कानून तथा न्यायपालिका

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा प्रस्तुत आज़ादी पोडकास्ट के इस एपिसोड में हम चर्चा करेंगे देश में कानूनों की गुणवत्ता और उन्हें सुनिश्चित करने के तरीकों के बारे में। हम जानने की कोशिश करेंगे कि किस प्रकार कुछ प्रक्रियाओं को आत्मसात कर अच्छी नियत के साथ लागू किये गए कानूनों के अवांछनीय परिणामों से बचा जा सकता है। साथ ही हम इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उठाए गए कदमों की भी पड़ताल करेंगें। इस महत्वपूर्ण चर्चा को होस्ट कर रहे हैं आज़ादी.मी के संपादक अविनाश चंद्र और वक्ता हैं थिंक टैंक  सेंटर फॉर सिविल सोसायटी की रिसर्च टीम से जुड़े एडवोकेट प्रशांत नारंग और जयना बेदी।

विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम यानी कि फॉरेन कॉंट्रिब्यूशन रेग्युलेशन एक्ट में एक बार फिर संशोधन किया गया है। विगत दिनों संसद के दोनों सदनों से नए संशोधनों वाले फॉरेन कॉंट्रिब्यूशन (रेग्युलेशन) अमेंडमेंट बिल 2020 को पास करा लिया गया। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी चंदा प्राप्त कर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वाली संस्थाओं और संगठनों पर अंकुश लग सकेगा और देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी। साथ ही साथ धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा सकेगी।

  • मनचाहे क्रेता को फसल बेचने की आज़ादी मिली, मनचाहे बीज से फसल उगाने की आज़ादी कब 
  • जीएम बीजों के इस्तेमाल की अनुमति के लिये किसान लंबे समय से कर रहे हैं मांग
  • खेती को लाभदायक बनाने के लिये लागत में कमी आवश्यक, एचटीबीटी हो सकता है कारगर

पिछले दिनों बहु प्रतिक्षित और बहु चर्चित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। देश की शिक्षा को लेकर नीति क्या हो, आखिरी बार यह 1986 में तय किया गया था। हालांकि 1992 में इसमें छिटपुट संशोधन किया गया था। वर्ष 2014 की चुनावी रैलियों में तब के बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और वर्तमान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा नीति में बदलाव की ज़रूरतों को मुद्दा बनाया था। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा लागू किये गए शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधानों की प्रधानमंत्री ने चुनावी रैलियों के दौरान मुखर

दो दिनों पहले भारत ने अनलॉकडाउन 3.0 में प्रवेश किया। केंद्र सरकार द्वारा नाइट कर्फ्यू को समाप्त कर दिया गया है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी देर तक खुलने की अनुमति दे दी गई है। जिम, योगा सेंटर्स को भी कुछ निर्देशों के साथ खोलने की तैयारी कर ली गई है। तैयारी सिनेमाघरों और मॉल्स को खोलने की भी चल रही है। रेल और विमान सेवा भी सीमित संख्या में शुरु कर दी गई है। सरकार द्वारा दिशा निर्देश में सामाजिक दूरी बनाए रखना, आरोग्य सेतु ऐप का उपयोग करना, मास्क का उपयोग करना और नियमित रूप से हाथों को साफ करने को पूर्व की भांति जारी रखा गया है। 

कॉरोना महामारी के सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक समेत तमाम पहलूओं पर बहुत सारी बातें हो चुकी। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत अज़ादी पोडकास्ट के इस एपिसोड में आज चर्चा महामारी की स्थिति से निपटने के लिए देश में मौजूद कानून, अनुपालन की प्रक्रिया और उसके संवैधानिक ढांचे के संदर्भ में। इस महत्वपूर्ण विषय को होस्ट कर रहे हैं आजादी.मी के संपादक अविनाश चंद्र और वक्ता हैं कानूनी मामलों के जानकार सुधांशु नीमा। सुधांशु सेंटर फॉर सिविल सोसायटी की कम्यूनिकेशन टीम में मैनेंजर के पद पर कार्यरत हैं।  

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत, अज़ादी पोडकास्ट के इस एपिसोड में होस्ट अमित चंद्रा पिछले सप्ताह की बातचीत को आगे बढ़ाते हैं भुवना आनंद और अभिषेक रंजन के साथ। वे सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा किए गए हस्तक्षेपों पर चर्चा करते हैं।

अभिषेक रंजन और अमित चंद्रा ने शिक्षा के विषय पर पिछले दस वर्षो में ज़मीनी स्तर पर काफी काम किया है। भुवना आनंद सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के रिसर्च डिपार्टमेंट की डायरेक्टर हैं।

जीएम टेक्नोलॉजी पूरी दुनिया के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। फिर भी, भारत की सरकारें इस तकनीकि के फायदों को समझने में असफल रही है और किसानों को इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से वंचित रखा है।

आस पास के रेहड़ी पटरी व्यवसायियों के पास आपका आना जाना अवश्य रहता होगा। रेहड़ी पटरी वाले ताजे फल-सब्जियों से लेकर हल्के फुल्क नाश्ते तक की हमारी दिन प्रतिदिन की सारी जरूरतों को पूरी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण अपनी आजीविका को लेकर प्रतिदिन उन्हें कितने जोखिमों का सामना करना पड़ता है?

सितम्बर, 2019 में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति वैंकेया नायडू ने अदालतों में बड़ी तादात में लंबित मामलों के निपटारे के लिए न्यायिक व्यवस्था में बड़े सुधार की बात कहीं। अपने उद्धबोधन में उन्होंने उच्चतम न्यायालय को चार न्यायपीठों (Cassation Court) में विभाजित करने का सुझाव दिया। उपराष्ट्रपति के इस सुझाव से निश्चित ही न्यायप्रणाली में सुधार आयेगा।

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