अविनाश चंद्रा's blog

संविधान दिवस विशेष

आज 26 नवंबर है। देश के लिए यह दिन अत्यंत ही खास है। वर्ष 1949 में आज ही के दिन संविधान सभा ने स्वयं के संविधान को स्वीकृत किया था। दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 से यह पूरे देश में लागू हो गया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पहल पर वर्ष 1979 से संविधान सभा द्वारा नए संविधान को मंजूरी देने के इस अत्यंत खास दिन को देश में राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाए जाने लगा। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गजट नोटिफिकेशन के द्वारा इस दिन को संविधान दिवस के रूपए में मनाए जाने की पहल की।

बाल दिवस और गंजेपन का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। लेकिन जिस तरह अमेरिका का कई देशों से कोई लेना-देना नहीं होता लेकिन फिर भी वो उनके फटे में टांग अड़ाता है, उसी तरह बाल दिवस आते ही लोग सोशल मीडिया पर बेवजह गंजों को प्रताड़ित करने लगते हैं। बाल दिवस को गंजेपन से जोड़कर मीम बनाए जाते हैं। कार्टून शेयर होते हैं।

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नोबेल पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने सन् 1980 में लिखी अपनी पुस्तक 'फ्री टू चूज़' में धन खर्च किए जाने की प्रक्रिया को अध्ययन की सरलता के लिए चार हिस्सों में वर्गीकृत किया था। पहला, आप अपना धन स्वयं पर खर्च करते हैं। दूसरा, आप अपना धन किसी और पर खर्च करते हैं, तीसरा आप किसी और का धन स्वयं पर खर्च करते हैं और चौथा, आप किसी और का धन किसी और पर खर्च करते हैं। उदाहरणों के माध्यम से फ्रीडमैन ने स्पष्ट किया था कि धन खर्च करने का पहला तरीका सबसे ज्यादा किफायती और सर्वाधिक उपयोगिता प्रदान करने वाला होता है। धन खर्च क

सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। यह लोगों को कहीं का नहीं छोड़ता है और उन्हें उपक्रमण से वंचित करता है। यह लोगों को स्वावलंबी होने के गुणों का नाश करता है। जाहिर तौर पर, सरकार की बढ़ती शक्तियां मुझे भयभीत करती है। भले ही यह लोगों को शोषित होने से बचाकर यह अच्छा काम करती है, लेकिन व्यैक्तिकता (निजी), जो कि सभी उन्नतियों के हृदय में वास करती है, को नष्ट कर यह मानवता को भीषण हानि पहुंचाती है.. : महात्मा गांधी

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आज रामधारी सिंह दिनकर की जयंती है। अज्ञेय ने उनके बारे में कहा था, ''उनकी राष्ट्रीय चेतना और व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि, उनकी वाणी का ओज और काव्यभाषा के तत्वों पर बल, उनका सात्विक मूल्यों का आग्रह उन्हें पारम्परिक रीति से जोड़े रखता है।'' वाकई दिनकर समूचे जीवन राष्ट्र और राष्ट्रवाद से जुड़े रहे। 

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क्या कृषि ऋण वास्तविक लाभार्थी तक पहुंच रहा है? यह सवाल देश के सर्वोच्च बैंक ने पूछा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कृषि ऋण की समीक्षा के लिए गठित आंतरिक कार्य समूह (आईडब्ल्यूजी) की ताजा रिपोर्ट में पाया है कि कुछ राज्यों में इस क्षेत्र को आवंटित ऋण उनके कृषि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक था। इससे ऐसे संकेत मिले हैं कि  कृषि ऋण का बेजा इस्तेमाल वास्तविक उद्देश्यों के लिए नहीं हो रहा है। केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्य इसी श्रेणी में आते हैं।

आज ही के दिन ठीक 85 साल पहले शरद जोशी का जैविक रूप से हम सभी साधारण पुरुषों की तरह जन्म हुआ था. फिर ऐसी कौन सी बात है, जिसके कारण शरद जोशी के जन्म को याद किया जाना चाहिए और उसका उत्सव मनाया जाना चाहिए?

आर्थिक मंदी की आहट मिलते ही तमाम बुद्धिजीवों और उद्योगपतियों के द्वारा सरकार से राहत पैकेज की मांग जोर पकड़ने लगी है.. ऐसा देश में नौकरियों को बचाने उद्योग धंधों को बंद होने से बचाने के नाम पर किया जा रहा है। लेकिन नीति निर्धारकों को ऐसा कोई भी कदम उठाने के से पहले आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक एडम स्मिथ के उस कथन को एक बार पुनः अवश्य पढ़ना चाहिए.. एडम स्मिथ ने कहा था कि 'उस कार्य के लिए जिसका परिणाम, किसी वर्ग विशेष के हित तक सीमित हो, सभी वर्गों के हिस्से के हितों की आहूति अन्याय होगा'..

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जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाने के बहुचर्चित फैसले पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म होने की सूचना संसद में दी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में अनुच्छेद-370 को खत्म करने की जानकारी दी। अनुच्छेद-370 खत्म होने की सूचना मिलते ही राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा हुआ है। जहां कुछ राजनेता इसे एक देश-एक संविधान बता रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। आइए 10 बिंदु में जानें- जम्मू-कश्मीर से धारा-370 खत्म होने का क्या मतलब है

नोबल पुरस्कार विजेता मिल्टन फ्रीडमैन (1912-2006) पिछली सदी के उन कुछ महान अर्थशास्त्रियों में से थे जिन्होंने सारी दुनिया के आर्थिक सोच और नजरिये को बहुत गहरे तक प्रभावित किया और उसे नए आयाम दिए। इस महान उदारवादी अर्थशास्त्री के जन्मदिन के मौके पर यहां प्रस्तुत है उनके लेखों और पुस्तकों से लिए गए कुछ उद्धरण जो उनकी अनूठी आर्थिक दृष्टि को प्रस्तुत करते हैंः 

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