गद्दाफी शासन का अंत

कर्नल गद्दाफ़ी फ़िलहाल कहाँ हैं इसका पता नहीं चल पाया है मगर विद्रोहियों का मानना है कि वह त्रिपोली या उसके आस-पास ही कहीं हो सकते हैं. लीबिया की राजधानी त्रिपोली के कई इलाक़ों में राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों और विद्रोहियों के बीच लड़ाई जारी है. इस बीच लीबियाई विद्रोहियों ने गद्दाफ़ी को जिंदा या मृत पकड़ने वाले को 20 लाख दीनार 16.7 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा भी की.

लीबिया की राजधानी त्रिपोली में रविवार को विद्रोही सेनाओं और गद्दाफी के वफादार सुरक्षा बलों के बीच ताजा मुठभेड़ हुई थीं। त्रिपोली में सोमवार शाम गद्दाफी परिसर के आसपास भी मुठभेड़ हुईं. इसके बाद भी अब तक यह पता नहीं चल सका है कि 40 साल तक लीबिया पर शासन करने वाले गद्दाफी कहां हैं। इससे पहले गद्दाफी के दो बेटों सैफ-अल-इस्लाम और सादी को गिरफ्तार भी किया गया था पर उन का बड़ा बेटा मोहम्मद विद्रोहियों से बच निकला है.

लीबियाई विद्रोहियों की राष्ट्रीय आपात परिषद के अध्यक्ष मुस्तफा अब्देल जलीली का दावा है कि आठ महीने में देश की संसद व राष्ट्रपति के चुनाव करा लिए जाएंगे. जलीली का का कहना है कि वो लोकतांत्रिक सरकार व उचित संविधान बनाना चाहते हैं तथा दुनिया से ज्यादा दिन तक अलग-थलग नहीं रह सकते. वो कहते है कि यद्यपि गद्दाफी का राज खत्म हो चुका है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त तभी माना जाएगा जब वह गिरफ्तार होंगे और उन्हें उनके किए अपराधों की सजा मिलेगी.

देश के ज्यादातर हिस्सों पर लोकतंत्र समर्थकों का कब्जा हो चुका है। फिर भी उन्हें आशंका है कि गद्दाफी समर्थक हमला कर सकते हैं. अमेरिका और ब्रिटेन सहित नाटो के कई टोही विमान लीबियाई तानाशाह की खोज में जुटे हैं. त्रिपोली से रवाना होने वाले सभी नागरिक विमानों की अवॉक्स हवाई रडार से निगरानी की जा रही है ताकि लीबियाई नेता कहीं हवाई जहाज से फरार न हो जाएं. अमेरिका अपने रिवेट जासूसी विमान से खोजबीन जारी रखे हुए है.

लीबिया के हालात फरवरी 2011 से बिगड़ने शुरू हुए जब एक मानवाधिकार कार्यकर्ता की गिरफ्तारी से पूर्वी शहर बेंगाजी में हिंसा भड़क उठी, जिसकी चपेट में जल्द ही दूसरे शहर भी आ गए। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर हवाई हमले किए तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा. 1969 में सत्ता मे काबिज़ होने के बाद से गद्दाफी की तानाशाही का यह दौर चल रहा है. चलीस सालो से भी अधिक समय से परिवारवाद और भ्रष्टाचार से सत्ता का संचालन हो रहा था और जनता पूरी तरह से उकता चुकी थी. लीबिया युद्ध करीब करीब खत्म हो चुका है पर सालो से चले आ रहे कुशासन से त्रस्त जनता तभी चैन पायेगी जब यहा पर एक स्वच्छ और काबिल सरकार का चयन होगा और वह लोगों की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी.

- स्निग्धा द्विवेदी