तामिल नाडू आर्थिक स्वंत्रता में सबसे आगे, आन्ध्र प्रदेश ने करी तेज़ प्रगति

भारत में आर्थिक  स्वतंत्रता के मामले में आंध्र प्रदेश ने सब से अधिक तरक्की करी है. तेलंगाना जैसी विषम समस्या के चलते भी, आंध्र प्रदेश आर्थिक स्वतंत्रता के लिए एक  अनुकूल वातावरण प्रदान करने में सफल रहा है.

फ्रेडरिक नौमान फ़ौंडेशन (दक्षिणी एशिया) द्वारा हाल ही में जारी की गयी 'इकोनोमिक फ्रीडम ऑफ़ द स्टेट्स ऑफ़ इंडिया 2011' (भारत के राज्यों में आर्थिक स्वतंत्रता 2011) रिपोर्ट  के अनुसार आर्थिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में तामिल नाडू  सर्वोच्च रहा जबकि गुजरात दूसरे स्थान पर आया. अपना पिछला प्रदर्शन सुधारते हुए, आन्ध्र प्रदेश ने इस बार 4 जगह की छलांग लगाई और तीसरे स्थान पर आया. पिछली बार की लिस्ट में आन्ध्र प्रदेश सातवें स्थान पर था.

सन 2009 के आंकड़ो पर आधारित इस 2011 रिपोर्ट को तैयार करते हुए हर राज्य में सरकार का आकार, कानूनी ढांचा और श्रम व व्यापार सम्बन्धी नियमो को ध्यान में रखा गया है. इस रिपोर्ट को तैयार करते के लिये भारत के 20 राज्यों का अध्ययन किया गया. गौरतलब है कि इस बार की रिपोर्ट में 12 राज्य अपने स्थान से लुढके भी हैं.

शून्य (कोई स्वतंत्रता नहीं) से लेकर एक (उच्च स्वतंत्रता) तक के स्केल में आंध्र प्रदेश का इंडेक्स स्कोर इस बार 0.4 से 0.51 पहुँच गया जो की 27.25 प्रतिशत का सुधार था. सन 2004 से 2009 के बीच आन्ध्र प्रदेश की सरकार ने उन नीतियों को कार्यान्वित किया जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देती थी. रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश ने भ्रष्टाचार और बर्बादी को कम किया और ठेके पर शिक्षको की नियुक्ति, रोज़गार योजनाओं का सामाजिक लेखापरीक्षण और आधारभूत ढाँचे के निर्माण में निजी सेक्टर की भागीदारी जैसे कई सुधारों को अमल किया. इन सभी क्षेत्रों में पहले सरकार का एकाधिकार हुअ करता था.

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया द्वारा जारी इस रिपोर्ट को पत्रकार, स्तंभकार और केटो  इंस्टिट्यूट के फेलो स्वामीनाथन अय्यर, अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय और लवीश भंडारी ने मिल कर तैयार किया है. रिपोर्ट के रचनाकारों के अनुसार आंध्र प्रदेश में पिछले कुछ सालो में कृषि के क्षेत्र में तीव्र गति से प्रगति हुई है. प्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में 6.8 प्रतिशत की विकास दर देखी जो की राष्ट्रीय औसत से भी अधिक था. इसी के साथ ग्रामीण आधारभूत ढाँचे का विकास और नक्सलवाद पर रोकथाम जैसे प्रयासों की वजह से औद्योगिक विकास को बढ़त मिली, रोज़गार सृजन हुआ और दूसरे राज्यों की तरफ पलायन भी रुका.

आर्थिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में दूसरा सब से तेज़ी से प्रगति करने वाला राज्य गुजरात था जो कि पांचवे पायदान से दूसरे पायदान पर पहुँच गया. वहीँ तमिल नाडू 2005 की ही तरह इस बार भी पहले स्थान पर रहा. आन्ध्र प्रदेश और गुजरात के अलावा जिन राज्यों ने आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में बढ़त हासिल करी है वो हैं हरयाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल व जम्मू और कश्मीर.

राष्ट्रीय कृषि लागत और कीमत आयोग के अध्यक्ष अशोक गुलाटी के अनुसार सरकार द्वारा तय की गयी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है की अमुक राज्य कैसा प्रदर्शन करेगा. उन्होंने ये भी कहा कि कृषि सेक्टर में हुए विकास का सभी राज्यों के प्रदर्शन पर बड़ा प्रभाव पड़ा है .

हालांकि रिपोर्ट के अनुसार सन 2005 से लेकर 2009 के बीच कई राज्य ऐसे भी हैं जिन्होंने आर्थिक स्वंत्रता के क्षेत्र में कोई भी बढ़त नहीं दर्ज करी. यहाँ तक की 12 राज्य आर्थिक स्वतंत्रता रैंकिंग में नीचे लुढ़क गए. सबसे खराब प्रदर्शन मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, उडीसा, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र का रहा. पिछले सालो में अच्छा प्रदर्शन करने वाला पंजाब भी 2005 में अपने छठे स्थान से गिर कर 2009 में बारवें स्थान पर चला गया. सन 2009 के आंकड़ों के अनुसार सबसे निचले तीन पायदानों पर रहने वाले राज्य हैं बिहार, उत्तराखंड और आसाम. पिछली बार की रिपोर्ट में भी बिहार और आसाम सबसे पीछे थे.

रोचक तौर पर 2005 में जहां तामिल नाडू सबसे ऊंची पायदान पर था, वहीँ मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा था. इन दो के बाद क्रमशः हिमाचल प्रदेश, हरयाणा और गुजरात रहे थे.

स्टडी के अनुसार जहां कुछ राज्यों ने आर्थिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में बहुत प्रगति करी, वहीँ  अन्य राज्यों ने खराब प्रदर्शन भी किया जिस वजह से भारत में कोई भी सामान ट्रेंड उभर के नहीं आता है. 

आर्थिक स्वतंत्रता सामान्यतः अधिक पूँजी, तेज़ विकास दर और अन्य कई मानव विकास सूचकों से जोड़ी जाती है.

फ़ौंडेशन के क्षेत्रीय निदेशक सिग्फ्रीद हरजोग के अनुसार भारत के जिन राज्यों में अधिक आर्थिक स्वतंत्रता है वहाँ नागरिको के लिए बेहतर प्रति व्यक्ति विकास दर भी देखी जाती है. इन राज्यों में बेरोज़गारी का स्तर कम है, सफाई के सूचक अच्छे हैं और यहाँ निवेश भी ज्यादा हो रहा है.

इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए कनाडा स्थित फ्रेज़र इंस्टिट्यूट की एक कार्य प्रणाली को आधार बनाया गया. इसी कार्य प्रणाली को इस्तेमाल कर फ्रेज़र इंस्टिट्यूट हर साल 'इकोनोमिक फ्रीडम ऑफ़ द वर्ल्ड' रिपोर्ट तैयार करता है.

- स्निग्धा द्विवेदी