आर्थिक संकट में रखना होगा धैर्य

स्टैंडर्ड एंडा पुअर्स ने अमेरिका की सरकारी रिण साख रेटिंग को एएए से घटाकर एए प्लस कर दिया है और इसी के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मन्डराने लगे हैं व चारो तरफ अफरातफरी का माहौल है. एसएंडपी ने अमेरिका के बढ़ते बजट घाटे की चिंताओं के बीच उसकी लंबी अवधि की क्रेडिट रेटिंग एएए से घटा दी और कहा है कि उसकी राय में वित्तीय और आर्थिक संकट के समय में अमरीकी नीति निर्धारक और राजनीतिक संस्थाओं का प्रभाव और स्थिरता कमज़ोर हुई है. इसके साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्य्वस्थाि वाले देश में मंदी की आहट का डर और गहरा गया है.

अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला. अमरीका के डाउ जोन्स में तो 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. डाओ जोंस में 4.3 फीसदी यानी 512.76 अंकों की गिरावट देखी गई. गिरावट का ये असर नैस्डैक में भी रहा. भारतीय सेंसेक्स 17,000 हज़ार के नीचे पहुंच गया है जो कि 14 महीनो मे सबसे निचला अंक है. इसी के साथ जापान, ताइवान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के बाज़ार भी गिरे हैं. अमेरिकी संकट ने एक बार फिर साल 2008 की वैश्विक मंदी की भयानक यादों को ताज़ा कर दिया है. पिछले हफ़्ते अमेरिका समेत दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में गिरावट के बाद वर्ल्ड मार्केट में 2.5 लाख करोड़ डॉलर डूब गए.

अमरीका के पिछले 95 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने उसकी साख़ पर सवाल उठाए हों और उसकी रेटिंग घटा दी हो. सर्वोच्च रेटिंग का मतलब है दुनिया भर के निवेशक या देश अमरीकी संस्थाओं या सरकार को बेझिझक लोन दे सकते हैं क्योंकि इस लोन को लौटाने में कोई परेशानी नहीं आएगी. रेटिंग घटने का मतलब है अमरीका के कर्ज़दारों से लिए पैसे लौटाने की क्षमता को कमतर आंकना. रेटिंग घटने के बाद सरकार को मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाएगा. इससे अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने के साथ विकास पर असर पड़ सकता है.

उधर यूरोपीय संघ के सभी देश मुश्किल में हैं. माना जा रहा है कि ग्रीस, पुर्तगाल, आयरलैंड और स्पेन का संकट इतना बड़ा है कि अगर दूसरे बड़े यूरोपीय देश मिलकर इन देशों को वित्तीय मदद करें तो भी इनका संकट दूर करना मुश्किल होगा. सुनामी के झटके ने जापान की अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख दिया है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था के ऋण संकट और साख दर में कमी से उत्पन्न मौजूदा परिस्थितियों में एक उम्मीद की किरण भी नजर आती है और वह यह कि विश्व बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं खासकर कच्चे तेल के दाम नीचे आने शुरू हुये हैं. यदि यह गिरावट जारी रहती है तो मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा और लम्बे समय से महंगाई से जूझ रहे लोग राहत की सांस लेंगे. दूसरी तरफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था के टूटने के परिणामस्वरूप भारत व चीन को फायदा ही होगा. शुरुआती संकट के बाद विश्व भर के निवेशक भारतीय व चायनीज़ शेयर बाजार की ओर ही मुड़ेंगे. खुशी की बात ये है कि गौल्डमैन  सैक्स ने भारत की रेटिंग अपग्रेड करके 'मार्केट वेट' कर दी है। अपग्रेड के लिए गौल्डमैन  सैक्स ने क्रूड ऑइल की कीमत में नरमी और सरकार का नीतिगत सुधारों पर जोर का हवाला दिया है. इस वैश्विक संस्था ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था मे 7.3 फीसदी की दर से तरक्की की उम्मीद भी व्यक्त करी है. सरकार का भी कहना है कि देश के विकास की दर अच्छी है और तात्कालिक प्रभाव को छोड़ दें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भारत के आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में देख सकते हैं.

- स्निग्धा द्विवेदी