जीविका

सुधार की राह कभी भी आसान नहीं रही है। कड़े और संरचनात्मक सुधार के कारण चुनाव के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है किंतु आपदा सदैव अपने साथ परिवर्तन के अवसर लेकर आती है और महामारी ने भी केंद्र सरकार को सुधार का ऐसा ही अवसर प्रदान किया है।

नजरियाः प्राइवेट नौकरियों में स्थानीयों के लिए 75% आरक्षण के कानून का असर बाकी राज्यों पर भी पड़ेगा

Author: 
गुरचरण दास

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 को कृषि क्षेत्र में नयी जान डाल देनी चाहिए ताकि उसकी पूरी क्षमता का दोहन किया जा सके। हालांकि जहां बहुत सारे लोगों की दलील है कि यह संशोधन सही दिशा में उठाया गया कदम है, यह अधिनियम आपने मौजूदा रूप में आदर्श नहीं है। कुछ नियमों के स्पष्ट न होने के कारण यह अनुत्पादक हो सकता है जिसकी वजह से उस स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है जिसे यह बढ़ावा देना चाहता है।

दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले 100 दिनों से जारी किसान आंदोलन के बीच राजनैतिक दलों और राज्य सरकारों के बीच भी सियासी प्रतिस्पर्धा जारी है। यह प्रतिस्पर्धा स्वयं को किसानों का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की है। किसानों (वोट) को अपने साथ लाने के लिए पहले पंजाब सरकार और उसके बाद राजस्थान सरकार द्वारा संशोधित कृषि कानून लाए गए। इन कानूनों का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के कारण किसानों के होने वाले ‘नुकसान’ को कम करना है। आज बात करते हैं राजस्थान सरकार द्वारा पारित तीन कृषि संशोधन विधेयकों की।

क्या हम कृषि के क्षेत्र में विकास करना चाहते हैं जो कि आर्थिक रूप से टिकाऊ भी हो, या फिर एमएसपी और एसएपी के वर्चस्व के कारण पैदा हुआ चावल, गेंहू और चीनी वाला झमेला?

कोविड महामारी कई मायनों में दुनिया को स्थायी रूप से बदल देगी। जाहिर तौर पर, घर से काम करने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। कार्य स्थल समाप्त तो नहीं होंगे लेकिन घर से होने वाले कार्यों की हिस्सेदारी काफी बढ़ जाएगी।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

लोकप्रिय हिंदी फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की कहानी और हाल में कानून का रुप लेने वाले कृषि विधेयकों के बीच एक अप्रत्याशित और मजेदार समानता है। यह समानता चुनने की आजादी से जुड़ी हुई है। फिल्म में नायिका अपने पसंद के इंसान के साथ जिंदगी बिताने की आजादी चाहती है और उसका कड़क मिजाज वाला पिता अपने हिसाब से उसके भले की सोचते हुए, उसे इस तरह की आजादी नहीं देना चाहता। हालांकि हमें पिता के इरादे नेक लग सकते हैं, उसकी सोच नायिका के लिए तकलीफें पैदा करती है। इसी तरह से बहुत सारे किसान अपने कृषि उपज के लिए खरीदार चुनने की आजादी चाहते हैं लेकिन कृ

कृषि की दशा और किसानों की आर्थिक अवस्था में सुधार के उद्देश्य से देश में तीन नए कानून बनाए गए हैं। ये कानून हैं कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020। सरकार के मुताबिक पहले विधेयक का उद्देश्य एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण करना है जहां किसानों और व्यापारियों को मंडी से बाहर फसल बेचने और खरीदने की आज़ादी होगी। दूसरे विधेयक का उद्देश्य कृषि करारों के संबंध में एक राष्ट्रीय तंत्र की स्थापना करना है जहां कृषि उत्पादो

संतोष गानर महाराष्ट्र के तटीय इलाके में स्थित रायगढ़ में दो एकड़ जमीन के मालिक हैं। यह जगह अल्फांज़ो आम के लिए विख्यात है। इसके बावजूद उन्होंने अत्यधिक मुनाफा दिलाने वाले आम की बजाय सस्ता चावल उगाने का विकल्प चुना है। जब मैंने उनसे ऐसा करने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें भी आम उगाना पसंद है। चावल की खेती से उन्हें प्रति एकड़ 30 हजार रूपये ही प्राप्त होते हैं जबकि आम उगाने से उन्हें इससे दस गुना अधिक आय हो सकती है। लेकिन वह इस काम के लिए आवश्यक आरंभिक निवेश को वहन नहीं कर सकते थे, न ही वे पेड़ से फल प्राप्त करने के लिए पांच साल तक की अ

एक पुरानी कहावत है - अमेरिकी लोगों की बुद्धिमता को कम आंक कर किसी का आर्थिक नुकसान नहीं हुआ अर्थात अमेरिकियों को आसानी से फुसलाकर पैसे कमाए जा सकते हैं। यदि आप इस पर आगे विचार करें तो उन्हें अधिक बुद्धिमान आंकना संभवतः ज्यादा कारगर होगा। यदि आप इस विषय पर और अधिक विचार करें तो पाएंगे कि ऐसी स्थिति सभी लोकतंत्रों के साथ है। और यदि आप में थोड़ा अधिक धैर्य है और आप और अधिक विचार करते हैं तो आप पाएंगे कि कहावत में ‘अमेरिकी लोगों’ के स्थान पर ‘भारतीय लोग’ ज्यादा सटीक बैठता है। विशेषकर वर्तमान में जारी उन बहसों के परिपेक्ष्य में जो बहु प्रतीक्षित,

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