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क्या आपको पता हैः एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 के मुताबिक देश में पतंग और गुब्बारे बनाने, मरम्मत करने और उड़ाने के लिए लाइसेंस का होना अनिवार्य है। ये लाइसेंस ठीक वैसे हैं जैसे एयरक्राफ्ट को उड़ाने के लिए पायलट व उसके मरम्मत करने के लिए विशेषज्ञता वाले लाइसेंस की जरूरत होती है। निर्धारित लाइसेंस के बगैर पतंग अथवा गुब्बारे उड़ाने पर कम से कम 2 वर्ष की कैद और 10 लाख रूपए के जुर्माने का प्रावधान है। इस प्रकार, सभी देशवासी जाने-अनजाने कानून तोड़ने के अपराधी बन रहे हैं। आइए, इस अनुपयोगी कानून के समापन के लिए मिलकर आवाज उठाएं..

इस वीडियो के माध्यम से सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट पार्थ जे.शाह बता रहे हैं कि भारत के लिए मिल्टन फ्रीडमैन के क्या मायने हैं? और किस प्रकार मिल्टन फ्रीडमैन के विचार आज भी हमारे लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने की दशकों पूर्व..
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मामा मेहुल चौकसी और भांजे नीरव मोदी की जोड़ी ने देश के सरकारी बैंकिंग सिस्टम की जड़ें हिला दी हैं। 11,600 करोड़ से ज्यादा का ये घोटाला आजकल देश में हर किसी की जुबान पर है। कोई इसे चटखारे लेकर बयान कर रहा है तो किसी ने इसे अपनी राजनीति चमकाने का हथियार बना लिया है। हैरत ये है कि कैसे फर्जी गारंटियों के दम पर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंकिग सिस्टम को भेद नीरव मोदी चूना लगाकर फरार हो गया। अपने आपको गर्व से देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक कहने वाला पंजाब नेशनल बैंक अब खिसयाए अंदाज में सफाई दे रहा है। पर क्या ये मुमकिन है कि आज हो रही है

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नवीन पाल
गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की स्कूल परिसर में हुई हत्या और शुरूआती जांच में स्कूल बस कंडक्टर का नाम सामने आने के बाद से जिस प्रकार गैरशैक्षणिक कर्मचारियों विशेषकर ड्राइवरों और कंडक्टरों के साथ सुरक्षा के नाम पर दोयम व्यवहार किया जाने लगा उससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है..

1.3 बिलियन आबादी के साथ भारत की समस्या भी काफी बडी है, यहाँ 1 बिलियन लोग प्रतिदिन 2 डॉलर्स से कम कमाते हैं, 30 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, नवजात मृत्यु दर प्रति 1000 बच्चोँ के जन्म पर 45 है और मातृत्व मृत्यु दर 1,00,000 जन्म पर 175 है।इन सारी समस्याओँ का समाधान सिर्फ सरकार ही कर सकती है जो कुल जीडीपी का 18% टैक्स के रूप में वसूल करती है। राज्य और केंद्र द्वारा हर साल 40 लाख करोड रुपये खर्च किया जाता है। सरकार के पास प्रमुख समस्याओँ के समाधान हेतु पर्याप्त संसाधन हैं लेकिन खर्चँ के प्रभावी सिस्टम के अभाव, सरकारी खर्चोँ की उत्पादकता में कम

पिछ्ले हफ्ते आई एक न्यूज रिपोर्ट ने काफी खलबली मचा दी थी, जिसमेँ नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा था कि स्कूल, कॉलेज और जेलोँ को निजी क्षेत्र के हवाले कर देना चाहिए। जैसा कि पहले से पता था, उनके इस वक्तव्य पर बवाल तो मचना ही था, अधिकतर लोग इस क्षेत्रोँ के निजीकरण की बात सुनकर नाराज हुए, परिणाम्स्वरूप कांत को यह स्पष्ट करना पड़ा कि वह सिर्फ स्कूलोँ के भौतिक संसाधनो में निजी क्षेत्र की भागीदारी की बात कर रहे थे।

चक्रवर्ती राजागोपालाचारी (राजाजी) द्वारा सन् 1959 में स्थापित स्वतंत्र पार्टी राष्ट्रीय स्तर की उदारवादी पार्टी थी। पार्टी ने कांग्रेस सरकार की समाजवादी नीतियों को पुरजोर विरोध किया था। पार्टी बाजार आधारित अर्थव्यवस्था की पक्षधर थी और लाइसेंस राज के समापन की वकालत करती थी। स्वतंत्र पार्टी का उदय; इस मद्देनज़र अभूतपूर्व था क्योंकि यह एकमात्र सांगठनिक प्रतिष्ठान था जो व्यवस्था पर प्रश्न उठाता था और सर्वशक्तिशाली तकनीकि राज्य के विचार से स्पष्ट रूप से असहमति जताता था। 1962 के पहले आम चुनावों के दौरान पार्टी ने 18 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की और

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नौकरी में आरक्षण की व्यवस्था को रोकने के लिए उच्च स्तर के साहस और शासन कला की आवश्कता होगी। यह एक ऐसे देश के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर दर्ज होगा जहां श्रेष्ठ किस्म की संवैधानिक व्यवस्था के तहत तीसरी श्रेणी (घटिया किस्म) के लोकतंत्र को चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है। - नानी पालकीवाला
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क्या आपको पता है? मकर संक्रांति, गणतंत्र दिवस अथवा स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने के ऐवज में आपको 10 लाख का जुर्माना अथवा 2 वर्ष का कारावास अथवा दोनों हो सकता है। एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 के तहत पतंग बनाने, उड़ाने, कटने-फटने पर मरम्मत करने यहां तक कि बैलून उड़ाने के लिए भी आपके पास लाइसेंस होना जरूरी है। ठीक वैसे ही जैसे कि प्लेन उड़ाने के लिए पायलटों को लाइसेंस की जरूरत होती है..
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मैं पैरेंट नहीं हूँ, लेकिन मेरे पैरेंट्स ने यह सुनिश्चित किया कि मेरे साथ गलत न हो!
मैं पैरेंट नहीं हूँ,
न अभी,
और न ही इससे पहले कभी!
यह एक विनती है, अथवा एक उम्मीद भी!
और सम्भतः अंतिम नहीं है.....
मैं भी एक बच्चा रह चुका हूँ, अपेक्षाकृत निश्चिंत बच्चा,
परेशानी क्या होती कभी नहीं जाना!

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