स्निग्धा द्विवेदी's blog

भोपाल में सूचना का अधिकार कनून (आरटीआई) कार्यकर्ता व अन्ना हजारे की समर्थक शेहला मसूद की हाल मे गोली मारकर हत्या कर दी गई. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस प्रकरण में उन लोगों का हाथ हो सकता है, जिनके बारे में वह आरटीआई के तहत सरकार से जानकारियां निकाल रही थीं.

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भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपल बिल के लिए प्रदर्शन कर रही अन्ना हजारे और उन की टीम ने जैसे ही सरकार के साथ रामलीला मैदान में अनशन करने संबंधी समझौता होने की घोषणा की, वैसे ही मैदान में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गयी हैं. तिहाड़ जेल में दो रात गुजारने के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में समाजिक कार्यकर्ता हजारे को एक पखवाड़े के लिए अनशन करने की अनुमति दे दी गयी है. हजारे कल रामलीला मैदान पहुंचेंगे.

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राजधानी दिल्ली में भी रविवार को यौन हिंसा के खिलाफ चल रहे वैश्विक प्रतिरोध कार्यक्रम के तहत ‘स्लट वॉक’ यानी बेशर्मी मोर्चे का आयोजन किया गया. विभिन्न आयु वर्ग से जुड़े लोगों ने जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन में भाग लिया और महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार या यौन उत्पीड़न को उनके कपड़े पहनने के सलीके से जोड़े जाने का विरोध किया. सैक़ड़ों की संख्या में महिलाएं हाथों में "सोच बदल, कप़ड़े नहीं", "मेरी छोटी स्कर्ट का तुमसे कोई लेना-देना नहीं है" जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर रोष जता रही थीं। तख्तियों पर लिखे स्लोगन के साथ नारे लगाते हुए जंतर मंतर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने ढोल, ड्रम व ढपली की थाप पर महिलाओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया। इस "स्लटवॉक" में इंग्लैंड, जर्मनी, बांग्लादेश समेत कई देशों की महिलाएं भी शामिल हुईं।

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26/11 के भयानक आतंकी हमले के बाद मुंबई एक बार फिर आतंकी धमाको से हिल गयी. पिछली 13 जुलाई को दादर कबूतरख़ाना, ओपेरा हाउस और झावेरी बाज़ार में हुए धमाकों में लगभग बीस लोग मारे गए और अनेक घायल हुए. पिछ्ले कुछ समय से ऐसा लग रहा था कि अब हम ने आतंक पर काबू पा लिया है पर इन धमाकों ने एक बार फिर हमारे हौसलों को परास्त कर दिया है और सरकार तथा प्रशासन के सामने सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.

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विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकणि की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रत्यक्ष सब्सिडी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है. और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रत्यक्ष सब्सिडी पर एक रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा भी है कि रसोई गैस, खाद और मिट्टी के तेल पर प्रत्यक्ष सब्सिडी देकर वर्तमान सब्सिडी व्यवस्था की खामियों से निजात पाया जा सकता है.

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केरल के पद्मनाभन मंदिर में मिली अकूत सम्पदा की चर्चा आजकल सबकी जुबान पर है. राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित पद्मनाभन स्वामी मंदिर में एक लाख करोड़ से ज्यादा का खज़ाना मिला है। 16वीं सदी के इस मंदिर के भूमिगत तहखानों से अरबों रुपए के हीरे, सोना और चांदी बरामद हुई है. मंदिर के चार में से दो तहखानों को पिछले 130 वर्षों से खोला नहीं गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक सात-सदस्यी समिति को इनमें मौजूद चीज़ों का आकलन करने का आदेश दिया गया था. त्रावणकोर के सभी शासकों ने पद्मनाभ-दासन अर्थात पद्मनाभ के दास के रूप में शासन किया। भारत की स्वतंत्रता के बाद त्रावणकोर राजघराने के लोग के नेतृत्व में एक ट्रस्ट मंदिर का कामकाज देखता है.

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मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह देश के हरेक बच्चे को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए। लेकिन क्या शिक्षा पाने के लिए बच्चों को सरकारी स्कूल की शरण में जाना जरूरी है? क्या शिक्षा मुहैया कराने में यह बात ज्यादा अहमियत रखती है कि स्कूल सरकारी हैं या निजी? सरकार शिक्षा मुहैया कराने की गारंटी भले ही देती है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि ऐसा सरकारी स्कूल के जरिये ही हो। कई लोग सोचते हैं कि स्कूल का निर्माण, नियंत्रण और संचालन सरकार करे, लेकिन ऐसा सोचना दुखद है।

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कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा का एक छोटा सा गांव भट्टा परसौल तमाम न्यूज चैनलों पर छाया रहा। फिल्म पीपली लाइव के पीपली गांव की तरह यहां मीडिया का जमावड़ा था। भट्टा परसौल में भी वहीं देखने को मिल रहा था जो हमने फिल्म में देखा था। फिल्म की ही तरह भट्टा परसौल के केन्द्र में भी किसान की दशा थी। पीपली लाइव और भट्टा परसौल दोनो के ही केन्द्र में सरकारी योजनाओं और नीतियों से त्रस्त, बेहाल और लाचार किसान था और है।

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इस साल मानसून के अच्छे होने का अनुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया गया है लेकिन इससे खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति नहीं घटने वाली.
अहम सवाल खाद्य पदार्थों के उत्पादन और वितरण को लेकर सरकारी नीतियों का है. सही नीतियों के अभाव और कुप्रबंधन ने देश को खाद्यान्न संकट के कगार पर ला खड़ा किया है. इसके लिए पूर्ववर्ती एनडीए और मौजूदा यूपीए, दोनों सरकारें दोषी हैं. अनाजों व दालों की जितनी मांग है उस अनुपात में आपूर्ति घटती जा रही है. मुद्रास्फीति का पारा रिजर्व बैंक की कोशिशों के बाद भी खास नीचे नहीं आ रहा. खाद्यान्न उत्पादन इतना घटा है कि अनाज की कीमत में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत से अधिक का इजाफा देखा जा रहा है.

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पिछले हफ्ते आए चुनाव नतीजों में ममता बैनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन को 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 226 सीटें हासिल हुईं और इस जीत के साथ ही 34 साल से चला आ रहा लेफ्ट का शासन खत्म हो गया। वामपंथी दलों ने अपनी हार स्वीकार करते हुए विपक्ष की सकारात्मक भूमिका निभाने की बात कही तो वहीं ममता ने इसे लोकतंत्र और बंगाल की जनता की जीत बताया है.

पश्चिम बंगाल में बदलाव के लिए अब तक चले संघर्ष में शहीद हुए कार्यकर्ताओं को यह जीत समर्पित करते ममता ने विश्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया और कहा कि यह जीत मां, माटी और मानुष की है।

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