कानून तथा न्यायपालिका

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत, अज़ादी पोडकास्ट के इस एपिसोड में होस्ट अमित चंद्रा पिछले सप्ताह की बातचीत को आगे बढ़ाते हैं भुवना आनंद और अभिषेक रंजन के साथ। वे सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा किए गए हस्तक्षेपों पर चर्चा करते हैं।

अभिषेक रंजन और अमित चंद्रा ने शिक्षा के विषय पर पिछले दस वर्षो में ज़मीनी स्तर पर काफी काम किया है। भुवना आनंद सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के रिसर्च डिपार्टमेंट की डायरेक्टर हैं।

जीएम टेक्नोलॉजी पूरी दुनिया के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। फिर भी, भारत की सरकारें इस तकनीकि के फायदों को समझने में असफल रही है और किसानों को इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से वंचित रखा है।

आस पास के रेहड़ी पटरी व्यवसायियों के पास आपका आना जाना अवश्य रहता होगा। रेहड़ी पटरी वाले ताजे फल-सब्जियों से लेकर हल्के फुल्क नाश्ते तक की हमारी दिन प्रतिदिन की सारी जरूरतों को पूरी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण अपनी आजीविका को लेकर प्रतिदिन उन्हें कितने जोखिमों का सामना करना पड़ता है?

सितम्बर, 2019 में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति वैंकेया नायडू ने अदालतों में बड़ी तादात में लंबित मामलों के निपटारे के लिए न्यायिक व्यवस्था में बड़े सुधार की बात कहीं। अपने उद्धबोधन में उन्होंने उच्चतम न्यायालय को चार न्यायपीठों (Cassation Court) में विभाजित करने का सुझाव दिया। उपराष्ट्रपति के इस सुझाव से निश्चित ही न्यायप्रणाली में सुधार आयेगा।

विधेयक लोकसभा से जुलाई 2019 में पास होने के बाद राज्यसभा में भेजा गया जहां सांसदों की तीखी बहस के बाद इसे सिलेक्ट कमिटी को स्थानांतरित किया गया है। किराए की कोख यानी सेरोगेसी पर कानून बन जाने के बाद  भारत में वाणिज्यिक सेरोगेसी को अवैधानिक कर दिया जाएगा। भारत में अब सिर्फ परोपकारी सरोगेसी ही मान्य होगी अर्थात आर्थिक लाभ के उद्देश्य से ऐसा किया जाना गैरकानूनी होगा।

संविधान दिवस विशेष

आज 26 नवंबर है। देश के लिए यह दिन अत्यंत ही खास है। वर्ष 1949 में आज ही के दिन संविधान सभा ने स्वयं के संविधान को स्वीकृत किया था। दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 से यह पूरे देश में लागू हो गया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पहल पर वर्ष 1979 से संविधान सभा द्वारा नए संविधान को मंजूरी देने के इस अत्यंत खास दिन को देश में राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाए जाने लगा। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गजट नोटिफिकेशन के द्वारा इस दिन को संविधान दिवस के रूपए में मनाए जाने की पहल की।

कानून या विधि का मतलब है मनुष्य के व्यवहार को नियंत्रित और संचालित करने वाले नियमों, हिदायतों, पाबंदियों और हकों की संहिता। संविधान सम्मत आधार पर संचालित होने वाले उदारतावादी लोकतंत्रों में ‘कानून के शासन’ की धारणा प्रचलित होती है। इन व्यवस्थाओं में कानून के दायरे के बाहर कोई काम नहीं करता, न व्यक्ति और न ही सरकार। इसके पीछे कानून का उदारतावादी सिद्धांत है जिसके अनुसार कानून का उद्देश्य व्यक्ति पर पाबंदियाँ लगाना न हो कर उसकी स्वतंत्रता की गारंटी करना है।

पुराने जमाने में मार्ग से गुजरने का पहला अधिकार ऊंची जाति के लोगों को होता था। नीची जाति के लोग तभी निकल सकते थे जब ऊंची जाति के लोग पहले वहां से गुजर चुके हों। यानि कि यदि दो लोगों को रास्ते से गुजरना हो तो रास्ते से गुजरने का पहला अधिकार ऊंची जाति के व्यक्ति का था उसके बाद ही नीची जाति का व्यक्ति वहां से निकल सकता था। आज के जमाने में शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक लाइट्स होती हैं। ट्रैफिक लाइट्स कास्ट ब्लाइंड होती हैं यानि कि वो जात-पात को नहीं देखतीं हैं। आपकी जाति ऊंची हो या नीची हो, रेड लाइट पर सबको रूकना होता है और ग्रीन लाइट होने पर सबको न

रेहड़ी-पटरी और थड़ी ठेला लगाकर अपनी व अपने परिवार के लिए परिश्रम से रोजी रोटी कमाने वाले पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) के अधिकारों की रक्षा के लिए वर्ष 2014 में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट पास किया गया था। लेकिन कानून पास होने के पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद दूर दराज के ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी रेहड़ी पटरी व्यवसायियों का उत्पीड़न लगातार जारी है। स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के अनुसार शहर के प्रत्येक वार्ड को एक टाऊन वेंडिंग कमेटी गठित करनी होगी जिसके 40% सदस्य स्वयं पटरी व्यवसायी होंगे। यह कमेटी उस वार्ड में रेहड़ी पटरी लगाने वालों

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