आर्थिक स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता

एक महत्वपूर्ण सवाल: क्या आर्थिक स्वतंत्रता से सचमुच लोगों के जीवन स्तर में कोई सुधार आता है? श्रीलंका में आर्थिक स्वतंत्रता ज्यादा है। यहां आर्थिक और सामाजिक माहौल भी अन्य दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में बेहतर है। फ्रेजर तालिका में आर्थिक मायने में ज्यादा मुक्त देशों और कम मुक्त देशों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में आश्चर्यजनक अंतर देखने को मिलता है।
 
24 सबसे ज्यादा मुक्त देशों (शीर्ष के 20%) के लोग 24 सबसे कम मुक्त देशों (नीचे से 20%) के लोगों की तुलना में 20 साल ज्यादा जीते हैं। 1997 में सबसे ऊपर के 20% देशों में प्रतिव्यक्ति औसत आय 18,000 डॉलर थी, जबकि नीचे के 20% देशों में यही आय 2,000 डॉलर से भी कम थी। यही नहीं, 90 के दशक में आर्थिक रूप से सबसे कम मुक्त देशों के सकल घरेलू उत्पाद में नकारात्मक वास्तविक विकास देखने को मिला - उनकी अर्थव्यवस्था सिकुड़ गयी। 
 
सबसे ऊपर 20% देशों का संयुक्त राष्ट्र मानव विकास सूचकांक 0.9 है, वहीं नीचे के 20% देशों का सूचकांक 0.45 से भी कम है। और आगे बढ़कर बात की जाए तो ऊपर के 20% देशों में प्रौढ़ निरक्षरता और गरीबी की दर काफी कम है, श्रम की उत्पादकता काफी ज्यादा है और शुद्ध पेयजल ज्यादा लोगों को उपलब्ध है।
 
पुरानी धारणा के अनुसार अमीर देशों में काफी आर्थिक असमानता होती है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? इसकी जांच का एक आसान तरीका यह है कि हम देश के औसत परिवार के जीवन-शैली की तुलना 'पहले परिवार' यानी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के परिवार से करें। उन देशों में इनके जीवन-शैली का अंतर बहुत कम है, जो आर्थिक मायने में ज्यादा स्वतंत्र हैं, जैसे जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका या स्विटजरलैंड। जबकि उत्तरी कोरिया, वर्मा, क्यूबा या ईरान जैसे कम मुक्त देशों में यह अंतर काफी ज्यादा है। जर्मनी के चांसलर के रोजमर्रा का भोजन कमोबेश जर्मनी के औसत परिवार के जैसा ही है, जबकि निःसंदेह बर्मा या उत्तरी कोरिया में इसमें काफी अंतर होता है। 
 
आर्थिक स्वतंत्रता का पैमाना विकसित करने से सामाजिक वैज्ञानिकों को आर्थिक और सामाजिक विकास में इसके महत्व का आंकलन करने का मौका मिला है। अब लेखों या अन्य प्रकार के साहित्य द्वारा एडम स्मिथ के विचार को स्वीकार किया जाने लगा है कि विकास की ऊंची दर हासिल करने में आर्थिक स्वतंत्रता का काफी महत्व है। साथ ही सरकार की कानूनी और नियंत्रक व्यवस्था में थोड़ा ही परिवर्तन कर देने से आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ सकती है। बुनियादी ढांचे, स्कूलों और अस्पतालों के विपरीत आर्थिक स्वतंत्रता बिना अधिक पूंजी और नई प्रौद्योगिकी लगाए बढ़ाई जा सकती है। यह लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने का सबसे आसान तरीका है। 
 
मानवीय गरिमा की रक्षा करने और एक अच्छा समाज बनाने के लिए आर्थिक स्वतंत्रता उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी राजनीतिक और सामाजिक स्वतंत्रता। आर्थिक स्वतंत्रता अर्थात उत्पादन और व्यापार की स्वतंत्रता को मानव के मौलिक अधिकारों में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।  
 
 
- अविनाश चंद्र

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