प्रतिबंध हटा, पुर्तगाल ने ड्रग्स से होने वाली मौतों पर लगाई लगाम

विगत कुछ समय से पंजाब में ड्रग्स के सेवन करने वालों की संख्या में हुई वृद्धि ने शासन प्रशासन सहित स्थानीय जनता के माथे पर चिंता की लकीरें पैदा कर दी है। तमाम प्रयासों के बावजूद वहां ड्रग्स का सेवन करने वालों की संख्या में कमी नहीं आ पायी है। यहां तक कि देशभर में पिछली कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल खड़ा करने में सफल रही भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। यह घटना बताने के लिए काफी थी कि लोगों के लिए यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण था।

लेकिन क्या आपको पता है कि दो दशक पूर्व यूरोप के देश पुर्तगाल में स्थिति इससे भी ज्यादा बुरी हो गई थी। वहां की अधिकांश आबाद ड्रग्स के सेवन और एचआईवी एड्स जैसी जानलेवा बीमारी की गिरफ्त में थी। साठ-सत्तर लाख की आबादी वाले देश में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में लोग ड्रग्स के सेवन और इसमें प्रयुक्त होने वाली सीरिंज (सूईयों) के प्रयोग से होने वाली एड्स की बीमारी से अकाल मौत का शिकार होने लगे थे। ड्रग्स पर कड़े प्रतिबंध और ड्रग्स का सेवन करने वालों को जेल भेजने व कड़ी सजा देने जैसे प्रावधानों के बावजूद सरकार को सफलता नहीं मिली।

वर्ष 2001 में वहां की सरकार ने अप्रत्यासित फैसला लेते हुए ड्रग्स के सेवन पर से प्रतिबंध हटा लिया। अब इसे यहां आपराधिक गतिविधि नहीं मानी जाती थी। एक व्यक्ति को अपने साथ 10 दिनों के लिए पर्याप्त ड्रग्स को लेकर चलने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी गई। हालांकि ऐसे लोगों की काउंसलिंग करने और ड्रग्स का सेवन न करने की सलाह का सिलसिला चलता रहा। पुर्तगाल सरकार के इस फैसले ने जादुई असर किया। आश्चर्यजनक रूप से अगले दो वर्षों में ही ड्रग्स के अत्यधिक सेवन व इसके दुष्परिणाम से होने वाली मौतों में 50 फीसदी तक कमी हो गयी। 

आज ड्रग्स की समस्या से निजात पाने के लिए पुर्तगाल के इस मॉडल पर दुनिया भर में शोध हो रहे हैं। क्या भारत और पंजाब में ऐसा संभव है??

 

- अविनाश चंद्र