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"पॉलिसी टॉक' के इस एपिसोड में सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के सीईओ यतीश राजावत मुखातिब हैं राजस्थान सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से। जानें क्या है, कोरोना काल में सभी बच्चों तक स्कूली शिक्षा पहुंचाने, इंटरनेट और स्मार्टफोन तक पहुंच से वंचित छात्रों को शिक्षा से जोड़े रखने, स्कूलों की फीस माफी, आरटीई के तहत मुफ्त शिक्षा और निजी स्कूलों की प्रतिपूर्ति जैसे मुद्दे पर मंत्री डोटासरा की राय? - आजादी.मी
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फ्रेडरिक बास्तियात का जन्म 30 जून 1801 में बेयोन में हुआ था। उनका परिवार एक छोटे से कस्बे मुग्रोन से ताल्लुक रखता था, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा गुजारा और जहां पर उनकी एक प्रतिमा भी स्थापित है। मुग्रोन, बेयोन के उत्तर-पूर्व में एक फ्रांसीसी हिस्से 'लेस लेंडेस' (Les Landes) में स्थित है। उन्होंने अपनी जिंदगी का बाद का हिस्सा पेरिस में 'लेस जर्नल डेस इकानॉमिस्तेस' (Le Journal des Economistes) के संपादक और 1848 में संसद सदस्य के तौर पर गुजारा।

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कोरोना वायरस संक्रमण के विस्फोट जैसी स्थिति को रोकने के उद्देश्य से 12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाऊन 4.0 की घोषणा की। इसके पूर्व पूरा देश लगभग दो महीने तक संपूर्ण लॉकडाऊन की स्थिति में रहा और इस दौरान सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियां ठप्प रहीं। सिर्फ ऐसे सेक्टर ही थोड़े बहुत सक्रिय रहें जिनमें वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की संभावनाएं थी। जैसी कि उम्मीद थी, देश में हुई अभूतपूर्व बंदी का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा जिससे उबारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी पड़ी। इसे नाम दिया गया

कोरोना संकट से लड़ने में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है और इससे हमें क्या सबक लेने चाहिए? 

चीनी जब ‘क्राइसिस’ (संकट) शब्द लिखते हैं तो दो ब्रशस्ट्रोक्स इस्तेमाल करते हैं। एक का मतलब है डर, दूसरे क अवसर। कुछ देश डर से भर जाते हैं, कुछ खुद को बेहतर बनाने के रास्ते तलाशते हैं। कोरोना ने हमारे देश की क्षमता की परीक्षा ली है। इसमें भारत का प्रदर्शन कैसा रहा और हमने अबतक क्या सीखा है?

Author: 
गुरचरण दास

कुछ महीने पूर्व दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रांगण में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से एक बार फिर मिलना हुआ। कैलाश जी ने बंधुआ बाल मजदूरों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है। मुलाकात के दौरान नन्हें मुन्ने बच्चों को अमानवीय व खतरनाक परिस्थितियों में बंधुआ मजदूरी कराने की कई भयावह और रौंगटे खड़ी कर देने वाली घटनाओं का विवरण उनसे सुन चुका हूं। उन्होंने बंधुआ मजदूरों के रेस्क्यू की कुछ घटनाओं से संबंधित लघु फिल्में भी दिखाई हैं। फ़ैक्टरी और कारखानों के संचालकों द्वारा बच्चों को तमाम प्रकार की यातना

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1 और 2 अगस्त 1959 को मुंबई में हुए स्वतंत्र पार्टी के तैयारी सम्मेलन में इस 21 सूत्री कार्यक्रम को स्वीकार किया गया

यह लेख उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा के एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री में दिए गए भाषण के समर्थन में  12 मई, 1975 को लिखा गया है। इसमें निजी उद्योग के अस्तित्व पर गहराते संकट को लेकर चेतावनी दी गई है…

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कोरोना महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था को लगे तगड़े झटके से उबारने के प्रयास के तहत वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण सुधार की तमाम घोषणाएं कर रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने कृषि क्षेत्र में सुधार की भी कई घोषणाएं की हैं। इन सुधारों में किसानों को अपने उत्पाद अपने मर्जी की कीमत पर देश में कहीं भी बेचने की आजादी और एपीएमसी ऐक्ट के प्रावधानों से मुक्त करने घोषणाएं मुख्य हैं। 

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