नकद सब्सिडी होगी एक अच्छी शुरुआत

विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकणि की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रत्यक्ष सब्सिडी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है. और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रत्यक्ष सब्सिडी पर एक रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा भी है कि रसोई गैस, खाद और मिट्टी के तेल पर प्रत्यक्ष सब्सिडी देकर वर्तमान सब्सिडी व्यवस्था की खामियों से निजात पाया जा सकता है.

वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2011-12 का बजट पेश करते हुए कहा था कि लागत दक्षता और केरोसिन तथा उर्वरक के लिए बेहतर डिलीवरी के लिए सरकार धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को सीधे नकद सब्सिडी स्थानांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी. नीलेकणि की अध्यक्षता में एक कार्य समिति केरोसिन, एलपीजी और उर्वरकों के लिए सीधे सब्सिडी देने की प्रस्तावित प्रणाली के तौर-तरीकों पर काम कर रहा था और हाल ही मे उस ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी है. समिति ने प्रयोग के तौर पर प्रत्यक्ष सब्सिडी व्यवस्था को सात राज्यों-महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा, असम, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में लागू करने का सुझाव दिया है.

सरकार छह माह के बाद गरीबों को कैश यानी नकद सब्सिडी देने की शुरुआत कर सकती है. अभी तक सरकार उर्वरक, मिट्टी के तेल और रसोई गैस जैसी कुछ चीजों की कीमतें कम रखने के लिए उन पर सब्सिडी देती है. लेकिन सब्सिडी की यह रकम सामान बनाने वाली या उसे बेचने वाली कंपनी को दी जाती है। अब सरकार सोच रही है कि यह रकम सीधे गरीबों को ही दे दी जाए, ताकि वे महंगी चीज बाजार से खुद ही खरीद सकें.

कैश सब्सिडी की योजना के तहत जो लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं, उनके बैंक खातों में एटीएम और मोबाइल बैंकिंग के जरिये सब्सिडी की जगह नकद पैसा सीधे भेजा जाएगा. सरकार हर साल ईंधन तथा उर्वरक सब्सिडी के रूप में 73,637 करोड़ रुपए खर्च करती है, पर इस राशि का एक बड़ा हिस्सा सही लोगो तक नहीं पहुंच पाता है। सरकार ने कैश सब्सिडी को सीधे विशेष पहचान पत्र यानी यूआईडी से जोड़ने का ऐलान किया है. उसका मानना है कि यूआईडी कार्ड अगर गरीब को मिल जाता है तो उसकी सब्सिडी कोई और छीन नहीं सकता। इससे सब्सिडी वितरण पर नजर रखना आसान हो जाएगा. सरकार के पास पूरा डाटा रहेगा कि किस व्यक्ति को कितनी सब्सिडी दी गई.

सीधे सब्सिडी देने की योजना राशन दुकानों की स्थिति को बेहतर बनाए बगैर पूरी नहीं हो सकती है। देश में 4.99 लाख पीडीएस दुकानें हैं. इनके जरिये गेहूं, चावल, चीनी, केरोसीन मुख्य तौर पर वितरित किए जाते हैं. इस वितरण व्यवस्था में कई तरह की खामियां हैं. हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लक्षित समूह तक पूरा फायदा नहीं पहुंच पाता. दूसरी तरफ ईंधन सब्सिडी के सीधे स्थानांतरण की सफलता राज्यों पर निर्भर करती है, क्योंकि यह वितरण उन्हें ही करना है. पूर्ण वित्तीय समावेशन हासिल करना सब्सिडी के सीधे स्थानांतरण के लिए काफी महत्वपूर्ण है. जरूरी नीतिगत परिवर्तनों के जरिए सब्सिडी का सीधा भुगतान किए जाने से आपूर्ति श्रृंखला की खामियों पर रोक लगेगी तथा इसके कई लाभ सामने आएंगे, साथ ही समूची योजना को और अधिक सक्षम बनाया जा सकेगा.

- स्निग्धा द्विवेदी