काले धन का दुर्भाग्यपूर्ण खेल

सुप्रीम कोर्ट ने हाल मे सरकार से पूछा कि वह विदेशी बैंकों में ब्लैक मनी जमा करने वाले भारतीय नागरिकों के नाम उजागर करने में आखिर अनिच्छुक क्यों है? विदेशी बैंकों में जमा काले धन के जरिए हथियार सौदों और मादक पदार्थों की तस्करी होने की आशंका को लेकर चिंता जताते हुए, कोर्ट ने ये भी पूछा कि सरकार ने विदेशों में खाता रखने वाले व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं।

एक अनुमान के मुताबिक आजादी के बाद से अब तक देश की 462 अरब डॉलर की ब्लैक मनी विदेशों में जमा है। स्विस बैकर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों का 65,223 अरब डॉलर ब्लैक मनी के रूप मे स्विस बैक में जमा है। सबसे बड़ा गढ़ स्विस बैंक है। मॉरीशस, सेशल्स, मकाऊ, थाइलैंड, सिंगापुर, हांगकांग सहित दुनियाभर के ९१ सेंटर भी ब्लैक मनी के ठिकाने हैं।

उच्चत्तम न्यायालय काले धन की वापसी को लेकर फटकार लगा रहा है और देश का आम नागरिक  चाहता है कि किसी भी कीमत पर यह धन देश में वापस आना चाहिए किंतु सरकार इस बारे मे गम्भीर नज़र नही लग रही. जहां एक तरफ देश में करोड़ो लोग भूख और गरीबी में अपना जीवन निर्वहन कर रहे हैं वही दूसरी और हमारे देश का अरबो रुपया विदेशी खातो में जमा है. ऐसा धन जिसका सदुपयोग स्वदेश में अनेको ज्वलंत समस्याओं के निराकरण में भली भांति हो सकता है. 20.85 लाख करोड़ रुपये बहुत बड़ी राशि है और इससे देश का कायाकल्प हो सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण रोज़गार, सड़क, बिजली, पानी जैसी ज़रूरतों पर ये रकम खर्च कर हम अपने देशवासियों का काफी भला कर सकते हैं.

सालो से भ्रष्ट राजनेता, नौकरशाह, व्यापारी, उद्योगपति और दलाल अपना काला धन विदेशी बैंकों में जमा करते आये हैं. स्विस बैंक एक ऐसा बैंक है जिसमे अकाउंट खोलने वाले का नाम तक नहीं लिखा जाता. केवल खाता नम्बर ही दिखाई देता है. वास्तविक खातेदार का नाम केवल उच्च अधिकारीयों को ही पता होता है जो पूरी गोपनीयता का पालन करतें हैं. ऐसी समानान्तर अर्थव्यवस्था के कुछ पिपासुओं से इस मुद्रा को वापस ला पाना आसान नहीं होगा क्योंकि भ्रष्टाचार से कमाए गए इस धन को विदेशी बैंको में जमा करवाने के पीछे दोहरे कराधान से बचना है।

धन वापस लाने के साथ साथ सरकार की ये भी कोशिश होनी चाहिए कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए. पूरे देश के सामने जब इन रसूक वाले ताकतवर लोगो के साथ कड़ी कार्यवाही की जायेगी तो निश्चित ही दूसरों को भी एक सन्देश जाएगा कि वो देश के बहुमूल्य धन के साथ खिलवाड़ ना करें.

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने खुद ये कहा कि ये पैसा हमारी आठ-नौ फीसदी विकास दर का नतीजा है और सरकार सुनिश्चित करेगी कि देश की गरीब जनता का धन वापस लौटे। राहुल द्वारा अपने महाराष्ट्र दौरे पर कही हुइ ये बात सिर्फ लोक लुभावन साबित होगी या सच मे देश को अपना पैसा वापस मिलेगा, ये देखने वाली बात होगी.

- स्निग्धा द्विवेदी