अविनाश चंद्रा's blog

स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, उदारवादी विचारक, शिक्षाविद् एवं समाज सुधारक गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म रत्‍‌नागिरी कोटलुक ग्राम में एक सामान्य परिवार में 9 मई 1866 को हुआ। उनके पिता का नाम कृष्ण राव था जो एक क्लर्क थे। न्यू इंग्लिश स्कूल पुणे में अध्यापन करते हुए गोखले जी बालगंगाधर तिलक के संपर्क में आए। गोपाल कृष्ण गोखले को वित्तीय मामलों की अद्वितीय समझ और उस पर अधिकारपूर्वक बहस करने की क्षमता से उन्हें भारत का 'ग्लेडस्टोन' कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सबसे प्रसिद्ध नरमपंथी थे। उन्होंने 1905 में सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी की

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शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा नॉर्थ दिल्ली म्युन्सिपल कॉरपोरेशन के स्कूल में किये गए औचक निरीक्षण में कई शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। एक शिक्षक ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी लेकिन वास्तव में वह निरीक्षण के दौरान स्कूल में उपस्थित नहीं था। जो शिक्षक स्कूल में उपस्थित थे वे भी क्लास नहीं ले रहे थे। कुछ शिक्षक जो क्लास ले रहे थे वहां भी छात्रों की उपस्थित कुल दाखिल छात्रों की संख्या के आधे से थोड़ी ही अधिक थी। यह तब है जबकि कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद हैं और कक्षाएं ऑनलाइन चल रही हैं।

भारत में कृषि उत्पादों का मूल्य समर्थन एक जोखिम भरा काम है और हमें इसमें निहित खतरों से पहले ही चेत जाना चाहिए। भारत की राष्ट्रीय आय का 50 प्रतिशत कृषि से आता है। मूल्य समर्थन की नीति मूल तौर पर मूल्य समर्थित माल के उत्पादन के लिए शेष समुदाय द्वारा उत्पादकों को दिया गया अनुदान है। जिन देशों में कृषि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का एक छोटा क्षेत्र है, वहां पर अर्थव्यवस्था के बड़े क्षेत्र में अनुदान बहुत ही कम आकार में बांट दिया जाता है और किसानों को इसका पर्याप्त लाभ मिलता है। भारत में मामला इससे ठीक उल्टा है। अनुदान के बोझ का असर खुले बाजार में खरी

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- हम अमीर सरकार वाले गरीब देश के निवासी है
- गरीबी उन्मूलन के लिए लाई जाने वाली सरकारी योजनाएं गैरकानूनी और काला धन बनाने का स्त्रोत होती हैं
- यदि समाजवाद के प्रति हमारी सनक बरकार रहती है तो देश का भविष्य अंधकारमय ही रहेगा

देश की पहली महिला शिक्षक, समाज सेविका, मराठी की पहली कवियित्री और वंचितों की आवाज बुलंद करने वाली सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के पुणे-सतारा मार्ग पर स्थित नैगांव में एक दलित कृषक परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम खण्डोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। 1840 में मात्र 9 साल की उम्र में सावित्रीबाई का विवाह 13 साल के ज्योतिराव फुले के साथ हुआ।

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केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान विधानसभा में तीन कृषि संशोधन विधेयक पारित किए गए हैं जिनका उद्देश्य इन कानूनों के राज्य के किसानों पर असर को निष्प्रभावी करना है। राजस्थान सरकार का कहना है कि इससे किसानों के हितों की रक्षा होगी और उनके लिए न्यूनतम आय सुनिश्चित होगी। लेकिन विधेयकों पर ध्यान देने से पता चलता है कि इसके प्रावधान किसानों की मदद करने की बजाए लंबे समय में उन्हें नुकसान ही पहुंचाएंगे।

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