जीविका

नयी दिल्ली स्थित लोक नीति विचार मंच सेंटर फॉर सिविल  सोसाइटी द्वारा संचालित जीविका: कानून, स्वतन्त्रता और आजीविका अभियान ओमिदयार नेटवर्क और अशोका चेंजमेकर्स के प्रतिष्ठित "प्रोपर्टी राईट्स: आईडेनटीटी, डिग्निटी एंड ओपोर्चुनिटी फॉर आल" नामक प्रतियोगिता में सेमी-फाईनलिस्ट के तौर पर चुना गया है. नौ देशों में से 19 सेमी-फाईनलिस्ट गरीबों को ज़मीन के हक दिलवा कर समुदायों में परिवर्तन और सुधार लाने के अपने प्रयासों के चलते इस प्रतियोगिता के लिए चुने गए हैं.

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दिल्ली राज्य में गरीबो  को समाज सुधार योजनाओं का लाभ सिंगल विंडो के ज़रिये पहुचाने के लिए 'मिशन कन्वरजेंस' या सामाजिक सुविधा संगम एक अनूठा और लाभदायक प्रयोग है. इस मिशन का उद्देश्य समुदायों के करीब जा कर वितरण बिन्दुओं को खड़ा करना है ताकि गरीब जनता विभिन्न सामाजिक योजनाओं का फल आसानी से उठा सके. एक सोसाइटी की तरह रजिस्टर्ड सामाजिक सुविधा संगम राज्य के तमाम विभागों, NGOs और नोडल एजेंसिओं के लिए एक सुविधा केंद्र की तरह है.

ताकत हासिल कर लेना एक बात है और उसका इस्तेमाल करना दूसरी। पिछले दिनों जब दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की भेंट हुई तो यह दो निराश नेताओं की भेंट थी। ओबामा जहां अमेरिका में मध्यावधि चुनावों में नाटकीय हार से हैरान थे, वहीं मनमोहन सिंह एक के बाद एक हो रहे घोटालों के खुलासों से परेशान थे।

Author: 
गुरचरण दास

‘किलर लाइन’ के नाम से कुख्यात ब्लू लाइन बसों का दिल्ली की सड़कों से हटाया जाना एक संवेदनशील मुद्दा है जिस पर अलग अलग किस्म की राय व्यक्त की जा रही हैं. जहां कई यह मानते हैं कि सैंकड़ों जानें ले चुकी इन बसों का दिल्ली की सड़कों से चले जाना ही अच्छा है, एक ऐसा वर्ग ये भी समझता है कि तेज़ रफ़्तार और समय से चलने वाली ब्लू लाइन बसें दिल्ली की लाइफ लाइन थीं और उन का चला जाना एक नुकसान है.

पर यहाँ हमें सार्वजनिक नीति के दोषों के बारे में भी सोचना चाहिए जिन की वजह से शहर में पब्लिक यातायात इतना त्रुटिपूर्ण है.

अर्थशास्त्र आर्थिक प्रतिमानों, सैद्धांतिक प्रमाणों और अविवेकपूर्ण बुद्धिशीलता का विज्ञान बनने से पहले एक नैतिक दर्शन के नाम से जाना जाता था तथा इस बात से संबद्ध था कि व्यक्ति अपना जीवन कैसे बिताता है। 18वीं सदी के उत्तरार्द्ध के दौरान एडम स्मिथ द्वारा जीवन का एक व्यापक दर्शन प्रस्तुत किया गया। अपनी अनूठी कृति दि वेल्थ ऑफ नेशंस में एडम स्मिथ ने स्व-हित पर आधारित एक अर्थव्यवस्था का वर्णन किया है। यह व्यवस्था जो बाद में पूंजीवाद के नाम से जानी गई, इस प्रसिद्ध उद्धरण में वर्णित है:

लेखक:

पार्थ जे शाह, अध्यक्ष, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी

प्रकाशक:
सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी

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    राजस्थान के कोटा और आसपास के जिलों में इन दिनों दारा राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) की खूब चर्चा है। कोटा जिला के दारा वन्य जीव अभ्यारण्य के छोटे से संकरे हिस्से को राष्ट्रीय उद्यान बनाने का प्रस्ताव राजस्थान सरकार के वन विभाग अधिकारियों के फाइलों में पड़ा है। अधिकारीगण इसे राज्य सरकार से स्वीकृत कराकर गजट में छपवाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं क्योंकि गजट में छपने के बाद ही सरकारी मंजूरी की घोषणा को वैधानिक मान्यता मिलेगी। एक बार पहले भी सन् 2003 में यह प्रस्ताव हर जगह से स्वीकृति पाते हुए गजट में प्रकाशन के मुहाने तक पहुँच गया था। लेकिन ऐन मौक

    देश आज जिन चुनौतियों से जूझ रहा है, बेरोजगारी उनमें से एक है, इसलिए रोजगार योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इस वर्ष का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पी.

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