पर्यावरण

भरी गर्मी और तपती दोपहरी से बचने के लिए आपने अपने कमरे में लगवाने के लिए नया एसी लिया है लेकिन आप अपना कमरा कितना ठंडा करेंगे इसका फैसला सरकार करेगी। ये सुन आपका चौकना स्वाभाविक है लेकिन सरकार कुछ ऐसा ही करने का मन बना रही है।

जब हम जैसे लोग यह कहते हैं कि - जनसंख्या समृद्धि का कारक है, केवल मनुष्य ही ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है और नक्शे पर अंकित प्रत्येक बिन्दु, जनसंख्या की दृष्टि से सघन है और ज्यादा सम्पन्न है, तो उनके जैसे (तथाकथित समाजवादी) लोग प्राकृतिक संसाधन की कमी की बात करते हैं। उनका तर्क है कि पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं और यदि ज्यादा लोग होंगे, तो ये जल्दी समाप्त हो जायेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की कमी की समस्या का जूलियन साइमन ने गहनतापूर्वक अध्ययन किया। उन्होंने दीर्घकालिक मूल्य सम्बन्धी प्रवृत्तियों का अध्ययन किया और इससे बड़े रोचक परिणाम निकलकर आये कि वेतन एवं मुद्रास्फीति

भारत में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ से आने वाले “कोटेड पेपर” पर नई एंटी-डंपिंग जाँच शुरू होने के बारे में बातें चल रही हैं। दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया को इस जाँच से छूट दी गई है। दरअस्ल, ये देश ही ज़ीरो कस्टम ड्यूटी स्टेटस के चलते भारत में सस्ते आयात के लिए ज़िम्मेदार हैं, जैसा कि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज़ लि.

वैज्ञानिक तौर पर यह सिद्ध हो चुका है कि बांस, पेड़ नहीं बल्कि घांस की एक प्रजाति है। भारत दुनिया में बांस का सबसे बड़ा उत्पादक देश है इसके बावजूद अगरबत्ती की तीलियों सहित बांस से बनने वाले अन्य उत्पादों के निर्माण के भारत दुनिया में सबसे अधिक बांस का आयात भी करता है। कारण यह कि बांस के पेड़ के रूप में वर्गीकृत होने के कारण इसके काटने पर रोक है। बांस के उत्पादन और इसे काटने की अनुमति मिल जाने पर बड़ी आबादी बेरोजगारी के जंजाल से मुक्त हो सकती है। साथ ही इससे अर्थव्यवस्था में लगभग 1000 करोड़ रूपए का योगदान हो सकता है..। हाल ही में प्रधानमंत्री न

पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों ने प्रकृति और संस्कृति, कला और जीवन, सामरिक ललक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक शांति, जैव एवं सांस्कृतिक विविधता के बीच एक बेमिसाल तालमेल स्थापित किया है और इसे संरक्षित भी किया है। इन लोगों ने इस संतुलन की खूबी को संगीत, कला, स्थापत्य, अपनी सोच और ज्ञान प्रणाली, जीवन के आधारभूत रीति रिवाज से लेकर अपने कार्यों, मौसम और प्रकृति में संजोये रखा है।

- फ्रेजर इंस्टिट्यूट व सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा जारी वैश्विक रैंकिंग में 102 से फिसलकर 112वें स्थान पर पहुंचा भारत
- आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में भूटान (78), नेपाल (108) व श्रीलंका (111) से पिछड़ा पर चीन (113), बांग्लादेश (121) व पाकिस्तान (133) से रहा आगे
- आर्थिक रूप से स्वतंत्र देशों की सूची में हांगकांग शीर्ष पर, सिंगापुर व न्यूजीलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे पायदान पर

जब हम जैसे लोग यह कहते हैं कि - जनसंख्या समष्द्धि का कारण है, केवल मनुष्य ही ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है और नक्शे पर  अंकित प्रत्येक बिन्दु,  जनसंख्या की दृष्टि से सघन है और ज्यादा सम्पन्न है,  तो उनके जैसे (तथाकथित समाजवादी) लोग प्राकृतिक संसाधन की कमी की बात करते हैं। उनका तर्क है कि पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं तथा यदि ज्यादा लोग होंगे, तो ये जल्दी समाप्त हो जायेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की कमी की समस्या का जूलियन साइमन ने गहनतापूर्वक अध्ययन किया। उसने दीर्घकालिक मूल्य सम्बन्धी प्रवृत्तियों का अध्ययन किया और इससे बड़े रो

लातूर मे आज पानी की स्थिति इतनी भयानक है कि ट्रेन मे पानी भरकर उनकी प्यास बुझाई जा रही है। देश के कम से कम 9-10 राज्य अभूतपूर्व जल संकट से झूझ रहे हैं। मुंबई हाईकोर्ट पहले ही आईपीएल मैच जल संकट के कारण कहीं ओर कराने का आदेश दे चुका है। सूप्रीम कोर्ट भी इससे पहले केंद्र को पानी के मामले मे फटकार लगा चुका है। बुंदेलखंड और उसके आसपास के इलाकों से लोगो का पलायन जारी है। भारत की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है। अभी कुछ दिनों पहले ही जाट आरक्षण के मुद्दे पर गरमाई राजनीति में जब दिल्ली का पानी बंद कर दिया गया तब सारी दिल्ली त्राहिमाम कर उठी। पं