शासन

● प्राइवेट स्कूल लर्निंग आउटकम के मामले में सरकारी स्कूलोँ से ज्यादा आगे नहीं हैं
● तो सरकारी स्कूलोँ में होने वाले दाखिलों में गिरावट क्यों देखने को मिल रही है?

वर्ष 2010-11 में, 4,435 सरकारी स्कूलोँ के शिक्षकोँ के वेतन पर 486 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इन सभी स्कूलोँ में 14,000 शिक्षक अधिक थे। और इन सभी 4,435 स्कूलोँ में पढ़ने वाले बच्चोँ की कुल संख्या करीब शून्य थी।

नए साल में नया संकल्प लेने का वक्त आ गया है। ऐसे में मैं एक नियम में सुधार की बात करूंगी, जो मेरे हिसाब से इस साल के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय है और वह है शिक्षा क्षेत्र को स्वतंत्रत किया जाए और स्कूलोँ को लाभ कमाने का अवसर दिया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरूआत की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पक्षपाती लिंग चुयन की प्रक्रिया का उन्मूलन, बालिकाओं के अस्तित्व व सुरक्षा को सुनिश्चित करना और उनके लिए उचित शिक्षा की व्यवस्था करना था। इसके लिए 100 करोड़ रूपए के आरंभिक कोष का प्रावधान भी किया गया। शुरू में इस अभियान के फायदे भी देखने को मिले। सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड हुए ‘सेल्फी विथ डॉटर’ और इसे मिले व्यापक जनसमर्थन ने पिछड़े व ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को भी विश्वास से ओत प्रोत किया। महिलाएं घरों से बाहर निकलने लग

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी भारत की चुनाव प्रणाली आज बहस के केंद्र में है। सत्ताधारी दल भाजपा के साथ-साथ अनेक दलों, संस्थाओं और बुद्धिजीवियों का मानना है कि देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हों, इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। हालांकि एकसाथ चुनाव कराने के विचार से असहमति रखने वाले दलों की भी कोई कमी नहीं है। कांग्रेस सहित अनेक दल- जैसे तृणमूल कांग्रेस, बसपा, टीडीपी और कम्युनिस्ट पार्टी, ने एक साथ चुनाव कराने से असहमति व्यक्त की है। इस बहस में सहमति और असहमति के पाटों पर खड़े दो खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। लेकिन यह बहस आज के दौर

Author: 
शिवानंद दिवेदी

देश में विभिन्न जातियों के द्वारा स्वयं को पिछड़ा और वंचित साबित करने की एक होड़ सी मची हुई है। जैसे-जैसे आम चुनावों का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे विभिन्न जातियों/समूहों के द्वारा स्वयं को आरक्षित (पिछड़ा) वर्ग में शामिल करने की मांग लगातार तेज होती जा रही है। हरियाणा में जाट आंदोलन, राजस्थान में गुर्जर आंदोलन, गुजरात में पाटीदार आंदोलन और महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन इसका मजमून हैं। उधर, अनुसूचित जातियों और जनजातियों को प्रोन्नति में आरक्षण देने के मुद्दे पर वर्ष 2006 में एम.

हाल ही में लोक सभा में एक बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सूट-बूट वालों की सरकार चलाते हैं, जो अपने अमीर करीबियोँ का समर्थन करती है और गरीब लोगोँ को नजरअंदाज करती है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

अपनी युवावस्था के दिनों में मैंने निचले स्तर तक आर्थिक लाभ के सिद्धांत (थ्योरी ऑफ इकोनॉमिक ट्रिकल डाउन) के बारे में सुना था। इसके मुताबिक अगर अमीर और अधिक अमीर होंगे तो गरीबों को भी इसका लाभ मिलेगा और इस वजह से यह सबके लिए फायदेमंद रहेगा। ऐसा माना जा रहा था कि यह इस बात का भी खुलासा कर देगा, कार्ल मार्क्स के विपरीत, कि यह सच नहीं है कि अमीर और अमीर हो गए, जबकि गरीब और गरीब। इसके विपरीत हुआ यह कि दोनों ही साथ-साथ अमीर हुए। अमेरिका में गरीबी की रेखा 11 हजार डॉलर प्रति वर्ष (पांच लाख रुपए प्रति वर्ष) की चौंकाने वाली ऊंचाई तक पहुंच गई है। इतिहास

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

भरी गर्मी और तपती दोपहरी से बचने के लिए आपने अपने कमरे में लगवाने के लिए नया एसी लिया है लेकिन आप अपना कमरा कितना ठंडा करेंगे इसका फैसला सरकार करेगी। ये सुन आपका चौकना स्वाभाविक है लेकिन सरकार कुछ ऐसा ही करने का मन बना रही है।

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