आलोक पुराणिक

एक्सपर्ट कॉर्नर - आलोक पुराणिक

आलोक पुराणिक

इस पेज पर डा.आलोक पुराणिक के लेख दिये गये हैं। लेखक दिल्ली विश्विद्यालय में अध्यापनरत हैं और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ के साथ साथ जाने माने व्यंग्यकार हैं..
वित्तीय साक्षरता के मामले में पश्चिमी भारत और उत्तर भारत में बहुत फर्क है। उत्तर भारत यानी बिहार, उत्तर प्रदेश में आम मध्यवर्गीय परिवारों के अधिकांश लोगों से  शेयर बाजार के बारे में बात करें, तो उन्हे लगता है कि सट्टे की बात की जा रही है। सट्टा यानी एक अवांछनीय गतिविधि, सट्टा यानी किसी अनिश्चित घटना के घटने या ना घटने को लेकर लगायी जानीवाली शर्त, सौदे। इनमें एक पक्ष हारता और दूसरा पक्ष जीतता है। सट्टे को पक्के तौर पर निवेश और बचत  से जुड़ा मसला ना माना जा सकता। एक आम समझ शेयर बाजार को लेकर उत्तर भारत के अधिकांश परिवारों में यही है...
Published on 26 Feb 2015 - 16:15
खुदरा व्यापार में 51 फीसदी विदेशी निवेश के मुद्दे पर ‘संसद से सड़क तक’ घमासान छिड़ने और काफी जद्दोजहद के बाद नियम 184 के तहत संसद में बहस और वोटिंग के बाद विदेशी खिलाड़ियों के लिए देश में रिटेल स्टोर खोलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि विदेशी निवेश के नफा-नुकसान को लेकर लोगों के मन में अब भी संशय बना हुआ है। उधर, वॉलमार्ट द्वारा भारत में विदेशी निवेश के पक्ष में समर्थन हासिल करने के लिए की गई लॉबिंग और इस मद में खर्चे गए सवा सौ करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि ने एक नए बहस को हवा दे दी है। एफडीआई के इन्हीं मसलों पर भारत के पहले उदारवादी वेब...
Published on 27 Dec 2012 - 19:42
मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 प्रतिशत विदेशी निवेश की इजाजत के बाद बवंडर सा मचा हुआ है। इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत होने पर अलग बवाल है। दो एकदम विपरीत ध्रुवों की राय सामने आ रही है। सरकारी पक्ष कह रहा है कि विदेशी निवेश आने से रोजगार बढ़ जायेगा, उपभोक्ताओं का भला होगा। कोल्ड स्टोरेज बनेंगे। फल अन्न की बरबादी रुकेगी। सरकार विरोधी पक्ष का कहना है कि भारत तबाह हो जायेगा, रोजगार खत्म हो जायेंगे। उपभोक्ता लुट जायेंगे। दोनों ही अतिवादी दृष्टिकोण हैं, रास्ता कहीं बीच से होकर जाता है। ये आर्थिक मसले हैं, इन...
Published on 15 Oct 2012 - 12:42