अन्य

दिल्ली में कम फीस वाले 3 हजार बजट प्राइवेट स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले के कारण 10 लाख बच्चों और उनमें पढ़ाने वाले 30 हजार अध्यापकों का भविष्य अधर में लटक गया है। विशेष बात यह है कि निर्विवादित तौर पर इन स्कूलों की गुणवत्ता सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता की तुलना में बेहतर है वह भी बेहद की कम खर्च पर.. - वीडियो साभारः आजतक

कहते है आईटी और आईआइएम में दाखिला लेना आसान है बनिस्पत अच्छे नर्सरी स्कूलों के। क्योंकि आईआईटी और आईआईएम में दाखिले के लिए इम्तिहान छात्र देते है और निजी स्कूलों में उनके अभिभावक। किस्मत और आपकी जेब इसका फैसला करतीहै कि आपका बच्चा फलां स्कूल में जाने लायक है भी या नही। कितने सूटकेस में पैसा और सिफारिशी पत्र आपने सलंग्न किये है दाखिला इसपर निर्भर करता है। इतने जतन प्रयत्न के बाद अगर दाखिल मिल जाये तो अभिभावक की स्थिति एक बंधक की भांति हो जाती है जो स्कूलो के सही गलत सब नियम मानने को मजबूर हो जाते हैं। हर साल कितनी फीस बढ़ेगी, किताबे कहाँ से आएं

सीमापार से खबर अच्छी आई है। बांग्लादेश सरकार ने देश में सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 11 अप्रैल को संसद में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को खत्म करने का ऐलान किया । बांग्लादेश में आरक्षण नीति के खिलाफ हजारों छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ढाका यूनिवर्सिटी से आरक्षण व्यवस्था को लेकर आंदोलन शुरू हुआ और धीरे धीरे पूरे बांग्लादेश में फैल गया। प्रदर्शकारियों का पुलिस से टकराव भी हुआ जिसमें 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। सरकार को छात्रों की मांगों के आगे झुकना पड़ा और आरक्ष

Author: 
नवीन पाल

मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का गोपाल कृष्ण गोखले की कोशिश को भले ही ब्रिटिश विधान परिषद ने 18 मार्च 1910 को खारिज कर दिया, लेकिन इसके ठीक 99 साल बाद इतिहास बदला गया। आजाद भारत की संसद ने शिक्षा के अधिकार को संवैधानिक दर्जा देकर स्वतंत्रता सेनानियों के सपने को तो पूरा किया ही, भारतीय भविष्य को बेहतर मानव संसाधन के तौर पर विकसित करने की दिशा में नई राह ही खोल दी। जैसा कि अक्सर होता है, कानूनों के अपने पेंच और प्रावधान भी कई बार अपने मूल उद्देश्यों की राह में रोड़े बनने लगते हैं, शिक्षा का अधिकार कानून भी इसी राह पर चल पड़ा है। इसका असर यह हुआ है क

मौजूदा समय में भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में नीतियां बनाने, नियमन (रेग्युलेशन) करने और सेवा प्रदान (सर्विस डिलिवरी) करने जैसे सारे सरकारी कामों की जिम्मेदारी एक ही संस्था के जिम्मे है। हालांकि, जरूरत इन सारे कामों को तीन अलग अलग हिस्सों में बांटने की है और इन तीनोँ के बीच संबंधों में वैसी ही स्पष्ट दूरी होनी चाहिए जैसे कि वित्त, टेलीकॉम और विद्युत क्षेत्र में है। ऐसा करने से नीति निर्धारण और नियमन दोनों के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त क्षमता बढ़ेगी जो कि फिलहाल सेवा प्रदान करने की जिम्मेदारी के कारण अवरुद्ध हो जाती है। जिम्मेदारियों को

हमारे जीवन में कानून की क्या और कितनी आवश्यकता है? कानून का असल काम क्या है और कानून दरअसल क्या कर रहा है, इस विषय पर फ्रेंच विचारक बास्तियात के विचारों पर अपनी राय प्रकट कर रहे हैं श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाऊंडेशन के रिसर्च फेलो शिवानंद द्विवेदी..

गुजरात विधानसभा में 14 मार्च को बजट सत्र के दौरान हुई एक शर्मनाक हरकत ने पूरे देश का ध्यान खींचा। कांग्रेस और बीजेपी के विधायकों में जमकर हाथापाई हुई। कांग्रेस विधायक प्रताप दुधार्क ने बीजेपी के जगदीश पंचाल को सदन में थप्पड़ मार दिया। इसके जवाब में बीजेपी के विधायकों ने कांग्रेस के विधायक अमरीष डेर की पिटाई कर दी। दरअसल सदन के भीतर रेप आरोपी आसाराम पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक इस पर सत्तापक्ष से अतिरिक्त सवाल पूछना चाह रहे थे लेकिन बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया। इस बीच प्रश्नकाल समाप्त हो गया तो कांग्रेस विधायक आपा खो बै

फ्रेडरिक बास्तियात ने 168 वर्ष पूर्व ही कानून के लिए तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कर्तव्यों के बारे में बताया था; एक निजता के अधिकार की रक्षा, स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा और संपत्ति के अधिकार की रक्षा लेकिन वर्तमान में कानून इन तीन अति महत्वपूर्ण कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रीत नहीं करता है

भारत में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ से आने वाले “कोटेड पेपर” पर नई एंटी-डंपिंग जाँच शुरू होने के बारे में बातें चल रही हैं। दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया को इस जाँच से छूट दी गई है। दरअस्ल, ये देश ही ज़ीरो कस्टम ड्यूटी स्टेटस के चलते भारत में सस्ते आयात के लिए ज़िम्मेदार हैं, जैसा कि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज़ लि.

सेंटर फार सिविल सोसायटी व एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप। सुरम्य वातावरण व खूबसूरत वादियों में ipolicy वर्कशॉप कराने की परंपरा को जारी रखते हुए इस वर्ष उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट को चुना गया है। जिम कॉर्बेट के स्टर्लिंग रिसॉर्ट में 20 से 22 अप्रैल 2018 तक चलने वाले ipolicy वर्कशॉप के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गयी है। वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2018 है।

Category: 

Pages