हरियाणाः नोडल अफसरों के जरिए कोरोबारी सुगमता बढ़ाने पर जोर

कोरोना महामारी से मंद पड़ी कारोबार की रफ्तार की तेज करने के लिए हरियाणा सरकार जिला स्तर पर तैनात नोडल अफसरों को और अधिक शक्तियां प्रदान करने जा रही हैं। राज्य को उम्मीद है कि कारोबार की सुगमता बढ़ाए जाने से जहां राज्य में निवेश के द्वार खुलेंगे वहीं कोरोना काल में गिरे राजस्व संग्रह में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी। अभी तक नए निवेश के लिए सीएलयू, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी व बिजली कनेक्शन से लेकर 20 से अधिक विभागों की 80 तरह की मंजूरियां  चंडीगढ़ स्थित हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र से दी जाती हैं। अब ये मंजूरियां जिला स्तर पर ही जिला उद्योग केंद्रों में तैनात नोडल अफसर देंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक-2020 के तहत कारोबार की सुगमता के लिए करीब 20 विभागों की 80 मंजूरियां देने में होने वाली देरी को कम करने के साथ एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने को हरी झंडी दे दी है जिससे प्रदेश में कारोबारी सुगमता न केवल वैश्विक मानकों के अनुरूप हो बल्कि उससे भी बेहतर हो।

कारोबार सृजित करने और  प्रदेश में कारोबारी सुगमता को प्रोत्साहित करने के लिए हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन अधिनियम, 2016 में मौजूदा उद्यमों के समावेश, पहले प्रदान की गई स्वीकृतियों का नवीनीकरण प्रदान करने, सिंगल विंडो मकैनिज्म के दायरे में सेवाओं और विभागों के कार्यक्षेत्र के विस्तार, लचीली समय सीमा, नोडल अधिकारियों को और अधिक शक्तियां सौंपने की तैयारी है। प्रस्तावित संशोधनों से केन्द्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग द्वारा की जा रही राज्यों की रैंकिंग के मूल्यांकन में हरियाणा की सम्भावनाओं पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि कारोबार की सुगमता को लेकर देशभर में हरियाणा की रैंकिंग 2017-18 में तीसरे स्थान पर रही है जबकि 2016-17 में यह 14वें पायदान पर थी।

राज्य सरकार द्वारा निवेशकों को उद्यमों की स्थापना के लिए अपेक्षित स्वीकृतियां समयबद्ध ढंग से लागू कराई जाएगी। मेगा परियोजनाओं के लिए विशेष पैकेज स्वीकृत करने तथा नीतिगत पहलों की स्वीकृति हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन बोर्ड (एचईपीबी) गठित किया गया है। परियोजना स्वीकृतियों के लिए द्वि-स्तरीय प्रणाली स्थापित की गई है। प्रदेश में अनुरूप क्षेत्रों (कन्फर्मिंग जोन) में 10 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश तथा एक एकड़ से अधिक भूमि के सीएलयू मामलों वाली परियोजनाएं अधिकार-प्राप्त कार्यकारी समिति (ईईसी) या नोडल अधिकारियों द्वारा और 10 करोड़ रुपये तक के निवेश और एक एकड़ तक के सीएलयू मामलों की स्वीकृति उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय स्वीकृति समिति (डीएलसीसी) द्वारा दी जाती है। 

कारोबार में सुगमता के जरिए सरकार का ध्यान राज्य में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) को बढ़ावा देना है। इसके लिए हरियाणा सरकार ने हाल ही में एमएसएमई इंटरप्राइजेज़ का गठन किया है। एमएसएमई को करीब 17 विभागों की ऑनलाइन मंजूरी एचईपीबी द्वारा 45 दिन के भीतर देने का प्रावधान है।  एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सभी 22 जिलों में विभिन्न वर्ग के 56 कल्सटर्स की पहचान की है  जिससे प्रदेश के 70 हजार से अधिक एमएसएमई को लाभ मिलेगा। एमएसएमई श्रेणी में निवेश के लिए पिछले 8 महीने में 8000 से अधिक पंजीकरण हुए हैं जिसमें 4194 स्टार्टअप और 4119 स्टैंडअप शामिल हैं।

- हरीश मानव (लेखक; वरिष्ठ पत्रकार हैं)