अविनाश चंद्रा's blog

पब्लिक पॉलिसी थिंकटैंक सेंटर फार सिविल सोसायटीएटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप। लैंसडाऊन (उत्तराखंड) की खूबसूरत वादियों में स्थित वनवासा रिसॉर्ट में 12 से 14 जुलाई 2019 तक चलने वाले ipolicy वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है। अब आईपॉलिसी वर्कशॉप के लिए 25 जून 2019 तक आवेदन किया जा सकता है। तीन दिनों (

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दशकों तक भारत में ‘अर्थशास्त्र’ का तात्पर्य गरीबी का अध्ययन रहा है। कुछ समय पहले तक कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने की शुरूआत ‘गरीबी के दोषपूर्ण चक्र’ नामक सिद्धांत (Theory of vicious circle of poverty) से की जाती थी। इस सिद्धांत के अनुसार गरीबी को दूर नहीं किया जा सकता है। गरीब लोग तथा गरीब राष्ट्र के लिए गरीब रहना नियति है। वास्तव में यह कोरी बकवास है। यदि यह सत्य होता तो संसार आज भी पाषाण युग में होता। जीवनियों (Biography) का इतिहास ‘गरीबी से अमीरी’ का सफर करने वाली कथाओं से भरा पड़ा है। हांगकांग और अमेरिका गरीब अप्रवासियों (immigrants) द्वार

टैगोर जयंती विशेषः

“हिंदुओं के साथ मुसलमानों का अगर कहीं कोई विरोध है तो मैं हिंदू नहीं हूँ, ऐस कहकर इस विरोध को समाप्त करने की इच्छा, फौरी तौर पर समस्या का सहज समाधान लग सकता है; लेकिन सही मायने में यह उपयुक्त नतीजा नहीं निकाल सकता है। ऐसा कहने से हिंदू-मुस्लिम का विरोध पहले जैसा ही रह जाता है। इससे केवल इतना ही होता है कि ऐसा कहकर हम खुद को इस समस्या से अलग कर लेते हैं।

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स्वतंत्रता सर्वोच्च राजनैतिक मूल्य के रूप में
समाजवादी मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था की इस आधार पर भी आलोचना करते हैं कि यह असमानता को बढ़ावा देती है। उनका विश्वास है कि राज्य के हस्तक्षेप व नियंत्रण से वे समानता को बढ़ावा दे सकते हैं। यही जवाहर लाल नेहरू का समाज का समाजवादी ढांचा (Socialistic pattern of society) नामक ‘महान’ दर्शन था।

मैं अपनी माँ को कुछ समय पहले तक सब्जी विक्रेताओं के साथ मोलभाव करते हुए देखती थी। विक्रेता दो तीन रूपये कम कर देते थे। कुछ दिनों मैं अक्सर खुद को ऐसा ही करता देखती हूं और फिर झुंझलाती हूं। यह एक तरह की हम सबकी किसानों के प्रति विडंबना है। उस दो तीन रुपये अथवा कल और आज में  इससे क्या बदल गया ? आमतौर पर, एक सब्जी विक्रेता को कीमत कम करने से इनकार करते हुए निराशा होगी, एक वयस्क के रूप में मेरी योग्यता पर वह सवाल उठाएगा। इसे सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य हमें उनके बेहतरी के लिए क्या करना है कुछ नहीं पता है। 

अंतरिम बजट आने के बाद स्मार्ट विश्वविद्यालय ने बजट और गरीब विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, इस प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार पानेवाला निबंध इस प्रकार है-

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मैं एक अभिभावक हूं और अपने बच्चे की शिक्षा और व्यापक शिक्षा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण हितधारक हूं। मेरी आवाज नहीं सुनी गई।

जबतक गलती करने की स्वतंत्रता न हो, तबतक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं : महात्मा गांधी
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चालू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित- लोकतंत्र में रिजार्ट -विषय पर निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध यह है-

- अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म प्रतियोगिता में ‘ड्रीमर्स ऑफ ब्रेसवाना’ और ‘ब्रिंगिग स्कूल्स वेयर देयर इज नन’ को क्रमशः दूसरी और तीसरी श्रेष्ठ फिल्म का खिताब

- एडुडॉक फेलो वर्ग में विकिरण को श्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार

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