बजट प्राइवेट स्कूलो के फायदे

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि गरीबों के लिए अनुदान सहायता (डॉनर एड) के रूप में लोक शिक्षा पर अरबों-खरबों डॉलर और अधिक खर्च करने की जरूरत है। लेकिन यह इस सच्चाई को नजरंदाज करता है कि गरीब अभिभावक सरकारी स्कूलों को छोड़ कर अपने बच्चों को बजट प्राइवेट स्कूलों में भेज रहे हैं। ये बजट प्राइवेट स्कूल बहुत कम शुल्क लेते हैं, जो दिहाड़ी पर काम करने वाले अत्यधिक गरीब अभिभावकों द्वारा आसानी से वहन किया जा सकता है।

हालिया रीसर्च में पाया गया कि भारत एवं अफ्रीकी उप-सहारा क्षेत्र के कुछ खास शहरी एवं सीमांत शहरी क्षेत्रों में अधिकांश स्कूली बच्चे निजी स्कूलों में जाते हैं, जबकि ग्रामीण भारत में आधे स्कूली बच्चे निजी स्कूलों में दाखिल हैं। चीन के गरीब गाँवों में भी बड़ी संख्या में निजी विद्यालय चल रहे हैं, जिनकी सरकार को भनक तक नहीं है। शोध से पता चलता है कि गरीबों के लिए चलने वाले निजी विद्यालयों का शिक्षा-स्तर सरकारी स्कूलों से बेहतर है। शिक्षक अधिक समर्पित हैं। महत्तवपूर्ण अध्ययन सामग्रियों के प्रावधान बेहतर हैं तथा समान पृष्ठभूमि वाले बच्चों में भी निजी विद्यालयों के बच्चों का शिक्षा परिणाम बेहतर है। और इन निजी विद्यालयों में यह सब सरकारी स्कूलों में होने वाले प्रति-छात्र शिक्षक लागत के अंश मात्र में होता है।

विकासकर्मियों के लिए गरीबों की सहायता करने का एक तरीका यह है कि वे लक्षित वाउचर द्वारा निजी स्कूलों में गरीब विद्यार्थियों की पहुँच बढ़ाएँ। फिर भी यह तथ्य कि बजट प्राइवेट स्कूल एक व्यवसाय है, इसमें अच्छा-खासा मुनाफा निकल सकता है, अर्थात् यह अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू निवेशकों को एक नया सृजन क्षेत्र प्रदान करता है, क्योंकि प्रतियोगितापूर्ण बाजार में काम करने वाले शिक्षा उद्यमी स्कूल सुधार हेतु निवेशकों के धन के लिए लालायित हैं। अत: निवेशकों के लिए भी इस प्रक्रिया में भाग लेने की गुंजाइश है और उसके तीन संभावित रास्ते तलाशे गये हैं। माइक्रोफाइनैंस किस्म के ऋण का प्रावधान कर बजट प्राइवेट स्कूलों की मूलभूत संरचना में सुधार लाया जा सकता है। बेहतर पाठयक्रम एवं अध्यापन तकनीक में निवेश के ऐसे अवसरों की खोज की जा सकती है, जिसे व्यावसायिक आधार पर चलाया जा सके। अंतत: बजट प्राइवेट स्कूलों के ब्रांड में निवेश करने, एक समर्पित शैक्षिक निवेश फंड द्वारा या शिक्षा उद्यमियों के साथ संयुक्त उद्यम द्वारा, से गरीब अभिभावकों की सूचना समस्या के समाधान का रास्ता निकल सकता है, यही नहीं, उनके बच्चों के शिक्षा अवसरों में भी सुधार आ सकता है।

- जेम्स टूली