ब्राजील में पहली महिला राष्ट्र प्रमुख

सरकारी कर्मचारी की ज़िन्दगी जी रही डिलमा रूसेफ़ जिस ने पहले कोई चुनाव तक नही लड़ा था, उस के लिए अपने ही देश का राष्ट्रपति बन जाना एक असंभव सपने के सच हो जाने सरीखा है. लाटिन अमरीकी देशो में महिलाओं के लिए इतिहास रचते हुए, डिलमा रूसेफ़ ने ब्राज़ील की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में हाल ही मे शपथ ली. उन्होंने लूला डी सिल्वा की जगह ली है, जिन्हें ब्राज़ील के इतिहास का सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति माना जाता है.

ब्राजील में लिंग असमानता की शिकायतों के बीच एक महिला राष्ट्रपति का निर्वाचित होना निश्चित ही एक अच्छा घटनाक्रम है. ब्राजील में महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का मुद्दा इस से पहले कभी इतना महत्त्वपूर्ण नहीं हुआ. दूसरी कई अन्य समस्याओं से जुझते हुए इस देश में पहली बार एक महिला के सर्वोच्च पद पर चुने जाने के बाद लिंग समानता को ज़रूर बल मिलेगा. चुने जाने के बाद, रूसेफ़ ने कहा कि वो ब्राजील में लिंग समानता लाने के लिए एक मिशन चला रही हैं. उन्होंने कहा कि अब शायद छोटी लड़कियों के माता पिता उनकी तरफ देख कर कहेंगे कि हाँ औरतें भी कुछ कर सकती हैं. रूसेफ़ का मानना है कि औरत और मर्द के लिए सामान अवसर प्रदान कराना एक लोकतंत्र का आधारभूत सिद्धांत है.

दूसरे दक्षिणी अमेरिकी देशों मे महिला राष्ट्र प्रमुखों की बात करे तो वर्ष 2006 में चिली की पहली महिला राष्ट्रपति मिशेल बशाले और वर्ष 2007 में अर्जेंटीना की पहली महिला राष्ट्रपति क्रिस्टीना फर्नांडेज डे कर्शनर बनी थीं.

डिलमा रूसेफ़ का दो बार तलाक़ हो चुका है और उनकी एक बेटी है. वर्ष 2009 में कैंसर के इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं. पहले किसी भी निर्वाचित पद पर नहीं रहीं 62 वर्षीय डिलमा ने 2003 में लूला डिसिल्वा सरकार में ऊर्जा मंत्री के तौर पर काम करना शुरू किया. वर्ष 2005 से 2010 तक उन्होंने चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के रूप में काम किया. पिछले अक्तूबर में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी.

राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए रूसेफ़ ने संविधान की रक्षा करने, क़ानून का पालन करने, ब्राज़ीलियाई लोगों की बेहतरी, एकता और अखंडता के लिए काम करने का वादा किया. ब्राज़ील की अर्थव्यस्था में मज़बूती तो आई है लेकिन अब भी वहाँ समाज में काफ़ी असमानता है. उन्होंने ब्राज़ील की जटिल कर व्यवस्था को ठीक करने का भी वादा किया.

ब्राजील की संविधान के अनुसार एक व्यक्ति लगातार दो बार से अधिक राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित नहीं हो सकता है. राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा वर्ष 2003 से लगातार दो बार (2003, 2007) ब्राजील के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं. इसलिए कानूनन वह निर्वाचन के लिए उम्मीदवारी नहीं कर सके. हालांकि ब्राजील के संविधान में किसी राष्ट्रपति को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का प्रावधान है, बशर्ते उनका कार्यकाल लगातार नहीं होना चाहिए. इस तरह लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा वर्ष 2014 में राष्ट्रपति की उम्मीदवारी कर सकते है.

वैश्विक मंदी के बावजूद ब्राजील की अर्थव्यवस्था भारत की ही तरह स्थिर रही थी. ऐसे में लैटिन अमेरिका की इस उभरती आर्थिक शक्ति को पहली महिला राष्ट्रपति मिलने का महत्व काफी अधिक है.

- स्निग्धा द्विवेदी