शासन

  • गरीबी को खत्म करने के अभी तक सुने गए प्रस्तावों में सबसे आसान एक एनजीओ में काम करने वाले एक दोस्त की ओर से आया। क्यों न हम न्यूनतम वेतन को इतना बढ़ा दें कि सभी लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ जाएं? यह कितना आसान लगता है मनोहारी और दर्दरहित। अफसोस, यह नाकाम रहेगा क्योंकि हमारे यहां एक ऐसा कानून है जिसका परिणाम अनपेक्षित है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर
काफी इंतजार के बाद पिछले वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2019 ड्राफ्ट आखिरकार जारी हो ही गया। यह ड्राफ्ट 484 पृष्ठों का व्यापक दस्तावेज है जिसे तैयार करने में चार वर्षों से अधिक का समय लगा। इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चेयरमैन रहे पद्मश्री व पद्म विभूषण के. कस्तूरीरंगन समीति द्वारा प्रस्तुत एनईपी ड्राफ्ट को लेकर सरकार काफी उत्साहित है और इसे जल्द से जल्द लागू कराना चाहती है। कुछ दिनों पहले केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने नई शिक्षा नीति के जल्द लागू होने का जिक्र भी किया।

वित्तमंत्री ने खतरा न उठाकर संजीदगी दिखाई, संरक्षणवाद को पलटने में नाकाम रहीं

हमारी जैसी मंदी से निपटने के केवल दो ही तरीके हैं। एक उपभोग के जरिए और दूसरा निवेश के माध्यम से। इस बजट में दूसरा तरीका अपनाया गया है और मेरे विचार में यह सही रास्ता है। उपभोग के पहले तरीके में लोगों के हाथों में बैंक ट्रांसफर के माध्यम से पैसा देना पड़ता। वे पैसा खर्च करते, सामान इस्तेमाल करते और मांग को बढ़ाते, जिससे फैक्टरियां चलतीं और अधिक नौकरियां आतीं, जिससे और खर्च बढ़ता। इस चक्र के चलने से अर्थव्यवस्था में गति आ जाती। 

Author: 
गुरचरण दास

इकोनॉमिक थिंक टैंक सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के प्रेसिडेंट पार्थ जे शाह ने कहा कि सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण में जिस तरह से बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के नाम और उनके विचारों का हवाला दिया, उससे उम्मीद जगी थी कि बजट में कुछ बड़े और व्यवस्थागत बदलाव पेश किए जाएंगे। लेकिन शनिवार को पेश बजट में इन विचारकों और उनके आर्थिक दर्शनों को व्यावहारिक तौर पर उम्मीद के मुताबिक लागू नहीं किया गया। दोनों दस्तावेजों को देखने से एकबारगी यह विश्वास नहीं होता है कि दोनों दस्तावेज एक ही सरकार ने पेश किए हैं।

आर्थिक मंदी की स्थिति से जूझ रही अर्थव्यवस्था में तेजी लाने का प्रयास पिछले कई महीनों से जारी है। इस प्रयास के तहत कॉर्पोरेट टैक्स में कमी करने से उद्योगों को कुछ राहत अवश्य मिली। लेकिन बाजार में वस्तुओं की मांग अपेक्षानुरूप नहीं बढ़ी। उम्मीद की जा रही थी कि बजट में आम जनता विशेषकर कर दाताओं को बड़ी राहत दी जाएगी जिससे उनके पास पैसे बचे और बाजार में मुद्रा की आवक बढ़े। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 5 लाख तक के वार्षिक आय वालों को जीरो टैक्स, 5 लाख से 7 लाख तक वार्षिक आय पर टैक्स को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की घोषणा की तो यह एक

भारत में स्कूली शिक्षा की स्थिति बेहाल हो गई है। दिल्ली सरकार ने पिछले कुछ सालों में शिक्षा में सुधार लाने  के लिए कुछ प्रयास किए हैं।  सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के द्वारा प्रस्तुत  आज़ादी पॉडकास्ट के इस एपिसोड में, होस्ट अमित चंद्रा चर्चा करते हैं भुवना आनंद और अभिषेक रंजन के साथ, दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के बारे में।

आस पास के रेहड़ी पटरी व्यवसायियों के पास आपका आना जाना अवश्य रहता होगा। रेहड़ी पटरी वाले ताजे फल-सब्जियों से लेकर हल्के फुल्क नाश्ते तक की हमारी दिन प्रतिदिन की सारी जरूरतों को पूरी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण अपनी आजीविका को लेकर प्रतिदिन उन्हें कितने जोखिमों का सामना करना पड़ता है?

देश के वर्तमान आर्थिक हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यदि बैकिंग ढांचा पटरी पर आ गया तो अर्थव्यवस्था की गाड़ी को रफ्तार पकड़ने में ज्यादा देर नहीं लगेगी

हमारा सामना इस असुविधाजनक सत्य से है कि हिंदुत्व व कश्मीरियत सहित हर राष्ट्रवाद काल्पनिक है

Author: 
गुरचरण दास

काफी इंतजार के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2019 का मसौदा आखिरकार जारी हो ही गया। यह मसौदा 484 पृष्ठों का व्यापक दस्तावेज है जिसे तैयार होने में चार वर्षों का समय लगा। इस मसौदे में स्कूली शिक्षा के संबंध में व्यक्तिगत तौर पर सुझायी गई कुछ अति उत्कृष्ट सिफारिशें भी शामिल हैं। इन सिफारिशों में शिक्षकों के प्रशिक्षण और स्कूली शिक्षा प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग की स्थापना, सरकार द्वारा नीति निर्धारक, संचालक, मूल्यांकनकर्ता और स्कूलों के नियामक सभी की भूमिका निभाने की बजाए इनके शासन की भूमिकाओं का पृथक्कीकरण आदि शामिल हैं। सरकार

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