खाद्य सुरक्षा बना चिंता का विषय

खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर नीति-निर्माता अगर चाहें तो ताजा विश्व भूख सूचकांक रिपोर्ट को अपना संदर्भ बिंदु बना सकते हैं। 81 देशों की इस सूची में भारत 67वें नंबर पर आया है। यानी इस अध्ययन में शामिल सिर्फ 14 देशों में खाद्य सुरक्षा की स्थिति भारत से बदतर है। यहां तक कि पाकिस्तान, नेपाल, रुआंडा और सूडान जैसे देश भी इस सूची में भारत से ऊपर आए हैं। यह सूचकांक अमेरिका स्थित संस्था इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट तैयार करती है।

यह संस्था 64 सरकारों एवं एजेंसियों के परामर्शदाता समूह इंटरनेशनल एग्रीकल्चर रिसर्च के सहयोग से काम करती है, इसलिए उसकी रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाता है। यह सूचकांक तीन कसौटियों - जनसंख्या में कुपोषित लोगों के प्रतिशत, अंडरवेट बच्चों के प्रतिशत और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर के आधार पर तैयार किया जाता है। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से जिन देशों का हाल पिछले एक दशक में सबसे कम सुधरा है, उनमें भारत भी एक है। जबकि इसी अवधि में चीन, ईरान और ब्राजील ने इस सूचकांक पर अपनी स्थिति में लगभग 50 प्रतिशत का सुधार किया है।

ताजा रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि जैव ईंधन के लिए फसलों के बढ़ते उपयोग, जलवायु परिवर्तन एवं वायदा कारोबार के बढ़ते चलन के कारण विश्व खाद्य बाजार में उतार-चढ़ाव तेज है और गरीबों पर उसकी भारी मार पड़ रही है। जाहिर है, इस हाल में कमजोर तबकों को खाद्य सुरक्षा देने के लिए खास इंतजाम की जरूरत है। प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून बेशक इस दिशा में एक प्रभावी पहल होगी। ताजा भूख सूचकांक सरकार को यह अहसास कराने के लिए काफी होना चाहिए इस प्रयास में और देर बिल्कुल वांछित नहीं है। अगर यह कानून पिछले दो साल से लाभार्थी समूहों की पहचान और नकद सब्सिडी बनाम सार्वजनिक वितरण प्रणाली से अनाज की आपूर्ति के विवाद में न फंसा होता, तो शायद इस साल भारत की तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर सामने आई होती।

दैनिक भास्कर