गुडबाय रेलवे मिनिस्ट्री

भारत और चीन के बीच तुलना करने का चलन एक अर्से से पूरी दुनिया में चल रहा है। कई मामलों में भारत को चीन से शिक्षा लेने को कहा जाता है, कुछ में चीन को भी भारत से सीखने की सलाह दी जाती है। लेकिन हाल में लिए गए चीन सरकार के सबसे बड़े प्रशासनिक फैसले से कुछ सीखने की हिम्मत क्या भारत सरकार कभी जुटा पाएगी?

चीन के पास फिलहाल अमेरिका के बाद संसार में दूसरे नंबर का रेलवे ढांचा है। 300 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा तेज चलने वाली बुलेट ट्रेनों और इंजीनियरिंग की असाधारण उपलब्धियों वाली जोखिम भरी रेलवे लाइनों के मामले में तो अमेरिकी भी उसके आसपास नहीं ठहरता। लेकिन इतने विशाल रेलवे ढांचे को चलाने वाली मिनिस्ट्री को खत्म कर देने का फैसला चीनी हुकूमत ने एक झटके में ले लिया। इसके प्रशासनिक पहलू यानी तकनीकी विकास, रेलवे प्रोजेक्टों की क्वालिटी सुनिश्चित करने और सेवाओं की गुणवत्ता व सुरक्षा मानकों पर नजर रखने जैसे काम अब भूतल परिवहन मंत्रालय के जिम्मे होगी।

यात्रियों और सामानों की आवाजाही से जुड़े ऑपरेशनल काम और रेलवे से जुड़े सारे निर्माण कार्य, संक्षेप में कहें तो व्यापारिक दायरे में आने वाले सभी कामकाज चाइना रेलवे कॉरपोरेशन नाम का एक निगम देखेगा। चीन के रेल मंत्रलाय ने अपने विघटन-पूर्व बयान में कहा है कि आने वाले समय में रेलवे का सारा व्यापारिक कामकाज क्षेत्रीय और विशेषज्ञता आधारित निजी व सरकारी कंपनियों को सौंप दिया जाएगा।

साथ ही रेलवे की तरफ ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करने के लिए इन कंपनियों के बीच खुली होड़ को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह खबर पढ़कर दो सवाल तुरंत दिमाग में आते हैं। जाहिर है कि ये चीन में भी पूछे जा रहे होंगे। एक तो यह कि इस फैसले के बाद चीनी रेलवे के 20 लाख कर्मचारियों का क्या होगा? और दूसरा यह कि इससे किराये-भाड़े किस तरह प्रभावित होंगे?

चीन सरकार ने इनके जवाब में सभी रेलकर्मियों की सेवाएं सुरक्षित रखने और बाजार के नियमों के मुताबिक किराया थोड़ा बढ़ने की बात कही है। भारत में पिछले डेढ़ दशकों से रेल मंत्रालय को जिस तरह महत्वकांक्षी राजनेताओं के बीच प्रसाद की तरह बांटा जा रहा है, उसे देखते हुए यह बात सहज ही दिमाग में आती है कि इसे लेकर चीन जैका ही कोई बुनियादी फैसला यहां भी लिया जाना चाहिए। हालांकि इससे पहले चीन में इसका नफा नुकसान देख लेने में भी कोई हर्ज नहीं है।

साभारः नवभारत टाइम्स