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Wednesday, October 13, 2010

कुछ बेहद महत्वपूर्ण सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब आर्थिक क्षेत्र के वैज्ञानिकों को देना ही चाहिए. ऐसे सवाल “What If” यानी “क्या होता यदि” से शुरू होते हैं. क्या हमें 8-9 फीसदी की आथिर्क विकास दर से संतुष्ट हो जाना चाहिए, खास तौर पर ऐसे समय में जब दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं 2008 के बाद शुरू हुए भीषण आथिर्क संकट से अब भी बमुश्किल उबर रही हैं? लेकिन क्या हम इन बातों को दरकिनार कर सकते हैं कि जीडीपी वृद्धि दर आधारित बेहतरी को आर्थिक विकास और जीवन स्तर का पैमाना मानने की बात पर सवालिया निशान उठाए जाते हैं?

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Wednesday, October 13, 2010

पिछले एक दशक में भारत और चीन दोनों ही काफी तेजी से विकसित हुए हैं। हालांकि आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के लिहाज से भारत का प्रदर्शन चीन से कुछ कम अच्छा है। चीन के परिणाम चौंकाने वाले हैं- विकास की औसतन 9 फीसदी दर और पिछले दो दशक में 30 करोड़ लोग गरीबी की रेखा के ऊपर उठ चुके हैं। जबकि भारत में, ज्यादा विकास दर के बावजूद गरीबी एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन देश की आर्थिक स्थिति का स्थायी भाव सा बन गया है। हाल ही में मेरे एक सहकर्मी ने मुझसे जानना चाहा कि क्या मुझे लगता है कि भारत के विकास की धीमी गति का कारण राजनीतिक...

Monday, October 04, 2010

मैं यहां यह नहीं कह रहा हूं कि भारत जल्द ही उन हालात में होगा जिनमें आज ग्रीस है. हालांकि पिछले कुछ समय में हुई घटनाएं दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए बहुत ज्यादा प्रोत्साहन भरी नहीं रही हैं.

अर्थशास्त्रियों को जिस सवाल का जवाब देना है वह यह है कि क्या राष्ट्रमंडल खेलों पर होने वाला खर्च ऑर्प्च्युनिटी कॉस्ट के संदर्भ में इन संसाधनों का प्रयोग करने का सर्वश्रेष्ठ विकल्प है. इस तरह के बड़े आयोजन के लिए सरकार (इस मामले में भारतीय ओलंपिक संघ) एकमात्र बोली लगानेवाली और आयोजक...

Friday, April 09, 2010

झारखंड  की राजधानी  रांची से 30 किमी दूर इटकी में एक बच्ची पिछले तीन साल से अमानवीय माहौल में जीने पर मजबूर है। साथ ही  भारत  जैसे  कल्याणकारी  राज  में  सबको  चिकित्सा  का  अधिकार  नहीं...

Friday, April 09, 2010

सीआरपीएफ के 74 जवानों की नक्सली हमले में मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. इस समस्या पर केंद्र और राज्य सरकारों की बड़ी-बड़ी बातें हम कई बार सुन चुके हैं लेकिन इस समस्या का समाधान होने की बजाए पुलिस और सुरक्षा बलों के ज्यादा से ज्यादा कर्मी तथा साथ ही आम...

Wednesday, April 07, 2010

उत्तर प्रदेश में लगभग चार हजार करोड़ रु. से ज्यादा धन स्मारकों, पार्कों के निर्माण और उनके रख-रखाव पर खर्च किया जा रहा है। लेकिन बात जब शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को लागू करने की आती है तो राज्य की मुख्यमंत्री केंद्र से अनुदान की दरकार के नाम पर आरटीई को लागू...

Thursday, April 01, 2010

कहते हैं इनसान की पहचान उसके कर्मों से होती है। यह कथन कदम सही भी है, तभी तो अमिताभ आज एक महानायक हैं और नरेंद्र मोदी को धर्मनिरपेक्षतावादी और सभ्य समाज की दरकार रखने वाले लोग फूटी आंख...

Monday, March 22, 2010

एक बच्चा मांद से निकलकर, बड़ी ही बेबसी से अपनी मां का इंतजार करते हुए नजर आता है। उसे इंतजार है, शिकार पर गई मां का। लेकिन वह नहीं जानता कि उसकी मां खुद शिकार बन चुकी है। इसके बाद टीवी स्क्रीन पर...

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