अविनाश चंद्रा's blog

निःसंदेह, तकनीकी ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, लेकिन क्या रोटी से ज्यादा? क्या मोंटेक सिंह आहलूवालिया का यह कहना कि 26 रूपए प्रतिदिन कमाने वाला व्यक्ति गरीब नहीं... सही है????
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वेलेंटाइन डे और डेमोक्रेसी में बड़ी समानता है। समानता क्या, दोनों को एक ही समझिए। दोनों में एकाध छोटी-मोटी भिन्नताएं हों तो हों, वरना हमें तो जुड़वा वाला मामला ही लगता है। एक को उठा दो और दूसरे को बैठा दो। वेलेंटाइन की बात करते-करते, डेमोक्रेसी में टहल जाओ या डेमोक्रेसी की फिक्र करते-करते, वैलेंटाइन की याद में खो जाओ। 

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यह कहानी तब की है जब मुंबई में दलाल स्ट्रीट नाम की कोई जगह नहीं हुआ करती थी। उस समय यहां एक रिज क्षेत्र हुआ करता था, जिसमें तमाम कटीले पेड़ों व झुरमुटों के साथ ही साथ रसीले फलदार पेड़ व रंगीन फूलों के पौधे भी बहुतायत हुआ करते थे। रिज क्षेत्र में अन्य छोटे मोटे जानवरों व पशु पक्षियों के साथ चींटियों व टिड्डों की भी काफी संख्या पायी जाती थी। चींटी जहां सर्दी व बारिश के मौसम में होने वाली परेशानी व खाने की कमी को ध्यान में रखते हुए गर्मी के मौसम में चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए घर की मरम्मत व खाना जुटाने में लगी रहती। जबकि टिड्डा अपनी मस्तमौला प्रव्रति के अनुरूप खाओ पीओ

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