिंता है। पिछले वित्त वर्ष यानी 2011-12 में यह 4.2 फीसदी था। दरअसल, भारी सब्सिडी, बड़े पैमाने पर सोने के आयात व कर्ज संबंधी कठिनाई से उद्योग-व्यापार की बढ़ती बीमारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। निर्यात कम होने व आयात बढ़ने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी खाली होता जा रहा है। ऐसे में, चालू खाता घाटा को कम करने और अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए चार महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

पहली बात तो यह कि आर्थिक सुधारों की राह पर आगे बढ़ने के साथ सब्सिडी घटाने के ठोस कदम जारी रखे जाएं। दो, सोने के आयात पर अंकुश लगाने व इसकी मांग कम करने के रणनीतिक प्रयास किए जाएं। तीसरी बात, देश के उद्योग-व्यापार को सुस्ती से निकालने के लिए ब्याज दरें कम की जाएं और चौथी महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्त मंत्री सोने को उत्पादक बनाने की पहल करें। ऐसे प्रयासों से बजट घाटा कम करने व विकास दर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

हमारे देश में कच्चे तेल के बाद सबसे अधिक आयात होने वाला पदार्थ सोना है। वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक को सोने के आयात पर शुल्क बढ़ाने के साथ साथ अंकुश भी लगाना चाहिए। लेकिन सोने के आयात को बाधित करने इसकी मांग को कम करने का एकमात्र तरीका नहीं है। इसके लिए आरबीआई को सोने जैसा प्रतिफल देने वाले सरल वित्तीय विकल्प मुहैया कराने होंगे। वर्तमान में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स, गोल्ड फंड तथा ई-गोल्ड जैसे जो विकल्प उपलब्ध है, उन्हें और आकर्षक बनाने की जरूरत है। ऐसे गोल्ड पेंशन प्लान को लोकप्रिय बनाया जाए, जिनमें लोग अपना सोना बैंकों के पास जमा कर अगले 20-25 वर्षों तक मासिक पेंशन हासिल कर सकें।

सोने को उद्योग-व्यापार के लिए उत्पादक बनाने के संबंध में नई रणनीति अपनाई जानी चाहिए। गौरतलब है कि अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक सोना हमारे देश ने संग्रहित कर रखा है, जिसका अधिकांश भाग अनुत्पादक पूंजी की तरह है। छोटे-छोटे उद्यमियों व व्यवसायियों के पास भी छोटी-बड़ी मात्रा में सोना सुरक्षित है। ऐसे में आरबीआई द्वारा यदि सोने पर न्यूनतम ब्याज दर पर कर्ज तथा विभिन्न ऋणों पर आयकर में छूट जैसी योजनाएं लागू की जाती हैं, तो यह उद्योग व्यापार सहित अर्थव्यवस्था के लिए नई संजीवनी बन सकती है। छोटे उद्यमी और व्यवसायी भी घर के सोने को बैंक के पास रखकर अपने उद्योग- व्यवसाय के लिए सरल और सुविधापूर्ण पूंजी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे कारगर प्रयासों की जमानी कार्रवाई से वित्त मंत्री चालू खाता घाटा घटाने और विकास दर को बढ़ाने मे सफल हो सकते हैं।

- जयंतीलाल भंडारी (लेखक जाने माने अर्थशास्त्री हैं)
साभारः हिंदुस्तान