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मशहूर लेखक गुरचरण दास यहाँ कह रहे हैं कि 1947 में हमें सिर्फ वोट देने की और नेता चुनने की आज़ादी मिली पर सन 1991 में ही हमें आर्थिक आज़ादी मिल पायी. इस बीच 40 सालों में हमें सरकार ने लाइसेंस राज में गिरफ्तार कर के रखा.

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बदलाव की राह दिखाते कुछ मंत्री - Read complete article...

Author: 
गुरचरण दास

जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारत-अमेरिका परमाणु करार को आगे बढ़ाने की बात की तो कई विश्लेषकों को यह लगा कि बुश अमेरिकी परमाणु उपकरण निर्माताओं के लिए कई अरब डॉलर के ऑर्डर का रास्ता साफ करने में जुटे हैं। कई भारतीय वैज्ञानिकों ने इस करार का विरोध इसलिए किया था क्योंकि उन्हें डर था कि इससे घरेलू परमाणु ऊर्जा संयंत्र में अमेरिकी दखल बढ़ेगा।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

आजादी के आंदोलन के दौरान हमारे नेताओं ने भारत की गरीबी के लिए औपनिवेशिक शोषण को खूब कोसा था। ब्रिटिश लोगों के आने से पहले भारत की गिनती दुनिया की शीर्ष उद्योग और कारोबारी महाशक्तियों में की जाती थी। जब ब्रिटिश गए तो भारत गरीब होकर, तुलनात्मक रूप से और भी पिछड़ गया था। भारतीयों ने इसका दोष ब्रिटेन के माथे मढ़ दिया था और इस बात को लेकर वे आश्वस्त थे कि औपनिवेशिक सत्ता खत्म होने के बाद भारत फिर अमीर बन जाएगा।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

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