दिल्ली की झुग्गियों में क्यों पहुंचे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एचआर...

 

बृहस्पतिवार को सेंटर फॉर सिविल सोसायटी में अपने सहयोगी एंड्रयू हम्फ्रीज के साथ बाजार व बाजार की प्रवृति को लेकर काफी देर तक चर्चा हुई। बाजार किस प्रकार समाज के उत्थान में कारगर उपकरण साबित हो सकता है इस पर कई प्रकार के सुझाव और विचार एंड्रयू ने सुझाए। साथ ही उन्होंने प्रख्यात उदारवादी चिंतक व अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन के वास्तविक जीवन से संबंधित एक घटना का भी विवरण दिया। साथ ही उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध एक लेख का लिंक भी दिया। बृहस्पतिवार को ही आजादी वेबपोर्टल पर हिंदी में एक पैरे की भूमिका के साथ मिल्टन फ्रीडमैन के उस लेख का एक अंश हूबहू अंग्रेजी में पोस्ट किया। शीर्षक था “सामाजिक उत्थान के लिए बाजार का प्रयोग”

आज सुबह ऑफिस आने से पहले नाश्ते की टेबल पर आज के अखबार पर सरसरी निगाह डालते ही मैं चौंक पड़ा। कारण एक खबर थी। ऐसा लगा मानों मिल्टन फ्रीडमैन का बृहस्पतिवार का लेख शब्दशः वास्तविकता में बदल गया हो। खबर थी कि “दक्षिणी दिल्ली के एक स्लम इलाके में रोजगार प्रदान करने पहुंची बहुराष्ट्रीय कंपनियां”। अखबार के मुताबिक बहुराष्ट्रीय बैंक आईसीआईसीआई सहित आऊट सोर्सिंग कराने वाली कुछ कॉल सेंटर कंपनियों ने वसंत विहार इलाके के कुली कैंप, नेपाली कैंप और मोतीलाल नेहरू कैंप जैसी झुग्गी बस्तियों में न केवल प्लेसमेंट सेल लगाया बल्कि डेढ़ से दो दर्जन युवाओं को सेलेक्ट भी किया। चयनित युवाओं में अधिकांश वे युवा थे जो या तो नशे गिरफ्त में पड़ चुके थे या फिर स्कूल ड्रॉपआऊट थे। इस काम में कम्पनियों की सहायता की दिल्ली पुलिस व एक गैर सरकारी संस्था ने। संस्था ने नशे की गिरफ्त में पड़े युवाओं की पहचान कर उन्हें इससे उबरने में मदद की और उन्हें रोजगार परक प्रशिक्षण भी दिया। प्लेसमेंट के दौरान चुने गए युवाओं को ऑन द स्पॉट ऑफर लेटर भी प्रदान कर दिया गया।

इस घटना के बाद भी क्या अब भी कहीं शक या सुवहा की स्थिति रह जाती है कि बाजार के माध्यम से सामाजिक उत्थान नहीं किया जा सकता है?

आजादी पर पोस्ट आर्टिकल को पढने के लिए क्लिक करें

http://azadi.me/miltonfriedman-market-socialdevelopment

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर का मजमून कुछ इस प्रकार है-

पिछले वीकेंड पर दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाकों- वसंत विहार और वसंत कुंज के आसपास मौजूद कुली कैंप, नेपाली कैंप और मोतीलाल नेहरू कैंप जैसी झुग्गी बस्तियों के युवा (17-25 साल) हैरान थे। दरअसल, आईसीआईसीआई और एसबीआई जैसे टॉप बैंकों समेत कई कॉल सेंटर कंपनियों के एचआर एग्जेक्यूटिव इन इलाकों में हायरिंग करने पहुंचे थे। इसमें इन इलाकों के कुल 11 लोगों को एंट्री लेवल जॉब भी मिल गई, जिसमें एवरेज सैलरी 8,000 रुपए से ज्यादा है।

वसंत विहार पुलिस स्टेशन और एनजीओ justrozgar.com की पहल से अब तक 45 युवाओं को बेसिक कंप्यूटर के बारे में जानकारी दी गई है। तीन महीने के इस कोर्स में डीटीपी, टैली और एमएस-ऑफिस जैसी चीजें सिखाई जाती हैं, ताकि ट्रेनिंग करने वाले लोगों को एंट्री-लेवल डाटा ऑपरेटर की नौकरी मिल सके। इस कोर्स में ज्यादातर स्टूडेंट्स स्कूल ड्रॉप आउट, ड्रग्स के आदी और ऐसे लोग होते हैं, जिनके खिलाफ छोटे-मोटे अपराध के मामले हैं। इसी बैच के 19 लोगों ने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर दी है। इनमें से कुछ लोग बारहवीं क्लास पूरी करने के बाद कंप्यूटर साइंस का विकल्प चुन रहे हैं।

पुलिस ने पिछले साल नवंबर में यह स्कीम लॉन्च की थी। निर्भया गैंगरेप की घटना के बाद इस स्कीम में और स्टूडेंट्स को शामिल करने के लिए पुलिस ने अपनी कोशिश दोगुनी कर दी। इसकी क्लास वसंत विहार थाने में होती है। यहां एक ट्रेनर ने बताया, 'हम यह दिखाना चाहते थे कि लड़कियां लड़कों के बराबर होती हैं और हमारा मकसद ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस प्रोग्राम में शामिल करना है। पहले राउंड के प्लेसमेंट के बाद हमें बढि़या रिस्पॉन्स मिल रहा है। ऐसे में अब एक दिन में 3 क्लास की जरूरत पड़ेगी। दक्षिण दिल्ली के डीसीपी बी एस जायसवाल ने बताया, 'कुछ टेलीकॉम कंपनियों ने भी हमारे स्टूडेंट्स में दिलचस्पी दिखाई है।'

इस इलाके के एसएचओ अनिल शर्मा ने बताया कि 19 और स्टूडेंट्स को इस पहल से फायदा हो रहा है। एनजीओ वी द पीपल के मुताबिक, हर प्रशिक्षित शख्स को सरकारी की तरफ से तय अधिकतम मासिक मेहनताना मिलता है।' वी द पीपल इस प्रोजेक्ट की इंचार्ज है। एनजीओ के एक प्रतिनिधि ने बताया, 'हमारे कुछ स्टूडेंट्स को 11,000 रुपए की शुरुआती सैलरी ऑफर की गई है। हमारा कोर्स इंडस्ट्री लीडर्स से सलाह-मशविरा कर बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हम तीन शिफ्ट में क्लास चलाते हैं- सुबह 8 बजे से 10 बजे तक, शाम 3 बजे से 5 बजे तक और आखिर में शाम 5 बजे से 7 बजे तक।

पुलिस का कहना है कि युवाओं को एंप्लॉयमेंट दिलाने पर ज्यादा जोर है। एक ऑफिसर ने बताया, 'इस एरिया में आपराधिक घटनाएं ज्यादा होती हैं, लिहाजा युवाओं को क्राइम से हटाने का एक ही रास्ता है कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद की जाए।'

 

- अविनाश चंद्र