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फ्रेडरिक बास्तियात ने 168 वर्ष पूर्व ही कानून के लिए तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कर्तव्यों के बारे में बताया था; एक निजता के अधिकार की रक्षा, स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा और संपत्ति के अधिकार की रक्षा लेकिन वर्तमान में कानून इन तीन अति महत्वपूर्ण कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रीत नहीं करता है

भारत में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ से आने वाले “कोटेड पेपर” पर नई एंटी-डंपिंग जाँच शुरू होने के बारे में बातें चल रही हैं। दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया को इस जाँच से छूट दी गई है। दरअस्ल, ये देश ही ज़ीरो कस्टम ड्यूटी स्टेटस के चलते भारत में सस्ते आयात के लिए ज़िम्मेदार हैं, जैसा कि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज़ लि.

सेंटर फार सिविल सोसायटी व एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप। सुरम्य वातावरण व खूबसूरत वादियों में ipolicy वर्कशॉप कराने की परंपरा को जारी रखते हुए इस वर्ष उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट को चुना गया है। जिम कॉर्बेट के स्टर्लिंग रिसॉर्ट में 20 से 22 अप्रैल 2018 तक चलने वाले ipolicy वर्कशॉप के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गयी है। वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2018 है।

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सेंटर फार सिविल सोसायटी व एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप। सुरम्य वातावरण व खूबसूरत वादियों में ipolicy वर्कशॉप कराने की परंपरा को जारी रखते हुए इस वर्ष उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट को चुना गया है। जिम कॉर्बेट के स्टर्लिंग रिसॉर्ट में 20 से 22 अप्रैल 2018 तक चलने वाले ipolicy वर्कशॉप के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गयी है। वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख  बढ़ा कर 6 अप्रैल कर दी गई है। तीन दिनों (दो रातें व तीन दिनों

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- 20-22 अप्रैल 2018 तक उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट में चलेगा वर्कशॉप
- पब्लिक पॉलिसी पर आधारित वर्कशॉप में शामिल होने के लिए 31 मार्च तक किया जा सकेगा आवेदन

चक्रवर्ती राजागोपालाचारी उर्फ राजाजी (10 दिसंबर 1878 - 25 दिसंबर 1972) गांधी जी के सच्चे अनुयायी थे। वे प्रखर विद्वान, अधिवक्ता, विचारक और राजनीतिज्ञ थे। राजाजी ने मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से 1897 में कानून की पढ़ाई (स्नातक) पूरी करने के बाद वे 1906 में वे इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुए। रॉलेट एक्ट का विरोध और असहयोग आंदोलन जैसे आंदोलनों में वे प्रमुखता से सक्रिय रहे। सूबे के किसानों को कर्ज के बोझ से राहत दिलाने के लिए उन्होंने मद्रास सूबे के प्रधान के तौर पर उन्होंने 1938 में कृषि कर्ज राहत कोष की व्यवस्था की। सबकी भागीदारी और समावे

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फ्रेंच लेखक, पत्रकार, अर्थशास्त्री व चिंतक फ्रेडरिक बास्तियात द्वारा 168 वर्ष पहले लिखी गयी पुस्तक 'द लॉ' आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है। यही कारण है कि इस पुस्तक को समय समय पर विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाता रहा है। अब यह पुस्तक हिंदी में भी उपलब्ध है। 20 जनवरी 2018 को इसका विमोचन कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में किया गया। पुस्तक को http://bit.ly/2Ek3b1W से फ्री डाउनलोड किया जा सकता है..
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“एपीजे अब्दुल कलाम की नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर” देने के लिए द टाइम्स ऑफ इंडिया ने 400 छात्रोँ के लिए स्कॉलरशिप की शुरुआत की है ताकि उन्हे बेहतरीन शिक्षा हासिल हो सके। यह एक सराहनीय कदम है, लेकिन देश की बढ़ती आबादी और शिक्षा प्राप्त करने के उम्मीदवार छात्रोँ को संख्या की तुलना में यह बेहद कम है। यहाँ यह कहना भी जरूरी है कि हमारे देश की आने वाली युवा पीढ़ी अच्छी शिक्षा हासिल करने और अपनी क्षमताओँ के अनुकूल अवसर पाने हेतु धर्मार्थ पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

पंजाब नेशनल बैंक के मुताबिक नीरव मोदी महाफ्रॉड की रकम 11 हजार चार करोड़ से 1300 करोड़ रूपये और ज्यादा हो सकती है। यानी कुल 12 हजार सात करोड़ का चूना बैंक या सरकार को लग चुका है। इस फ्रॉड के बाद लोगों की जुबान पर बड़ा सवाल यह है कि सरकार हर वो काम क्यों करती है जिससे टैक्स के रूप में वसूली गई लोगों की खून पसीने की कमाई पानी में बह जाए। सरकार का काम देश चलाना है, विदेश नीति और रक्षा मामलों पर ध्यान देना है। बैंक चलाने के लिए प्राइवेट संस्थाएं है जो पहले से ही बैंकों को चला रही है। सरकार प्राइवेट बैंकों पर सेवा शर्तों के लिए निगरानी रख सकती है ज

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नवीन पाल

वैज्ञानिक तौर पर यह सिद्ध हो चुका है कि बांस, पेड़ नहीं बल्कि घांस की एक प्रजाति है। भारत दुनिया में बांस का सबसे बड़ा उत्पादक देश है इसके बावजूद अगरबत्ती की तीलियों सहित बांस से बनने वाले अन्य उत्पादों के निर्माण के भारत दुनिया में सबसे अधिक बांस का आयात भी करता है। कारण यह कि बांस के पेड़ के रूप में वर्गीकृत होने के कारण इसके काटने पर रोक है। बांस के उत्पादन और इसे काटने की अनुमति मिल जाने पर बड़ी आबादी बेरोजगारी के जंजाल से मुक्त हो सकती है। साथ ही इससे अर्थव्यवस्था में लगभग 1000 करोड़ रूपए का योगदान हो सकता है..। हाल ही में प्रधानमंत्री न

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