कानून तथा न्यायपालिका

रेहड़ी-पटरी और थड़ी ठेला लगाकर अपनी व अपने परिवार के लिए परिश्रम से रोजी रोटी कमाने वाले पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) के अधिकारों की रक्षा के लिए वर्ष 2014 में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट पास किया गया था। लेकिन कानून पास होने के पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद दूर दराज के ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी रेहड़ी पटरी व्यवसायियों का उत्पीड़न लगातार जारी है। स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के अनुसार शहर के प्रत्येक वार्ड को एक टाऊन वेंडिंग कमेटी गठित करनी होगी जिसके 40% सदस्य स्वयं पटरी व्यवसायी होंगे। यह कमेटी उस वार्ड में रेहड़ी पटरी लगाने वालों

मेरा बेटा समलैंगिक है और अब मुझे इसे स्वीकार करने में कोई डर नहीं है। वह बीते 20 वर्षों से अपने पार्टनर के साथ आपसी विश्वास और प्रसन्नता भरी ज़िंदगी बिता रहा है। मेरे परिवार व नज़दीकी मित्रों ने इसे गरिमापूर्वक स्वीकार किया है। लेकिन, मैं इसके बारे में सार्वजनिक तौर पर बोलने से डरता था कि कहीं उसे कोई नुकसान न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया। मेरी पत्नी और मुझे अचानक लगा कि जैसे बहुत बड़ा बोझ सिर से उतर गया है। मुख्य न्यायाधीश के बुद्धिमत्ता भरे शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे, 'मैं जो हूं, वैसा हूं, इसलिए

Author: 
आलोक पुराणिक

मैं एक अभिभावक हूं और अपने बच्चे की शिक्षा और व्यापक शिक्षा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण हितधारक हूं। मेरी आवाज नहीं सुनी गई।

- हम अमीर सरकार वाले गरीब देश के निवासी है
- गरीबी उन्मूलन के लिए लाई जाने वाली सरकारी योजनाएं गैरकानूनी और काला धन बनाने का स्त्रोत होती हैं
- यदि समाजवाद के प्रति हमारी सनक बरकार रहती है तो देश का भविष्य अंधकारमय ही रहेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरूआत की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पक्षपाती लिंग चुयन की प्रक्रिया का उन्मूलन, बालिकाओं के अस्तित्व व सुरक्षा को सुनिश्चित करना और उनके लिए उचित शिक्षा की व्यवस्था करना था। इसके लिए 100 करोड़ रूपए के आरंभिक कोष का प्रावधान भी किया गया। शुरू में इस अभियान के फायदे भी देखने को मिले। सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड हुए ‘सेल्फी विथ डॉटर’ और इसे मिले व्यापक जनसमर्थन ने पिछड़े व ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को भी विश्वास से ओत प्रोत किया। महिलाएं घरों से बाहर निकलने लग

एससी एसटी अत्याचार कानून फिर उसी दमखम के साथ लागू हो गया है जैसा सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च के फैसले से पहले था। एससी एसटी अत्याचार संशोधन कानून में धारा 18-ए और जोड़ी गई है जो कहती है कि इस कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले ना जांच की जरूरत है और ना ही जांच अधिकारी को आरोपी की गिरफ्तारी से पहले किसी की इजाजत लेने की आवश्यकता।

Author: 
नवीन पाल

देश में विभिन्न जातियों के द्वारा स्वयं को पिछड़ा और वंचित साबित करने की एक होड़ सी मची हुई है। जैसे-जैसे आम चुनावों का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे विभिन्न जातियों/समूहों के द्वारा स्वयं को आरक्षित (पिछड़ा) वर्ग में शामिल करने की मांग लगातार तेज होती जा रही है। हरियाणा में जाट आंदोलन, राजस्थान में गुर्जर आंदोलन, गुजरात में पाटीदार आंदोलन और महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन इसका मजमून हैं। उधर, अनुसूचित जातियों और जनजातियों को प्रोन्नति में आरक्षण देने के मुद्दे पर वर्ष 2006 में एम.

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